Blockquote

Followers

30 January, 2014

"STAR SCHEME" NSDC (Under Ministry of finance, Govt of India)

 We govt. project run by national skill development and corporation(NSDC). This scheme name is "STAR SCHEME".N.S.D.C. (Under Ministry of finance, Govt of India) launches STAR Scheme for the youths.Benefits of scheme Central Govt approved certificate Scholarship of Rs 10,000*(Govt of India)
For more information about star scheme visit http://www.nscsindia.org/

Anyone interested to these govt. Scheme can contact to Mr. M.K.Pandey +91-9024589902 (Only for Jaipur City)

About STAR

The objective of this Scheme is to encourage skill development for youth by providing monetary rewards for successful completion of approved training programs. Specifically, the Scheme aims to:

encourage standardization in the certification process and initiate a process of creating a registry of skills; and

increase productivity of the existing workforce and align the training and certification to the needs of the country.

provide Monetary Awards for Skill Certification to boost employability and productivity of youth by incentivizing

them for skill trainings

reward candidates undergoing skill training by authorized institutions at an average monetary reward of

₹ 10,000 (Rupees Ten Thousand) per candidate.

benefit 10 lakh youth at an approximate total cost of ₹ 1,000 Crores
NSDC STAR SCHEME (Govt. Of India Ministry Of Finance). website - www.nsdcindia.org.


STAR Overview

  • 1000 Crore Pan India scheme launched by the MoF
  • Brand as STAR “Standard Training Assessment and Reward”
  • To benefit 1 million people Scheme to be implemented by NSDC
  • 03-04 Hrs x 30 Days training for Automotive Trade.
  • Assessment through written exam by Third party assessor
  • Assessment & Training content fee to be paid by Trainees for admission.
  • Certified trainees will get a Certificate + Reward 


28 January, 2014

देश की पुकार ........नरेंद्र मोदी




देश की पुकार सुनो ,
जनता की आवाज़ सुनो ,
इधर – उधर , जहां तहाँ
मोदी की ही बात सुनो


लोक सभा चुनाव आने लगे
नेता भी अपनी – अपनी गाने लगे
रोज नए शिलान्यास करने लगे
नए सपने सजाने लगे और
लाल बत्ती की याद करने लगे

पर अभी एक लहर सी है
दूसरों के लिए जहर सी है
देश की पुकार साफ सुनाई दे रही
मोदी की एक विकल्प सही

नज़रे बोले दिल भी बोले
मोदी की ही बात सुने
अब तो निल्को की कलम भी
मोदी की तारीफ लिखे ......!


  मधुलेश पाण्डेय  निल्को  


आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद .........!

14 January, 2014

मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनायें

 आज मकर संक्रांति है। हवा में घुली है पतंगों की शोखी। क्या बच्चे और क्या जवान, सभी छतों पर हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर मे आज का दिन पतंगो के नाम रहा। सुबह से ही गुलाबी नगर के आसमान में सतरंगी पतंगो का जाल बुन गया। युवक युवतियां और महिलाएं पतंगबाजी में बड़े उल्लास के साथ शामिल हुईं। इस अवसर पर कई विदेशी सैलानी भी पतंग महोत्सव में शरीक होकर पतंग उड़ाकर इस पर्व का लुत्फ उठाया। जयपुर में मकर संक्राति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।  संभवतः इस परंपरा की शुरूआत भगवान श्री राम के समय में हुई थी। तुलसी दास जी ने राम चरित मानस में भगवान श्री राम के बाल्यकाल का वर्णन करते हुए कहा गया है कि भगवान श्री राम ने भी पतंग उड़ायी थी।

राम इक दिन चंग उड़ाई।
इंद्रलोक में पहुंची जाई।।
तमिल की तन्दनानरामायण में भी इस घटना का जिक्र किया गया है। इस रामायण के अनुसार मकर संक्रांति ही वह पावन दिन था जब भगवान श्री राम और हनुमान जी की मित्रता हुई। मकर संक्राति के दिन राम ने जब पतंग उड़ायी तो पतंग इन्द्रलोक में पहुंच गयी।

