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31 July, 2015

बच्चा हूँ या हो गया अब बड़ा

बचपन पर चढ़ी धूल
बच्चे खेलना गए भूल
रोज पानी देने पर भी
बगीचे के मुरझा रहे फूल

करता हूँ बस तीन चार बाते
जिसमे नहीं कोई भी करमाते
हो गए हम बड़े फिर भी
बच्चो की तरह ही शरमाते

रंग बिरंगे कागज के वो कतरन
फटे पुराने कपड़े और टूटे हुये बरतन
कह रही थी वो एक कहानी
और भीग रहा था मेरा तनमन

बच्चा हूँ या हो गया अब बड़ा
सबके निगाहों मे मैं ही क्यू पड़ा
कहने और सुनने की आज़ादी है सबको
पर सब केवल ‘निल्को’ के आगे ही क्यो अड़ा

योगेश का युग आएगा कब
निशु अपना निशान दिखाएगा कब
ये जो दिखते है न भोले
असल मे है वो गजेंद्र के गोले

मत पुछो मोहक की मार
जैसे हो दोधारी तलवार
करता है वो ऐसे असर
जैसे है निल्को की नज़र

बात करे जब अभिव्यक्ति अभिषेक की
कम नहीं है अगड़ाई अनुज की
मिल जाते ये सब जब धुरंधर
कहते है सब कृपा है टीम की

आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद .........!

30 July, 2015

महत्वपूर्ण सूचना - कृपया ध्यान दे ....!

दोस्तो/पाठको आप का स्नेह मिलता रहे हमे और हम कुछ नया करते रहे ऐसी अभिलाषा और अपेक्षा रखते है, बताना चाहेगे की आज से हम 'योगेश के युग', 'निशु के निशान', 'गजेंद्र का गोला', 'अभिषेक की अभिव्यक्ति', 'अनुज की अगड़ाई', 'नज़र और निशाना निल्को का', 'Whats App हँगामा', और 'मोहक की मार', शीर्षक से कुछ अपनी अभिव्यक्ति, नज़रिया, सोच आप के सामने प्रस्तुत करेगे। उम्मीद है की यह VMW Team का नया, मज़ेदार, और अनोखा प्रयोग आप को रास आएगा । दोस्तों हमारा यह नया प्रयोग कैसा लगा पढ़कर बताईये, कृपया अपने भावपूर्ण कमेंट मेरे blog पर comment box में लिखिए और हमारा हौसला बढाए. कृपया अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा. आपकी राय हमे हमेशा कुछ नया लिखने की प्रेरणा देती है और आपकी राय निश्चिंत ही हमारे लिए अमूल्य निधि है । मित्रों हम VMW Team ब्लॉग में लगातार कुछ ऐसा व्यापक बदलाव लाने की कोशिश में हैं जिससे कि यह आपकी अपेक्षाओं पर और भी खरा उतर सके। हम चाहते हैं कि इसमें आपकी भी सक्रिय भागीदारी हो। आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। हमेशा की तरह आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।


सादर, सप्रेम
एम के पाण्डेय 'निल्को' 
एडमिन 

Whats App से प्राप्त - आरक्षण विरोध

हे युवाओं ! उठो और बहिष्कार कर दो ,
आरक्षण के उत्थान को तुम खाक़ कर दो ,

आरक्षण तो स्वार्थ है नेताओं का ,
जो कर देते हैं खंडन हम युवाओं का,
बना लेते हैं सरकार हमारे वोट से ,
और घोट देते हैं गला विश्वासों का,

नेताओं की इस तृष्णा को ख़त्म कर दो,
वोट राजनीति को संसद में बंद कर दो ,
हमारा और दोहन हो ना पाएगा -
तुम ये नारा और भी बुलंद कर दो ,

वक्त है यंही हमारी एकजुटता का,
अपने विरोध स्वर के सदिश प्रसारता का,
राज रक्षक वहीं जो बन बैठे हैं भक्षक ,
समय हैं यंही उनके सर्वानाषता का ,

वोट नीति की गली आज अन्धकार कर दो ,
जोश और अटलता का आज तुम हुंकार भर दो ,
हे युवाओं ! उठो और बहिष्कार कर दो,

आरक्षण के उत्थान को तुम खाक़ कर दो 

(एक अजनबी के मैसेज से प्राप्त )
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26 July, 2015

कारगिल युद्ध - विजय दिवस

किसी का चित्र नोटों पे
किसी का चिन्ह वोटो पे
शहीदों तुम ह्रदय में हो
तुम्हारा नाम होंठो पे .....

