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30 April, 2015

गीत ग़ज़ल हो या हो कविता - एम के पाण्डेय निल्को



गीत ग़ज़ल हो या हो कविता 

नज़र है उस पर चोरो की 

सेंध लगाये बैठे तैयार 

कॉपी पेस्ट को मन बेक़रार 

लिखे कोई और, पढ़े कोई और 

नाम किसी और का चलता है 

कुछ इस तरह इन चोरो का 

ताना बना भी चलता रहता है 

सोच सोच कर लिखे गजल जो

प्रसंशा वो नहीं पाता है 

पर चुराए हुए रचना पर 

वाह वाही खूब कमाता है 

मन हो जाता उदास निल्को 

किसी और का गुल खिलाये जाते है 

वो खुश होता किन्तु 

मन से पछताए जाये है 

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एम के पाण्डेय निल्को 







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