पंतंग को देखकर इन्द्र के पुत्र जयंती की पत्नी सोचने लगी कि, जिसकी पतंग इतनी सुन्दर है वह स्वयं कितना सुंदर होगा। भगवान राम को देखने की इच्छा के कारण जयंती की पत्नी ने पतंग की डोर तोड़कर पतंग अपने पास रख ली।

भगवान राम ने हनुमान जी से पतंग ढूंढकर लाने के लिए कहा। हनुमान जी इंद्रलोक पहुंच गये। जयंत की पत्नी ने कहा कि जब तक वह राम को देखेगी नहीं पतंग वपस नहीं देगी। हनुमान जी संदेश लेकर राम के पास पहुंच गये। भगवान राम ने कहा कि वनवास के दौरान जयंत की पत्नी को वह दर्शन देंगे। हनुमान जी राम का संदेश लेकर जयंत की पत्नी के पास पहुंचे। राम का आश्वासन पाकर जयंत की पत्नी ने पतंग वापस कर दी।

तिन सब सुनत तुरंत ही, दीन्ही दोड़ पतंग।
खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।।

12 January, 2014

मेरी नई हेयर स्टाइल , जिस पर सबका है ध्यान


एम के पाण्डेय निल्को
मेरे बाल अलग करने के चक्कर मे
बना दिया बेमिशाल,
सब पुछने लगे कैसे हुआ यह हाल ....?
तो सुनो दोस्तो -
यह जो मेरे बाल है
ध्यान दीजिएगा
यह मेरे बाल है पड़ोसी के नही
जो इतना घूर कर देख रहे हो
नाज़ है मुझे इस पर
इतराता हूँ  मैं इस पर
पर कभी कभी लगता है
बाल नही किसी चिड़िया का
घोसला है मेरे बाल
क्यो खिचते हो मेरे खाल
सही बात तो यह है -
कम पैसे दिये नाई को
तो बना दिया ऐसा हाल
पर एक बात समझ गया निल्को
बिगड़े तो सबका है ध्यान
और जब अच्छे थे
तो कोई नही पूछा –
क्या है हाल
और कैसे है बाल ......?


08 January, 2014

आधार कार्ड बनाम सरकार - एम के पाण्डेय निल्को



आधार यानी विशेष पहचान के आधार को समझिए। लोगों को पहचान देने के नाम शुरू हुआ प्रयास महज 3 साल में ही लोगों के लिए विकास से बहिष्कार और योजनाओं से बेदखली का कारण बनने लगा। इसका मकसद सरकार के गरीबों पर किए जाने वाले खर्च को कम करना बन गया है और दूसरा मकसद है समुदाय को नकद धन देना ताकि वे बाज़ार को फायदे रोशन करें।
 जनवरी 2009 में विशेष पहचान प्राधिकरण की स्थापना हुई और जुलाई 2009 में श्री नंदन निलेकणी को इसका प्रमुख बना दिया गया। इसके दो मकसद थे-एक यह कि लोगों के पास एक स्थाई पहचान पत्र नहीं है, वह दिया जाएगा और दूसरा इसे योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि यदि एक व्यक्ति एक बार से ज्यादा किसी योजना का लाभ ले रहा है या नकली हितग्राही बनाए गए हैं, तो उन्हें पहचाना जा सके। यह पहचान पत्र या क्रमांक देने के लिए हर व्यक्ति को अपनी आंखों की पुतलियों और सभी उंगलियों के निशान देने होंगे।

इस प्राधिकरण ने यह हमेशा कहा कि आधार पंजीयन अनिवार्य नहीं है पर अन्य विभाग अपनी योजनाओं का लाभ देने के लिए इसे एक शर्त के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। हुआ भी यही। राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी क़ानून के तहत खाते खोलने के लिए इसे अनिवार्य कर दिया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय गैस सेवा के तहत आधार क्रमांक की मांग करना शुरू कर चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में भी इसका प्रावधान है। सस्ता राशन लेने के लिए भी इसे अनिवार्य बनाया जा रहा है।

