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27 November, 2014

क्रंदन ............Tripurendra Ojha NISHAAN


आ कर देख ले मुझपे सितम करने वाले ,
तेरे बिना दिन भी कट गया रात भी गुजर गई
इस खुशफहमी में कि तू मिलेगा मुझे
इन्तेजार करते करते एक  मुद्दत गुजर गई ,
अरे बेमुरव्वत जब तुझे कोई और मिला ,
तुझे लगा तेरी जिन्दगी संवर गई ?
मत रहना इस गफलत में अरे बेगैरत,
क्यों कि करेगा जब रुसवा तुझे
फिर न कहना मेरी जिन्दगी बिखर गई ,
किसी के अरमां कुचल के सपनो का ताजमहल बनाने वाले ,
तुझे न पता एक टूटे दिल कि आह से दुनिया सिहर गई ,
तुझमे औ मुझमे बड़ी समानता थी न ?
सो मेरी तरह तू भी खायेगा धोखा उसी से
जिस पर तू दिल ओ जान से मर गई .....:(
                                                               

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Tripurendra Ojha NISHAAN

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