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30 May, 2015

2015 Scripps Spelling Bee Crowns Two Winners...Again

स्पेलिंग बी प्रतियोगिता - लगातार आठवीं बार भारतीय-अमेरिकी बच्चों ने जीती 

भारतीय मूल के अमेरिकी बच्चों ने वार्षिस्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बीप्रतियोगिता में अपना वर्चस्व बरकरार रखते हुए लगातार आठवें साल यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता जीत ली। इस कॉम्पिटीशन में वन्या शिवशंकर और गोकुल वेंकटाचलम संयुक्त रूप से विजेता चुने गए हैं। यह लगातार दूसरी बार है, जब भारतीय-अमेरिकियों ने ऐसी साझा जीत हासिल की है। पिछले आठ साल से लगातार भारतीय मूल के बच्चे ये प्रतियोगिता जीतते आ रहे हैं। 2014 में भी इस प्रतियोगिता को दो भारतीय बच्चों श्रीराम हठवार और अन्सुन सुजॉय ने संयुक्त रूप से जीता था
14 वर्षीय गोकुल वेंकटचलम मिसूरी के सेंट लुई और 13 वर्षीय वन्या शिवशंकर कंसास की रहने वाली हैं। गोकुल और वन्या दोनों स्पेलिंग बी में पहले भी शामिल हो चुके हैं। वन्या 2010 और 2012 में इस प्रतियोगिता में 10वां स्थान हासिल किया था। उनकी बहन काव्या 2009 की विजेता थी। वन्या ने यह पुरस्कार अपनी दिवंगत दादी को समर्पित करते हुए कहा, ऐसा लगता है मानो एक सपना सच हो गया हो। वन्या को अभिनय के अलावा टुबा और पियानो बजाने का शौक है और उसने हाल ही में मिड अमेरिका म्यूजिक एसोसिएशन की ओर से दिया जाने वाला उत्कृष्ट पियानोवादक एवं जैज़ पियानोवादक का पुरस्कार जीता है। वहीं, गोकुल 2012 में 10वें और 2013 में 19 स्थान पर थे। गोकुल ने कहा कि वह इस प्रतियोगिता के लिए पिछले कई वर्ष से कड़ी मेहनत कर रहा है। उसका और स्पेलिंग का रिश्ता ठीक वैसा ही है, जैसा उसके आदर्श लीब्रोन जेम्स का बास्केटबॉल से है। बास्केटबॉल खेलने के अलावा गोकुल को संगीत पसंद है। जब वह संगीत नहीं सुन रहा होता तब उसे किताबें पढ़ना और अपनी पसंदीदा फिल्म एक्स मेन : डेज़ ऑफ फ्यूचर पास्टदेखना पसंद है। स्कूल में उसे गणित और अर्थशास्त्र विशेष तौर पर पसंद हैं। इस साल के विजेताओं को पुरस्कार के रूप में 35 हजार डॉलर यानी करीब 22 लाख रुपए की नकद राशि दी गई। अंतिम चरण के 49 प्रतिभागियों में से 25 भारतीय मूल के अमेरिकी थे। अंतिम 10 प्रतिभागियों में सात भारतीय-अमेरिकी थे।


पिछले कुछ वर्षों से भारतीय मूल के अमेरिकियों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के समक्ष इस प्रतियोगिता में कड़ी चुनौती पेश की है और अमेरिका में अयोजित होने वाली अधिकतर स्पेलिंग प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है।

18 May, 2015

तेरी दीवार से ऊची मेरी दीवार बने

बस यही दौड़ है इस दौर के इन्सानो की
तेरी दीवार से ऊची मेरी दीवार बने
तू रहे पीछे और मैं सदा आगे
ऐसी कोई बात या करामात बने
निंदा हो या हो आलोचना
करता तू है यही आराधना
की मैं न आगे निकलु तेरे से
इसके लिए ही करुगा साधना
गया जमाना मदद , सहयोग का
लगता है ये कुछ हठयोग सा
अगर न माना इनकी बात
तो करते है ये काम लठयोग का
कैसे होगा दूर ये सब
कौन कराएगा नैया पार
गर यही चलता रहा तो निल्को
फस जाएगे बीच मझधार
*****************

