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06 July, 2015

भोले ओ भोले क्यू नहीं तू बोले

भोले ओ भोले
क्यू नहीं तू बोले
एक बार तो कम से कम
अपना आख खोले
धरती है तेरा बिस्तर
चादर है आकाश
चंदा सूरज दर पर तेरे
फैलाते प्रकाश
तू अबढ़र दानी हे स्वामी
तू घट-घट वासी अंतर्यामी
कुछ भी नहीं अदेय है तेरे
सारे दीन भरोसे तेरे
बड़े-२ तूने वरदान दिए
दुनिया को बहुत पैगाम दिए
लोभ मोह की करी विदाई
काम त्याग कर भस्म रमाई


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