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30 March, 2015

आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान दिखाता हूँ

आँखों के दरमियान मैं
गुलिस्तां दिखाता हुँ,
आना कभी मेरे देश मैं आपको राजस्थान
दिखाता हुँ|
खेजड़ी के साखो पर लटके फूलो की कीमत
बताता हुँ,
मै साम्भर की झील से देखना कैसे नमक
उठाता हुँ|
मै शेखावाटी के रंगो से
पनपी चित्रकला दिखाता हुँ,
महाराणा प्रताप के शौर्य
की गाथा सुनाता हुँ|
पद्मावती और हाड़ी रानी का जोहर
बताता हुँ,
पग गुँघरु बाँध मीरा का मनोहर
दिखाता हुँ|
सोने सी माटी मे पानी का अरमान
बताता हुँ,
आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान
दिखाता हुँ|
हिरन की पुतली मे चाँद के दर्शन कराता हुँ,
चंदरबरदाई के
शब्दों की व्याख्या सुनाता हुँ|
मीठी बोली, मीठे पानी मे जोधपुर की सैर
करता हुँ,
कोटा, बूंदी, बीकानेर और हाड़ोती की मै
मल्हार गाता हुँ|
पुष्कर तीरथ कर के मै चिश्ती को चाद्दर
चढ़ाता हुँ,
जयपुर के हवामहल मै, गीत मोहबत के गाता हुँ|
जीते सी इस धरती पर स्वर्ग का मैं वरदान
दिखाता हुँ,
आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान
दिखाता हुँ||
कोठिया दिखाता हुँ, राज
हवेली दिखाता हुँ,
नज़्ज़रे ठहर न जाए कही मै आपको कुम्भलगढ़
दिखाता हुँ|
घूंघट में जीती मर्यादा और गंगानगर
का मतलब समझाता हुँ,
तनोट माता के मंदिर से मै विश्व
शांति की बात सुनाता हुँ|
राजिया के दोहो से लेके, जाम्भोजी के
उसूल पढ़ाता हुँ,
होठो पे मुस्कान लिए, मुछो पे ताव देते
राजपूत की परिभाषा बताता हुँ|
सिक्खो की बस्ती मे, पूजा के बाद अज़ान
सुनाता हुँ,
आना कभी मेरे देश मै आपको राजस्थान
दिखाता हुँ|| 
जय जय राजस्थान

राजस्थान दिवस की आप  सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

29 March, 2015

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे




नवरात्रि के पवन पर्व पर

कन्याए जिमाई जाती है

ढुढ़ते है घर घर उनको

फिर पूजन करी जाती है

कन्या हत्या सर्वाधिक भारत मे

फिर भी देवी का रूप माना जाता है

विरोधाभास लगती है रीति रिवाज भी

आखिर इनका बचपन काटा क्यो जाता है

****************
एम के पाण्डेय ‘निल्को’

27 March, 2015

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न”

भारतीय राजनीति के पितामाह, करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता एवं सुशासन के प्रतिक पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को “भारत रत्न” से सम्मानित करने पर हार्दिक बधाई |
मैं ईश्वर से अटल जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की प्रार्थना करता हूँ |
 आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद .........!

राम नवमी की सभी दोस्त पाठकों को अनेक शुभकामनायें!

त्रिस्थिरस्त्रिप्रलम्बश्च  त्रिसमस्त्रिपु चोन्नतः 
त्रिताम्रस्त्रिपु च स्निग्धो गंभीरस्त्रिषु नित्यशः 
त्रिवली मांस्त्रयंवतः ......................सुन्दरकाण्ड ३५/१७-१८
आप सभी को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाये.