VMW Group सभी शहीदों को कोटि कोटि नमन करता हैं।
जय हिन्द जय भारत


आज कारगिल युद्ध की वर्षगाठ है आप सभी को इस
विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
और हमारे जांबाज सैनिको और शहीद जवानों को शत शत नमन...



17 July, 2015

नेट न्यूट्रेलिटी बिना शर्त अमल हो |

नेट न्यूट्रेलिटी के बारे में दूरसंचार विभाग की बहु-प्रतीक्षित रिपोर्ट पर मोबाइल इंटरनेट उपभोक्ताओं के नजरिए से गौर करें तो उसमें अच्छे और बुरे दोनों संकेत हैं। अच्छी बात तो यह है कि इसमें नेट न्यूट्रेलिटी का समर्थन किया गया है। लेकिन साथ ही ओवर टॉप (ओटीटी) कहे जाने वाले वाॅट्सएप, वाइबर, वीचैट, स्काइप जैसी सेवाओं पर मुफ्त ऑडियो/वीडियो कॉल की दी जा रही सेवाओं को विनियमित करने की जरूरत भी बताई गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाली समिति की राय है कि ओटीटी सेवाओं की वजह से मोबाइल सेवा देने वाली एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया जैसी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। ये कंपनियां सरकार से मिले लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक फोन सेवा देती हैं, जबकि ओटीटी सेवाएं किसी ऐसी शर्त का पालन नहीं करतीं। बेशक कमेटी की यह राय अपनी जगह सही है। लेकिन मुद्दा है कि तकनीक की उन्नति के साथ विकसित होने वाली सुविधाओं को नियंत्रित या सीमित करने का प्रयास आखिर कितना वाजिब होगा? अगर इंटरनेट से जुड़ी किसी सेवा के साथ ऐसा किया जाता है, तो क्या उसके बाद भी यह मानने का आधार बचेगा कि नेट न्यूट्रेलिटी का समग्र रूप से पालन किया जा रहा है? नेट न्यूट्रेलिटी संबंधी बहस दो प्रवृत्तियों की वजह से उठी। ऐसा देखा गया कि इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां (आईएसपी) कुछ वेबसाइटों/एप्स के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा कर रही हैं, जबकि दूसरों तक पहुंच वे रोक देती हैं अथवा उनकी रफ्तार को सुस्त कर देती हैं। माना गया कि वे ऐसा करके इंटरनेट सेवा-प्रदाता के रूप में अपेक्षित तटस्थता को भंग कर रही हैं। अमेरिका का संघीय दूरसंचार आयोग इसके विरुद्ध निर्णय दे चुका है। अपने देश में ये बहस कुछ महीने पहले भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा इस विषय पर लोगों की राय मांगने के साथ खड़ी हुई। तब लाखों लोगों ने ट्राई को भेजे पत्र में नेट न्यूट्रेलिटी का पक्ष लिया। एनडीए सरकार ने भी इस सिद्धांत का समर्थन किया है, लेकिन अंतिम रुख घोषित करने से पहले वह ट्राई द्वारा बनाई गई समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही थी। अब जबकि यह रिपोर्ट गई है, सरकार से अपेक्षा रहेगी कि यथाशीघ्र वह अपनी राय बताए। बेशक उससे ऐसी नीति की आशा है, जिसमें उपभोक्ताओं के हितों का संपूर्ण संरक्षण हो। निर्विवाद रूप से नेट न्यूट्रेलिटी के सिद्धांत को बिना शर्त और अविभाज्य रूप से लागू करके ही ऐसा किया जा सकता है। 

Save The Girl Child

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06 July, 2015

भोले ओ भोले क्यू नहीं तू बोले

भोले ओ भोले
क्यू नहीं तू बोले
एक बार तो कम से कम
अपना आख खोले
धरती है तेरा बिस्तर
चादर है आकाश
चंदा सूरज दर पर तेरे
फैलाते प्रकाश
तू अबढ़र दानी हे स्वामी
तू घट-घट वासी अंतर्यामी
कुछ भी नहीं अदेय है तेरे
सारे दीन भरोसे तेरे
बड़े-२ तूने वरदान दिए
दुनिया को बहुत पैगाम दिए
लोभ मोह की करी विदाई
काम त्याग कर भस्म रमाई


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