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28 December, 2016

जन्मदिन उन बच्चो के साथ

जन्मदिन उन बच्चो के साथ
डाल गले मे हाथ
खा रहे थे सभी बैठ सड़क पर
पिज्जा हम उनके साथ
कोई जाति नहीं
कोई मजहब नहीं
जो उनको दे दिया
है वही सही

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27 December, 2016

गरीब बच्चो के संग लिया जन्मदिन का ‘आनंद’

 बड़े बड़े होटलो और रिहायसी जगह तो अपना जन्मदिन सभी मनाते है किन्तु आर्थिक रूप से कमजोर बच्चो के साथ ये कुछ और स्पेशल हो जाता है । हमारा उदेश्य उन तरसती आखो तक जन्मदिन के मिठाई और केक पहुंचाना है जो कभी ये स्वाद चख न सके । इस तरह से बच्चों की खुशियों को देखकर एक अलग ही आत्म-संतुष्टि का एहसास मिलता है| देवदर्शन डॉट नेट के सहयोग से बच्चो को खाने-पीने की सामग्री व खिलौने दिये गए । एम के पाण्डेय निल्को ने कहा की इस तरह से बच्चों की खुशियों को देखकर एक अलग ही आत्म-संतुष्टि का एहसास मिलता है| अपने बच्चों के जन्मदिन की पार्टी पर हम हजारों और लाखों रूपये खर्च कर देते हैं और कुछ बच्चों, दोस्तों और रिश्तेदारों को हम खिलाते-पिलाते हैं, जो कि इस तरह की पार्टी से उब चुके होते हैं या उनके लिये इतना महत्वपूर्ण नहीं होता , लेकिन यकीन मानिये आप उतनी ख़ुशी नहीं पा सकते जो इन बच्चों को ख़ुशी देकर पायी है| उक्त अवसर पर उमाकांत, रोहित, रवि, सुभाष ज्योति, प्रीती, कृष्ण, दीपक, अनुप, वर्षा, इत्यादि कई लोग मौजूद थे । 











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21 December, 2016

मुझ पर एहसान करती है - एम के पाण्डेय ‘निल्कों’

मुझ पर एहसान करती है

ये कह कर बदनाम करती है

किसी रोज पढ़ेगा कोई इन चन्द लाइनों को

तो कोई कहेगा की तुमसे ही प्यार करती है

पर कभी नहीं वो एक़रार करती है

बस हर पल ही तकरार करती है

छेड़ा था किसी रोज दूर से ही उसको 

आज तक वो मुझसे सवाल करती है

शाम की वो क्लास करती है

सरे बाज़ार श्रंगार करती है

क्या मजाल जो कोई कह दे कुछ उसको

वही पर वो उसको हलाल करती है

गुस्से से चेहरा जब वो अपना लाल करती है

पूरे मोहल्ले मे फिर बवाल करती है

निल्को एक टक देखता है उसको

जब जब वो आखे चार करती है
-

एम के पाण्डेय निल्कों


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10 December, 2016

मुक्तक : आँख






आंखो मे सुरमा लगाती क्यू है

आईना देख इतराती क्यू है

तुझ पर जाऊ मैं वारि वारि

पर मुझे तू बार बार आजमाती क्यू है



एम के पाण्डेय निल्को

 
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09 December, 2016

होंठ उसके जैसे गुलाब की पंखुड़िया

होंठ उसके चेहरे पर
कुछ यूँ नज़र आते है
जैसे कुछ गुलाब की पंखुड़िया
पानी में नज़र आते है
उसे देख कर तो कुछ
लड़के भी शरमाते है
नंबर लेना देना, आगे पीछे घूमना
सब उसे देख अपनी
किस्मत आजमाते है
वो कहती है कैसे कैसे गीत
मुझे देख कर लोग गाते है
शक्ल सूरत में मुझे
अपनी प्रेमिका को को पाते है
कह दे वो यदि वो सच
और दिल की बात तो 'निल्को'
सबसे पहले तुम्हारे जैसे लोग ही
अपना मुँह फुलाते है
-
एम के पाण्डेय निल्को

 

मुक्तक - जो भी तेरे पास आता है ।

जो भी तेरे पास आता है
वो तेरा ही हो जाता है
तेरी उलझी सुलझी ये जुल्फ़े
मद मस्त होकर लहराता है
-
एम के पाण्डेय निल्को

02 December, 2016

Demonetisation - Exclusive Video on Notebandi (नोटबंदी)

Demonetisation - Exclusive Video on Notebandi (नोटबंदी) 

 M K Pandey on Demonetisation of Currency

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