हमारे प्रधानमंत्री ने वर्ष 2010 में नेशनल आइडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया विधेयक राज्यसभा में पेश किया, इसमें यह भी नहीं बताया गया था कि वे किस हैसियत से यह विधेयक पेश कर रहे हैं। इस विधेयक को वित्त विभाग की संसद की स्थाई समिति ने खारिज ही कर दिया पर प्राधिकरण को कोई फर्क नहीं पड़ा। वर्ष 2009-10 में इसके लिए 120 करोड़ रूपए के बजट का प्रावधान था, जो 20010-11 में बढ़ कर 1900 करोड़ कर दिया गया।

दिसंबर 2012 तक प्राधिकरण 2300.56 करोड़ रूपए खर्च कर चुका था। जानीमानी क़ानून विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर उषा रामनाथन कहती हैं कि बिना विभाग वाले और बिना किसी कानूनी प्रावधान के चल रहे इस प्राधिकारण और काम पर 45 हज़ार से डेढ़ लाख करोड़ रूपए तक खर्च होने का अनुमान है।

हम सब जानते हैं कि बैंक में खाता खोलते समय हम अपना फोटो भी लगाते हैं, हस्ताक्षर भी करते हैं और जरूरत पड़ने पर अंगूठे का निशान लगाते हैं। यानी हम जैविकीय पहचान चिन्ह बैंक को उपलब्ध करवाते ही हैं। महत्वपूर्ण यह है कि इन चिन्हों का उपयोग केवल स्थानीय स्तर पर केवल बैंकिंग व्यवहार के लिए ही होता है; इसके विपरीत आधार पंजीयन के लिए आंखों की पुतली और सभी उंगलियों के निशान इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि हर व्यक्ति एक किस्म की सरकारी निगरानी में आ सके। किसी भी तरह के नकद हस्तांतरण को आधार यानी विशेष पहचान पंजीयन को जरूरी शर्त के रूप में लागू नहीं किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि विशेष पहचान प्राधिकरण ने स्वयं यह घोषित किया है कि आधार पंजीयन अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक है। संसद की स्थाई समिति ने भी विशेष पहचान क्रमांक और प्राधिकरण पर लाए गए विधेयक को पूरी तरह से खारिज कर दिया है परन्तु फिर भी भारत सरकार इसे योजनाओं का लाभ लेने के लिए एक अनिवार्य शर्त के रूप में लागू कर रही है।



अलग-अलग तरीकों से यह सन्देश दिया जा रहा है कि यदि व्यक्ति ने विशेष पहचान क्रमांक नहीं लिया तो उसे सरकार की कोई योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

आधार के विस्तार के लिए यह प्रचारित किया जा रहा है इससे गरीबों और झुग्गीवासियों के बैंक खाते खुलेंगे और उन्हें आवास-फोटो सहित पहचान पत्र मिल सकेगा, जबकि वास्तविकता यह है कि आवेदकों से यह कहा गया है कि वे आधार पंजीयन के लिए अपना निवास और फोटो पहचान पत्र लगाएं। यह कोई नहीं बता रहा है कि लाखों आश्रय विहीन लोग अपनी पहचान कहां से खोज कर लाएं! देश में अब तक हुए आधार पंजीयन में ऐसा कोई नहीं है जिसका पंजीयन बिना प्रमाण के हुआ हो।

यानी सच्चाई यह है कि भारत सरकार का मकसद लोगों को पहचान पत्र देना नहीं निगरानी के लिए एक डाटा बेस तैयार करना है। मुंबई, जहां देश की सबसे ज्यादा झुग्गीवासी जनसंख्या है, में गरीबों में यह सन्देश दिया गया है कि यदि आधार पंजीयन नहीं करवाया तो उन्हें बस्ती से बाहर निकाल दिया जाएगा और बिजली, पानी समेत हर सेवा वापस ली जा सकती है। एक तरह से देश में गरीबों को भयाक्रांत कर दिया गया है वे आधार की अदालत में अपराधी की तरह खड़े हों और हमेशा के लिए अपनी निजी नागरिक स्वतंत्रता राज्य के निगरानी तंत्र के सुपुर्द कर दें। और जन विरोधी नीतियों को लगातार लागू कर रही सरकार को अपने देश के सभी नागरिकों में अपराधी और आतंकवादी नज़र आता है; इंसान नहीं!

