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14 January, 2014

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें

 आज मकर संक्रांति है। हवा में घुली है पतंगों की शोखी। क्या बच्चे और क्या जवान, सभी छतों पर हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर मे आज का दिन पतंगो के नाम रहा। सुबह से ही गुलाबी नगर के आसमान में सतरंगी पतंगो का जाल बुन गया। युवक युवतियां और महिलाएं पतंगबाजी में बड़े उल्लास के साथ शामिल हुईं। इस अवसर पर कई विदेशी सैलानी भी पतंग महोत्सव में शरीक होकर पतंग उड़ाकर इस पर्व का लुत्फ उठाया। जयपुर में मकर संक्राति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।  संभवतः इस परंपरा की शुरूआत भगवान श्री राम के समय में हुई थी। तुलसी दास जी ने राम चरित मानस में भगवान श्री राम के बाल्यकाल का वर्णन करते हुए कहा गया है कि भगवान श्री राम ने भी पतंग उड़ायी थी।

राम इक दिन चंग उड़ाई।
इंद्रलोक में पहुंची जाई।।
तमिल की तन्दनानरामायण में भी इस घटना का जिक्र किया गया है। इस रामायण के अनुसार मकर संक्रांति ही वह पावन दिन था जब भगवान श्री राम और हनुमान जी की मित्रता हुई। मकर संक्राति के दिन राम ने जब पतंग उड़ायी तो पतंग इन्द्रलोक में पहुंच गयी।

पंतंग को देखकर इन्द्र के पुत्र जयंती की पत्नी सोचने लगी कि, जिसकी पतंग इतनी सुन्दर है वह स्वयं कितना सुंदर होगा। भगवान राम को देखने की इच्छा के कारण जयंती की पत्नी ने पतंग की डोर तोड़कर पतंग अपने पास रख ली।

भगवान राम ने हनुमान जी से पतंग ढूंढकर लाने के लिए कहा। हनुमान जी इंद्रलोक पहुंच गये। जयंत की पत्नी ने कहा कि जब तक वह राम को देखेगी नहीं पतंग वपस नहीं देगी। हनुमान जी संदेश लेकर राम के पास पहुंच गये। भगवान राम ने कहा कि वनवास के दौरान जयंत की पत्नी को वह दर्शन देंगे। हनुमान जी राम का संदेश लेकर जयंत की पत्नी के पास पहुंचे। राम का आश्वासन पाकर जयंत की पत्नी ने पतंग वापस कर दी।

तिन सब सुनत तुरंत ही, दीन्ही दोड़ पतंग।
खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।।
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