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20 May, 2016

Selfie with Sunshine


16 May, 2016

Rajasthan 12th Board Result 2016

We are informing you all RBSE students, Rajasthan Board 12th Result 2016 declared on 16th May 2016 at 6:00PM Today. As Board of secondary education Rajasthan announce the exact date we will update here. We are reuqestiing your all students belongs from scince, commerce and arts stream please keep patience. Firstly Rajasthan Boardannounced Commerce Result 2016 and after that science result 2016 and arts result 2016. For viewing the RBSE 12th Result 2016 online connected with us. We will update the 12th result 2016 BSER here on the same time when board update it on the official website rajresults.nic.in 


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13 May, 2016

Sangam Kala Group - SURTARANG 2016

CLICK HERE FOR  Surtarang Application Form













Venue : The Roots, 60 Shiv Colony,

LAXMI NAGAR, HATWARA ROAD, JAIPUR - 06 


for more details contact
 Mr. Jai Sood +91-9799113100 
&
 Mr. M K Pandey +91-8890553555




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One Day free Workshop on WOMEN SELF DEFENCE


10 May, 2016

संगीत प्रतियोगिता ‘सुरतरंग’ का होगा आयोजन

जयपुर, संगम कला ग्रुप 31 मई को राज्यस्त्रीय संगीत प्रतियोगिता ‘सुरतरंग’ का आयोजन करेगी। इसे लेकर एक बैठक जयपुर स्थित कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता जय सूद ने की। राज्यस्त्रीय संगीत प्रतियोगिता ‘सुरतरंग’ के लिए 31 मई को आडिशन लिया जाएगा। izfr;ksfxrk ds Js"B xk;d@xkf;dk dks fo[;kr laxhrdkj Lo0 Jh /keZohj usgjk Le`fr VªkWQh ls lEekfur fd;k tk,xkA  इस बारे में एम के पाण्डेय निल्को ने बताया की इस प्रतियोगिता में सीनियर और जूनियर वर्ग के कलाकार भाग लेंगे। इस दौरान कहा गया की गायन प्रतियोगिता के विजेताओ को दिल्ली में होने वाली आल इंडिया फाइनल में भाग लेने का मौका मिलेगा तथ विजेता कलाकारों को संस्थान आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी । laxe dyk xqi }kjk lksuw fuxe] Js;k ?kks"kky] lqfuf/k pkSgku] tlfiUnj u:yk] fiukt+ elkuh] vkuUn jkt vkuUn]  feuk{kh 'ks"kknzh] f'kckuh d';i] Lusgk] eks- lyker] rks"kh] 'kkfjc] vkd`fr dDdM+] johUnz mik/;k;] _pk eq[kthZ] jathr iaokj] uezrk 'kekZ]  lkftn [kku] ikouh ik.Ms] yksfj;k] :nzk{k जैसे कई लोगो को मंच प्रदान किया है ।



फ़ॉर्म डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे  http://bit.ly/1Ol3OD0 



Venue : The Roots, 60 Shiv Colony,

LAXMI NAGAR, HATWARA ROAD, JAIPUR - 06 


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Mr. Jai Sood +91-9799113100 
& 
Mr. M K Pandey +91-8890553555

08 May, 2016

Sangam Kala Group - Jaipur Audition

Sangam Kala Group needs no introduction to the music, dance and drama loving audience. The Group is prominent non-commercial registered cultural group which is engaged in the promotion of Country’s artistic cultural tradition. The group owes its existence to the concerted efforts and devotion of young amateur artists dedicated to the cause of cultural promotion. Founded in 1974 by some such enthusiasts, the Group set forth as its main objectives the provision of cultural smooth flow of their talents in the form of dance, drama and music. Towards this direction, the Group started in a humble way by organizing plays which had one common theme “the social reform”. The plays served a dual purpose of not only making the audience think about social reforms but also of bringing to light the amateur talent which normally remains behind the veils because of lack of opportunities. In 1977, the Group organized the First All India Light Music Vocal Competition in the memory of the immortal singer Master Madan, Master Madan was the Durbar musician of His Highness the Raja Sahib Bahadur of keonthol State (Simla Hills). The Group organized this competition to spot amateur talent in the Country and bring it out of oblivion, laying special emphasis on discovering singing talent amongst the below fourteen age group. Renowned Music Director & composer from the radio, television and films have graced the panel of judges to select the best talent. The Group also offers scholarships to educate promising voices in light music.


