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12 November, 2014

शायद किसी की नज़र लग गई...

कुछ दिनों से परेशान हूँ
एक बात से हैरान हूँ
जिस तरह से रहते थे हम एक साथ
आज क्यों इतने दुराव हूँ
कल जब उनके चेहरे को देखा था
तभी से सोच कर हैरान हूँ
शायद किसी की नज़र लग गई
या सब बेगाने हो गए
किसी अनहोनी की डर से
आज मैं बहुत परेशान हूँ
सोचता हूँ की डांटू उनको
जोरदार से मारू उनको
पर उनके भोलेपन से
सोचता हूँ माफ करू उनको
तुमसे नाराज नहीं है निल्को
तुम्हारे दुखो से ही परेशान हूँ
शायद एक सुबह होगी
जो नई बात से शुरू होगी
ग़लतफ़हमी होगी दूर सबकी
मिलेगे किसी ठिकाने पर एक साथ
ऐसी मेरी सोच होगी

एम के पाण्डेय निल्को

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