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18 December, 2014

अपना परिचय ठीक से नहीं करा पाता

एम के पाण्डेय 'निल्को'  
कुछ मेरे मित्र मेरे परिचय के बारे में ज्रिक कर रहे थे , उनकी शिकायत थी की कभी मैंने अपना परिचय ठीक से नहीं दिया | बताना चाहूगा की यह मेरी कमजोरी है की मैं अपना परिचय ठीक से नहीं करा पाता कई बार कोशिश की किन्तु सफल पूरी तरह से न हो सका , एक बार पुनः संक्षिप्त में कोशिश कर रहा हूँ ज़रा आप की बताइए कहा तक यह कोशिश सफल हुई | लेकिन इस बात का अफ़सोस है की कुछ लोग - 


हज़ारों ऐब ढूँढ़ते है वो निल्को में इस तरह,
अपने किरदारों में वो फरिश्तें हो जैसे …..!


और मैं हर बार यही कहता हूँ की -

जैसा भी हूँ अच्छा या बुरा अपने लिए हूँ 
मैं ख़ुद को नहीं देखता औरो की नज़र से ....!
वैसे 
ख़ामोशी भी  बहुत कुछ कहती है
कान लगाकर नहीं ,
दिल लगाकर सुनो ....

मै कोई बहुत बड़ा लेखक या कवि नहीं , बस यूं ही अपने मन के भावों को अपनी कलम के जरिये कागज़ पर उतार लेता हूँ जो कहीं कविताओं के रूप मे, कहीं लेखो के रूप मे अपनी जगह बना लेते है । मैं इस विश्व के जीवन मंच पर अदना सा किरदार हूँ जो अपनी भूमिका न्यायपूर्वक और मन लगाकर निभाने का प्रयत्न कर रहा है। पढ़ाई लिखाई के हिसाब से बुद्धू डिब्बा (कम्प्युटर) से स्नातक हूँ और प्रबंधन से परास्नातक। कई मासिक पत्रिका और वैबसाइट पर स्वतंत्र लेखन में कविता, टिप्पणी, आलोचना आदि में विशेष रुचि है उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िला के हरखौली गाँव मे जन्म और राजस्थान मे पढ़ाई की और आगे गांवो के लिए कुछ सरकारी - गैर सरकारी , सामाजिक परियोजनाओ का संचालन करने का इरादा । अपनी रचनाओ के माध्यम से गांवो/लोगो में जागरुकता लाना चाहता हूं ऒर समाज के लोगों का ध्यान उनकी समस्याओं की ऒर खीचना चाहता हूं। ताकि उनको भी स्वतंत्र पहचान एवं उडान भरने के लिए खुला आसमान मिल सके। बस यही मेरे जीवन का लक्ष्य है । बस इतनी सी बातें है मेरे बारे में।

सादर 

एम के पाण्डेय 'निल्को' 


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