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02 November, 2016

आतंकियों का समर्थन करने वालों का विरोध करती मेरी नयी रचना

(आठ आतंकियों के एनकाउंटर के लिए पुलिस का समर्थन और आतंकियों का समर्थन करने वालों का विरोध करती मेरी नयी रचना)
कवि - मयंक शर्मा (09302222285)

खूब मनाई दीवाली क्या खूब पटाखे फोड़े हैं
आठ फ़रिश्ते धरती से सीधे जन्नत को छोड़े हैं

जेल का दाना पानी खाकर जो अक्सर इतराते थे
संविधान को कोस कोस मस्ती में नाचे जाते थे

खाकी को गाली देते थे तुम कुछ ना कर पाओगे
बस हमको बिरयानी देते देते ही मर जाओगे

खाकी ने दिखलाया दम और नया सवेरा कर डाला
कतरा कतरा आतंकी का बारूदों से भर डाला

अंधकार को दूर भगाने नयी पहल कर  डाली है
दीवाली के अगले ही दिन चहल पहल कर डाली है

कुछ लोगों ने इसको फिर से जल्दी ही एक मोड़ दिया
वोटों की खातिर लाशों को फिर मज़हब से जोड़ दिया

आतंकी से हमदर्दी की फिर आवाज़े आती हैं
अंधकार के हक़ में लड़ने काली रातें आती हैं

कुछ कहते है गुंडागर्दी कुछ कहते मनमर्जी है
कुछ को फिर से पीड़ा है कि ये मुठभेड़ भी फर्जी है

कुछ लोगों को आठ वोट की कमी दिखाई देती है
कुछ की आँखों में मज़हब की नमी दिखाई देती है

कुछ चैनल के पत्रकार का पत्थर दिल भी पिघल गया
कैसे कोई अंधकार को इतनी जल्दी निगल गया

अपना भी एक दीप बुझ गया अंधकार से लड़ने में
लेकिन कोई कमी नहीं की उनके आगे अड़ने में

असली है मुठभेड़ अगर तो नमन हज़ारों है खाकी
नकली भी है तो उनको निपटाओ जितने हैं बाकी.

कवि - मयंक शर्मा (09302222285)
          दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )
       
  

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