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08 April, 2016

विक्रम संवत और शक संबत

ये दोनों ही संवत शकों पर भारतीय चक्रवर्ती राजाओं की विजय के स्मारक हैं। विक्रम संवत 57 ईपू सम्राट विक्रमादित्य द्वारा शकों पर जीत के उपलक्ष में माना जाता है जबकि शक संवत 78 ई. में सातवाहनों द्वारा शकों पर विजय के रूप में मनाया जाता है या शक सम्राट कनिष्क द्वारा प्रारंभ किया बताया जाता है।
शक संवत भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर है जबकि विक्रम संबत हिन्दुओं का धार्मिक कलेन्डर है।
बारह महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से ही शुरू हुआ | महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है | यह बारह राशियाँ बारह सौर मास हैं | जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है | पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है | उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है | चंद्र वर्ष सौर वर्ष से 11 दिन 3 घाटी 48 पल छोटा है | इसीलिए हर 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ दिया जाता है |
यह चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथम नवरात्रि के प्रथम दिन से शुरू होता है।
बर्तमान में प्रचलित ईसा सन में +57 करने पर विक्रम संबत और -78 करने पर शक सबंत निकल आता है।

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