एम के पाण्डेय निल्को

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16 May, 2015

One year of Narendra Modi Government

 आज से करीब एक साल पहले देश में हुए आम चुनावों में यहां की आवाम ने ऐसा फैसला सुनाया जो वाकई चौंकाने वाला था। भारतीय जनता ने एक-जुट होकर सत्ता की बागडोर किसी एक पार्टी को या कहें कि एक इंसान को ही सौंप दी। वो शख्स कोई और नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे।
लोकसभा चुनावों में मोदी ने जिस तरह से 'अच्छे दिन' के सपने जनता के सामने संजोए उससे जनता को उन पर अटूट विश्वास सा जग गया। इसीलिए तो देश में 1984 के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब किसी एक पार्टी ने केंद्र में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। इन चुनावों में मोदी फैक्टर ने जमकर अपना असर दिखाया।
यूपीए सरकार के दौरान हुई गलतियों, घोटालों और सरकार के उठाए गए कदमों को मोदी ने जमकर भुनाया। मोदी ने तत्कालीन मनमोहन सरकार को 'घोटालों की सरकार' कह के संबोधित किया। इतना ही नहीं उन्होंने चुनावों में 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा दे दिया।
चाहे आम चुनावों के दौरान की बात हो या फिर सत्ता संभालने के बाद की स्थिति हो। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातों से लोगों के दिलों पर राज जरूर किया। उन्होंने लगभग सभी मुद्दों पर अपने बयानों से जनता के बीच जगह बनाई। जनता ने उनमें अपने नायक की छवि देखी।
शायद यही वजह थी कि लोकसभा चुनावों में उन्हें पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का मौका दिया। लेकिन जिस अंदाज में पीएम मोदी ने जनता के बीच अपनी बातें रखी सत्ता में आने के बाद ये सरकार उससे उलट काम करती दिखाई दी। शायद यही वजह थी कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन महज एक साल लोगों की धारणा बदलने लगी। आज परिस्थितियां बिल्कुल बदल चुकी हैं।
एक साल के भीतर आखिर ऐसा क्या हो गया कि जिस शख्स को देश की जनता ने भारी-भरकम बहुमत से सत्ता दी। उससे भरोसा उठने सा लगा है। इसके पीछे वजह और कोई नहीं खुद प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की कार्यशैली है।
जिन मुद्दों की वजह से पीएम मोदी सत्ता में आए अब वो उन्हीं मुद्दों से पीछे हटने लगे। एक के बाद एक यू-टर्न से जनता में उनकी छवि को गहरा धक्का लगा। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कटाक्ष से सामने आता है। जिसमें उन्होंने इस सरकार को सूट-बूट की सरकार कह कर संबोधित करना शुरू किया है।
राहुल गांधी ने ना केवल मोदी सरकार को इस जुमले से घेरने की कोशिश की है। बल्कि उस सच्चाई को भी बताया है जिसे जनता भी समझने लगी है।
ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को ये समझने की जरूरत है कि जिस जनता ने उन्हें चुना है अगर जल्दी ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हालात बिगड़ भी सकते हैं। जनता का मोहभंग होने में समय नहीं लगता। इसलिए जरूरी यही है कि अब प्रधानमंत्री मोदी बातों और वादों की जगह कुछ ऐसा करें कि जनता को उन पर फिर से विश्वास कायम हो जाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश की सत्ता संभाली तो उन्होंने किसानों के लेकर कई ऐलान किए। लेकिन उन दावों की पोल एक साल में ही खुल गई। इस दौरान में देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों ने आत्महत्याएं की। एक अनुमान के मुताबिक देश में हर आधे घंटे में एक किसान आत्महत्या करता है। साल 2014 में भी आत्महत्या की दर में तेजी आई है।

इन सबके बीच केंद्रीय खुफिया विभाग ने हाल ही किसानों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। जिसमें कहा गया था कि किसानों की आत्महत्या की वजह प्राकृतिक भी है और कृत्रिम भी। इसमें बारिश, ओलावृष्टि, सिंचाई की दिक्कतें, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक वजहें शामिल हैं। हालांकि इस रिपोर्ट में कहीं भी इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि आखिर किसानों की समस्या पर अंकुश कैसे और कब लगेगा? इन सबके बीच अब ये मोदी सरकार को सोचना है कि आखिर कैसे वो देश के 'अन्नदाता' को बचाते हैं? आखिर वादों की जो फेहरिस्त चुनाव में नजर आई थी उसकी बानगी देखना बाकी है।



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10 May, 2015

वाह रे जमाने तेरी हद हो गई

वाह रे जमाने तेरी हद हो गई,
बीवी के आगे माँ रद्द हो गई !
बड़ी मेहनत से जिसने पाला,
आज वो मोहताज हो गई !
और कल की छोकरी,
तेरी सरताज हो गई !
बीवी हमदर्द और माँ सरदर्द हो गई
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!

पेट पर सुलाने वाली,
पैरों में सो रही !
बीवी के लिए लिम्का,
माँ पानी को रो रही !
सुनता नहीं कोई, वो आवाज देते सो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई.!!

माँ मॉजती बर्तन,
वो सजती संवरती है !
अभी निपटी ना बुढ़िया तू ,
उस पर बरसती है !
अरे दुनिया को आई मौत,
तेरी कहाँ गुम हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!

अरे जिसकी कोख में पला,
अब उसकी छाया बुरी लगती,
बैठ होण्डा पे महबूबा,
कन्धे पर हाथ जो रखती,
वो यादें अतीत की,
वो मोहब्बतें माँ की, सब रद्द हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!