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Venue : The Roots, 60 Shiv Colony,

Laxmi Nagar, Hatwara Road, Jaipur - 06 


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मदर्स डे पर विशेष

आज मै तुम्हे याद करूँगा क्योंकि आज मदर डे है, आज मै तुमको तोहफे में कुछ दूंगा क्योकि आज मदर डे है, आज मै तुमसे समय निकाल कर मिलूँगा क्योंकि आज मदर डे है, साल में एक बार ही सही मै तुम्हारे बारे में सोचूंगा क्योंकि आज मदर डे है.
कई समाचार पत्र और न्यूज चैनल कहते है कि आपको मम्मी से कितना प्यार है? कितनी खास हैं माँ आप के लिए? मदर्स दे पर तोहफा देकर आप साबित कर सकते हैं कि माँ से बड़ा कोई नहीं,( कमाल है! अब बाजारू तोहफे माँ को माँ साबित करेंगे) शायद माँ को उन नेताओं कि सड़क पर लगी मूर्ति समझ लिया गया है जिनपर साल भर कबूतर व कौए गन्दा करते हैं और साल मे एक दिन कोई नेता उन्हें साफ करवाकर नयी माला पहनाता है और उन्हें याद करके अपना फर्ज निभाता है और फिर उसे उसके जीवन पर्यंत चलने वाले हाल पर छोड़ देता है.
क्या इतना उतावलापन किसी भारतीय के लिए माँ के प्रति साल में एक ही दिन रहता है, क्या हम माँ को साल में एक दिन याद रखने वाली मूर्ति समझते हैं कि उसे साफ किया और कुछ नये मालाओं से सजाकर फिर किसी ओट पर रख दिया कि अगले साल फिर उसे मदर डे पर उठाऊंगा और वही काम पूरा करके माँ के कर्ज को अदा कर दूंगा.
हमारी नई दुनिया में जीने वाले आधुनिक भारतीयों ये हमारी परंपरा नही है, क्योकि माँ हमारे सर्वश्व मे निवास करती है वह हमारे जीवन के हर क्षण मे हमारे साथ रहती है, पूरा जीवन हम उसकी सेवा करके भी उसके कर्ज को नही उतार पाते तो साल मे एक दिन याद करके हम क्या कर लेंगे ।
अरे जो लोग अपनी माँ को अपने साथ नहीं रखते या भूल जाते हैं वे लोग मदर डे मनावें. हम तो भारतीय हैं हमारी तो दिन की शुरुआत ही माँ के चरणों से होती है इसीलिए हमारा हर दिन मदर डे होता है.
हमें पश्चिम से ये सीखने की नहीं बल्कि उनको ये सिखाने की जरुरत है कि हम अपने रिश्तों कि मार्केटिंग नहीं करते और न ही उनको साल मे केवल एक दिन मनाते हैं बल्कि हमारे हर रिश्ते हमारे जीवन कि अनमोल कडिया होते हैं जिनकी माला हम हर पल अपने ह्रदय से लगाये रहते हैं।
(डॉ रत्नेश त्रिपाठी जी के फेसबुक वाल से )

01 May, 2016

मजदूर दिवस

आज दो ही वर्ग हैं,दो ही वर्ण हैं,दो ही जातियां है,दो ही धर्म हैं पूरी दुनिया में एक मालिक और एक मजदूर। एक शोषित और एक शोषक,बाकी सब मिथ्या है।। बदबूदार गन्दी बस्तियों में रहने के लिए मजबूर मजदूर और उन बस्तियों की नीव पर खड़े हुए गगनचुम्बी इमारतों में रहता शोषक मालिकों का वर्ग।। जन्म से ही इन अमीरों ने उसके मन में एक बार भर दी की तुम गन्दी नाली के कीड़े हो और इसी गटर में घुट घुट कर मरने के लिए पैदा हुए हो।। धीरे धीरे ये बाते उनके डीएनए में आ गयी की उनकी नियति वही है।। सत्य ये है की शोषको और मालिकों की नीतिया सर्वदा मजदूर विरोधी रही है यदि ऐसा न हो तो वो मालिक बन ही न पाए यदि ऐसा न हो तो उनके महलो को बनाने वाले गंदी बजबजाती बस्तियों में जहरीली शराब पी के नहीं मरते।। आप हम भी पढ़े लिखे उन्ही मजदूरों की अगली पौध हैं,बस मजदूरी थोड़ी ऊँची है और मकान अपेक्षाकृत साफ़ मगर एक अवकाश का प्रार्थना पत्र आप को आपकी औकात बता देता की न तो मालिको का डीएनए बदला न ही मजदूरों का.. बदलना होगा अन्यथा संतुलन बिगड़ेगा और बिगड़े संतुलन की कोख में पलती है "बोस्टन की चाय पार्टी" और छद्म विकृत माओवाद की अगली विकृत राजनैतिक पौध...
मजदूर दिवस की शुभकामनाएं..
आशुतोष की कलम से

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