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11 October, 2015

थोड़ा तो ठहर - एम के पाण्डेय निल्को

चेतावनी - दोस्तो आज एक मनगढ़त रचना आप के सामने पेश कर रहा हूँ इसका किसी भी जीवित व्यक्ति से कोई भी सम्बंध नहीं है यदि ऐसा पाया जाता है तो उसे मात्र एक संयोग ही कहा जाएगा । 

गई थी वो दूसरे शहर 
बरपा रही थी कही वो कहर 
जब मुड़ कर देखि वो मुझको 
तो निल्को ने कहा - थोड़ा तो ठहर 

शुरू हुआ एक अनोखा सफर 
आए और बीते कई पहर 
मन मे बसी तस्वीर उसकी 
और उठ रही थी कई लहर 
रेलगाड़ी के सफर मे पड़ी जब नज़र 
जा रही थी वो अपने घर 
क्षण भर के मुलाक़ात मे ही 
वो लगी गणित की अंश और मैं हर 

छोड़ गई आधे रास्ते मे ही वो 
और हंस कर कह गई – यू केन गो 
देखता रहा मधुलेश जब तक पड़ी नज़र 
और लगा समय गया था कुछ पल ठहर 
एम के पाण्डेय निल्को




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