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30 April, 2015

गीत ग़ज़ल हो या हो कविता - एम के पाण्डेय निल्को



गीत ग़ज़ल हो या हो कविता 

नज़र है उस पर चोरो की 

सेंध लगाये बैठे तैयार 

कॉपी पेस्ट को मन बेक़रार 

लिखे कोई और, पढ़े कोई और 

नाम किसी और का चलता है 

कुछ इस तरह इन चोरो का 

ताना बना भी चलता रहता है 

सोच सोच कर लिखे गजल जो

प्रसंशा वो नहीं पाता है 

पर चुराए हुए रचना पर 

वाह वाही खूब कमाता है 

मन हो जाता उदास निल्को 

किसी और का गुल खिलाये जाते है 

वो खुश होता किन्तु 

मन से पछताए जाये है 

***************
एम के पाण्डेय निल्को 







28 April, 2015

तेरी याद मुझे क्यों सताती है

तेरी याद मुझे क्यों सताती है
तन्हाई में क्यों रुलाती है
जब जब मिलते है हम
पता नहीं क्या आखो से वो पिलाती है
उसका नशा जैसे बोतल शराब की
लगती है वो हरदम बवाल सी
चाल है  उसकी जैसे मतवाली
कहती है बना लो घरवाली
जब बाज़ार में निकले वो शाम
लगती है भीड़ जैसे हो आम
दुपट्टे का कोना मुंह में दबाये
जैसे हो वो बनारसी पान
तेरा बनना और सवरना
जैसे समुन्द्र में हो तैरना
तेरी आखो में देखकर मुझे
मिलता सकूँ जैसे देख झरना
जब अपने मीठे होठो से
कहती है मेरे हो तुम ‘अनुज’
बस यह सुन कर मैं
भूल जाता की मैं हूँ मनु
झील सी नयन में उसके
तैरने का मन करता है
पर कही डूब न जाऊ
दिल इस बात से डरता है
लाख प्रसंशा उसकी लिखू पर
पानी फेर देती है वो
जब शाम को मिलने को
कहती है की बिजी है वो
मेरे बारे में चाहे वो कुछ सोचे
या तुम से कुछ भी न बोले
हर बार मैं यही समझाऊ की
तेरे आगे कोई न डोले
***********
अनुज शुक्ला



12 April, 2015

ज़िन्दगी है एक पहेली - एम के पाण्डेय निल्को



गांव में छोड़ आये वो बड़ी सी हवेली

शहरो में ढूंढते है वो एक सहेली

आराम या हराम से जिए जा रहे है

पर कौन समझाए की ज़िन्दगी है एक पहेली



छप रहे थे वो बन कर ख़बरे

कुछ लोग खड़े द्वार बन पहरे

उनका बनना और बिगड़ना मंज़ूर तो था की

क्योकि हम इस रफ़्तार में भी ठहरे



बढ़ चले वो प्रगति के पथ पर

अर्थ नहीं समझे वो इस अर्थ पर

जीतनी रफ़्तार से वो निखर रहे थे

आज देख रहा हूँ उन्हें इस फर्श पर



लोग बाज़ार में आकर बिक भी गए

हमारी कीमत भी वो लगा कर भी गए

पर आज बस इतना कहेगा ये निल्को

की वो तो लोगो के पान की पिक से भी गए
-
एम के पाण्डेय निल्को

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09 April, 2015

आज कल के समाचार का हाल



आज कल के समाचार का हाल
दिन प्रतिदिन हो रहा बेहाल
टीवी एंकर को भी कहते पत्रकार
जो असल में है एक कलाकार
ख़बरों का करते ये बलात्कार
जनता सहती इनके अत्याचार
सही बताऊ तो नहीं रहा
चैनल और अख़बार
क्योकि कर रहे है ये सब
बहुत ही गन्दा व्यपार......!
-
एम के पाण्डेय निल्को

05 April, 2015

रविवारीय ज्ञान द्वारा एम के पाण्डेय निल्को

आज रविवार है आलस्य से भरा यह दिन मेरे लिए बातों की खिचड़ी पकाता है,  रविवार का दिन मेरे लिए शेयर मार्केट जैसा होता है कुछ भी निश्चित नहीं , कुछ भी कभी भी हो सकता है । जैसे अभी अभी ये विचार मन मे आया की..............................................



04 April, 2015

हनुमान जयंती - आज भी जीवित हैं हनुमान

कहते है पवनपुत्र हनुमान जैसा कोई नहीं, भक्त तो कई है लेकिन जो बात रूद्र अवतार हनुमान जी में हैं वो किसी में नहीं। भगवान शिव के आठ रूद्रावतारों में एक हैं हनुमान जी। भगवान राम त्रेतायुग में धर्म की स्थापना करके पृथ्वी से अपने लोक बैकुण्ठ चले गये लेकिन धर्म की रक्षा के लिए हनुमान को अमरता का वरदान दिया। इस वरदान के कारण हनुमान जी आज भी जीवित हैं और भगवान के भक्तों और धर्म की रक्षा में लगे हुए हैं। 
हनुमानजी बुद्धि और बल के दाता हैं। उत्तरकांड में भगवान राम ने हनुमानजी को प्रज्ञा, धीर, वीर, राजनीति में निपुण आदि विशेषणों से संबोधित किया है। हनुमानजी बल और बुद्धि से संपन्न हैं। हनुमान को मनोकामना पूर्ण करने वाला देवता माना जाता है, इसलिए मन्नत मानने वाले अनेक स्त्री-पुरुष हनुमान की मूर्ति की श्रद्धापूर्वक निर्धारित प्रदक्षिणा करते हैं। शास्त्रों का ऐसा मत है कि जहां भी राम कथा होती है वहां हनुमान जी अवश्य होते हैं। इसलिए हनुमान की कृपा पाने के लिए श्री राम की भक्ति जरूरी है। जो राम के भक्त हैं हनुमान उनकी सदैव रक्षा करते हैं।

एम के पाण्डेय निल्को

 
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