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21 December, 2016

मुझ पर एहसान करती है - एम के पाण्डेय ‘निल्कों’

मुझ पर एहसान करती है

ये कह कर बदनाम करती है

किसी रोज पढ़ेगा कोई इन चन्द लाइनों को

तो कोई कहेगा की तुमसे ही प्यार करती है

पर कभी नहीं वो एक़रार करती है

बस हर पल ही तकरार करती है

छेड़ा था किसी रोज दूर से ही उसको 

आज तक वो मुझसे सवाल करती है

शाम की वो क्लास करती है

सरे बाज़ार श्रंगार करती है

क्या मजाल जो कोई कह दे कुछ उसको

वही पर वो उसको हलाल करती है

गुस्से से चेहरा जब वो अपना लाल करती है

पूरे मोहल्ले मे फिर बवाल करती है

निल्को एक टक देखता है उसको

जब जब वो आखे चार करती है
-

एम के पाण्डेय निल्कों


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