बेबस हुई माँ अब,
दिए टुकड़ो पर पलती है,
अतीत को याद कर,
तेरा प्यार पाने को मचलती है !
अरे मुसीबत जिसने उठाई, वो खुद मुसीबत
हो गई !
वाह रे जमाने तेरी हद हो गई .!!
I love so much my mother...

मां तो जन्नत का फूल है,
प्यार करना उसका उसूल है ,
दुनिया की मोह्ब्बत फिजूल है ,
मां की हर दुआ कबूल है ,
मां को नाराज करना इंसान तेरी भूल है ,
मां के कदमो की मिट्टी जन्नत की धूल है ,
अगर अपनी मां से है प्यार तो
अपने दोस्तों को शेयर करे, कमेंट करे, लाइक करे वरना ,
ये मेसेज आपके लिये फिजूल है

(किसी मित्र के मेसेज से प्राप्त)

सादर
एम के पाण्डेय निल्को

02 May, 2015

‘सुर-तरंग’ संगीत प्रतियोगिता संपन्न

राजस्थान की प्रतिभाओ को एक मंच प्रदान करने वाली राज्य स्तरीय संगीत प्रतियोगिता ‘सुर-तरंग’ आज जयपुर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ | इस दौरान बड़ी संख्या में प्रतिभागियों हिस्सा ने लिया और संगीत विधा में प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा | बच्चों में साहित्य, संगीत और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित रविन्द कला मंच और संगम कला ग्रुप कि ओर से आयोजित यह कार्यक्रम द रूट्स पब्लिक स्कूल शिव कॉलोनी लक्ष्मी नगर जयपुर में संपन्न हुआ | कार्यक्रम की शुरुआत अवंतिका ग्रुप के राष्टीय अध्यक्ष श्री आनंद अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया उनके साथ श्रीमती मधु सूद , श्री आर सी सूद मौजूद रहे | जज के रूप में श्री शिवाजी शिव, श्री सुनील जयपुरी, श्रीमती उषा जोया और श्री सुदेश शर्मा जी नज़र आये |
गायन के सब जूनियर वर्ग (फ़िल्मी) में अनन्या गौतम, वस्सु और नमन क्रमशः प्रथम, द्दितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया वही गैर फ़िल्मी में क्रिशन बालूदा और मोनिका को क्रमशः प्रथम और द्दितीय स्थान मिला | जूनियर वर्ग (फ़िल्मी) में नंदिनी,साना, और मोहक विजयी हुए तथा गैर फ़िल्मी में आर्यन ने अपना लोहा मनवाया | सीनियर वर्ग (फ़िल्मी) में राहुल भालिया , सुनील शर्मा विक्रम सैन ने क्रमशः प्रथम, द्दितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया वही सीनियर वर्ग (गैर फ़िल्मी) में मोसिन खान और बादल पारिक ने अपने गीतों से जजों को खुश किया | विजेताओं के साथ-साथ सैकड़ों अन्य छात्र-छात्राओं और गणमान्य नागरिकों ने भी सुगम संगीत का आनंद लिया | विजेताओ को श्री डी वी नेहरा मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित भी किया गया |
प्रतियोगिता के मुख्य आयोजक श्री अलोक सूद ने बताया कि विजयी टीम को राष्टीय स्तर पर दिल्ली में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया जायेगा | संस्था के राजस्थान अध्यक्ष श्री आर सी सूद ने कहा की इसी मंच से सोनू निगम, श्रेया धोसले, सुनिधि चौहान, आनंद राज, पीनाज़, जैसे कई हीरे तरासे गए है | इस अवसर पर एम के पाण्डेय निल्को, अरविन्द सिंह, अशोक गुप्ता, प्रमोद शर्मा, पूजा राठी, मधुकर तिवारी, सुधीर, सुखविंदर, मनन सूद, स्वाति अग्रवाल आदि भी मौजूद रहे | अंत में कार्यक्रम संचालक श्री जय सूद ने सामारोह में उपस्थिति सभी लोगो के लिए का आभार व्यक्त किया |

प्राचार्य सेवाभावी शिक्षाकर्मी सम्मानित

 जयपुर|अवंतिका संस्था,नई दिल्ली द्वारा शुक्रवार को समाज के विशिष्ट गुणीजनों को रवींद्र कला केंद्र सभागार में सम्मानित किया गया। संस्था के राष्ट्रीय निदेशक आनंद अग्रवाल ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े निम्न प्राचार्यों सेवाभावी शिक्षा कर्मियों में सुमन वार्ष्णेय, मधु सूद, उषा जोया, सुखविंदर कौर, अरविंदर सिंह टक्कर, वीरेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. स्नेहलता भटनागर, किरण पाल, स्नेहलता शर्मा, आलोक सूद, प्रद्युम्न कुमार शर्मा रेखा कोटवानी को 'स्वामी विवेकानंद अवार्ड' प्रदान किया गया








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