मनन है अभी छोटा बच्चा - एम के पाण्डेय निल्को


तस्वीर में दिख रहे ये दो चेहरे अपनी कला से जाने जाते है। मनन सूद अपने दिमागी कौशल से लोहा मनवा रहे है तो वही इनके दादा जी श्री आर सी सूद जी जुडो कराटे में राजस्थान के साथ पूरे भारत में अपना लोहा मनवा चुके है। फिर हाल तो आप मनन सूद पर एक रचना पढ़िए और इनके दिमागी कौशल को देखने के लिए #Youtube पर इनको सर्च करे।

मनन है अभी छोटा बच्चा
पर दिमाग से नहीं वो कच्चा
मन से वो बहुत ही सच्चा
और हम सबको लगता है वो अच्छा
कई चीजो की है उसको जानकारी
प्राइवेट हो या हो सरकारी
बात करा लो चाहे क्रिकेट की
या हो राजनीति सीक्रेट की
पल भर में देकर जवाब
कर देता सवाल को हलाल
इतिहास पूछो या पूछो भूगोल
कैसे है ये दुनिया गोल
पलक झपकते जवाब हाज़िर है उनका
बोलती बंद किया है वो सबका
वन्डर बॉय कहलाता है वो
कई चीज मुझे भी सिखलाता है वो
दादा जी से सीखता वो कराटे
और अंग्रेजी बोलता है वो फर्राटे
देश दुनिया की बड़ी और छोटी
पतली हो या बात हो मोटी
ध्यान लगाकर सुनता उनको
फिर दिमाग में बुनता उनको
इस निल्को में और मनन में
दो ही चीज गजब की है
एक तो उसका भोलापन है
और एक मेरा ये कवितापन
बहुमुखी प्रतिभा का धनी वो परिवार
करता है वो सबका सत्कार
पर सोचने पर मजबूर करते है मुझको
की है वो आख़िर किसके अवतार....?

एम के पाण्डेय निल्को



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23 March, 2015

23 मार्च 1931 बलिदान दिवस

भारत की शान बढ़ाई है,
देकर अपनी कुर्बानी को।
है नाम उसी का भगत सिंह,
उसकी है नमन जवानी को।।

वो है महान माता जिसने,
ऐसे सपूत को जन्म दिया।
हम याद रखेंगे सदियों तक,
जिसने गोरों को तंग किया।।

मेरा रंग दे बसन्ती चोला,
जब किया तो गाके उमंग किया।
सच्चा जाबाज़ था भारत का,
जिसने आजीवन जंग किया।।

आज़ाद कराना है भारत,
ये बात कभी न वो भूला।
इक भगत मरा सौ आयेंगे,
ये कहकर ही फाँसी झूला।।

23 मार्च 1931 बलिदान दिवस पर भगत सिंह,सुखदेव व राजगुरु को कोटि कोटि प्रणाम।शत शत नमन....!!

11 March, 2015

सोच रहा हूँ कोई कविता गाऊँ - एम के पाण्डेय ‘निल्को’


समय पर जब यह समय मिला 
उनके लिए ही यह गीत बुना
मुलाकात जब उनसे हुई 
मानो बंजारे को घर मिला

देखा उनको जब आज के दिन
अच्छा नहीं लग रहा अब उनके बिन
मुलाकात का क्या हाल बताऊ
सोच रहा हूँ कोई कविता गाऊँ

तुम्हारे पास हूँ लेकिन
जो दूरी मैं समझता हूँ
तुम्हारे बिन यह रिश्ता
अधूरा है समझता हूँ

तुम्हे मैं भूल जाउगा
यह मुमकिन है नहीं लेकिन 
पर तुम्ही को भूलना सबसे 
जरुरी है समझता हूँ

अच्छा लगा मिल कर उनसे
बातें हुई पर न खुल कर उनसे
दिन का एक पहर कुछ ऐसे निकला
जैसे निल्को का कोई अपना निकला

सोच रहा हूँ की लिखूँ उनपर
लेकिन शुरुआत करू मैं कहा से
शब्दों के युद्ध हो रहे दिमाग में
काफी कुछ लिखा है उनके चेहरे के किताब में

निल्को ने जब देखा अपनी नज़र से
सब कुछ भूल गया उनकी असर से
क्षणिक मिलाप पर क्या कहूँ
कैसे इस पर कोई गीत लिखू

*********************
एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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