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23 May, 2014

भाइयो तुम्हारी याद आती है

दुनिया की हर ख़ुशी मेरे पास बहुत हैं.
आज फिर भी मेरा दिल उदास बहुत हैं.
कुछ भी कर लु अकेलापन जाता नहीं
जबकि मेरे आसपास मेरे खास बहुत हैं




भाइयो तुम्हारी याद आती है
हर पल याद सताती है
जो बिताये कुछ दिन मई के महीने में
बस वही बात याद आती है
भाइयो तुम्हारी याद..........

3 मई से मिलना शुरु किया
१५ मई से बिछड़ना शुरू किया
इस बीच क्या – क्या बात हुई
यही बात सताती है
 भाइयो तुम्हारी याद..........

ऑफिस का केबिन हो
या कोचिंग की क्लास
घर का कमरा हो
या बाहर का बागवान
हर जगह तुम्हारी याद सताती है
भाइयो तुम्हारी याद..........

वो आम के बगीचे की
वो खेत और खलिहान की
दोपहर में छत की
हर बात सताती है
भाइयो तुम्हारी याद..........

निल्को की कलम भी कह रही
आँखे भी परिभाषा गढ़ रही
कब मुलाकात वापिस होगी
यही बात सताती है
भाइयो तुम्हारी याद..........
  
मधुलेश पाण्डेय ‘निल्को’











तेरी यादों के सल्तनत पे कोई जोर नहीं मेरा
गुजरे लम्हों के हर तह में इतिहास बहुत हैं


तेरी यादों के सल्तनत पे कोई जोर नहीं मेरा
गुजरे लम्हों के हर तह में इतिहास बहुत हैं.

बहुत आसाँ है रो देना, बहुत मुश्किल हँसाना है
कोई बिन बात हँस दे-लोग कहते हैं "दिवाना है"

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