आधार या विशेष पहचान पंजीयन को प्रचारित करने के पीछे नंदन निलकेणी के नेतृत्व वाला प्राधिकरण यह तर्क देता है कि देश में करोड़ों लोगों के पास स्थाई पते और फोटो लगे पहचान पत्र नहीं हैं, आधार इस कमी को पूरा कर देगा। सवाल यह है कि पहचान के लिए ऐसे चिन्ह लिए जाने की क्या जरूरत है जो मूलतः अपराधियों की निगरानी के लिए लिए जाते हैं। इस काम के लिए आंखों की पुतलियों और हाथों की उंगलियों के सभी निशान लिए जा रहे हैं।

आधार प्राधिकरण का तर्क यह रहा है कि ये दोनों निशान कभी नहीं बदलते हैं जबकि वैज्ञानिक अध्ययन बता रहे हैं कि तीन से पांच सालों में आंखों की पुतलियों के निशान बदल जाते हैं। इसी तरह 5 सालों के बाद उंगलियों के निशान भी बदल जाते हैं। ऐसे में सवाल तो खड़ा होता ही है कि इस पूरी कवायद का मकसद क्या है?

भारत सरकार को यह पता चलने लगा है कि नागरिकों पर निगरानी रखने के लिए ये दो निशान पर्याप्त नहीं हैं, तो अब इसके लिए डीएनए का चित्र लिए जाने के प्रस्ताव पर बात हो रही है। इतना ही नहीं सरकार को यह भी पता नहीं है कि भारत में 1.20 करोड़ लोगों को कुपोषण जनित मोतियाबिंद है, उनकी आंखों की पुतलियों के निशान नहीं लिए जा सकते हैं और हर रोज मजदूरी करने वाले मजदूरों, जिनकी संख्या लगभग 15 करोड़ है, की उंगलियों के निशान भी लगभग घिस से गए हैं। क्या वे अपने सही जैविक चिन्ह दे पाएंगे और यदि उनका पंजीयन हो भी गया तो क्या उन्हें उन योजनाओं का लाभ मिल पाएगा, जिन्हें आधार से जोड़ा जा रहा है! जवाब हैं - नहीं!

क्योंकि 45 प्रतिशत संभाव्यता यह है कि किसी न किसी कारण से व्यक्ति की उंगलियों के निशान का आधार में दर्ज निशान से मिलान न हो। वास्तव में ऐसा नहीं है कि आधार से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार होगा, सच यह है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आधार पंजीयन को अनिवार्य बना कर सरकार अपना मकसद पूरा करना चाहती है।

प्राधिकरण यह मानकर चल रहा है कि जैविक पहचान चिन्ह (बायोमेट्रिक चिन्ह) किसी एक व्यक्ति की खास और विशेष पहचान को सुनिश्चित करते हैं, यानी एक चिन्ह का एक ही व्यक्ति होगा। अमेरिका की सुरक्षा एजेंसी सीआईए और डिफेन्स एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी के लिए अमेरिका की नेशनल रिसर्च कौंसिल ने एक अध्ययन कर बताया कि बायोमेट्रिक चिन्ह प्राकृतिक रूप से बदलते हैं।

इस चिन्ह पर आधारित तकनीकें छोटे स्तर पर तो काम कर सकती हैं पर यदि इनका बड़े स्तर पर उपयोग किया गया तो यह बड़ी समस्याएं खड़ी कर सकती है। आज बायोमेट्रिक चिन्ह किसी की पहचान की संभाव्यता है, जबकि तकनीक इसके ठीक विपरीत चलती है और मानती है कि बायोमेट्रिक चिन्ह मानक स्थिर होते हैं। 17 जुलाई 2010 को इकोनोमिक टाइम्स ने लिखा कि आधार लाखों लोगों की उंगलियों के निशान उतने साफ़ तरीके से दर्ज नहीं कर सकेगा, जितना कि वह अपने प्राधिकरण के चिन्ह में दिखाता है क्योंकि कठोर श्रम करते हुए मजदूरों की उंगलियों के निशान ही खत्म हो गए हैं। इन निशानों को तकनीकी भाषा में कम गुणवत्ता वाले निशान कहा जाता है।

इनका यदि पंजीयन हो भी गया तो ये सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से बाहर हो जाएंगे; निश्चित रूप से भारत की सरकार चाहती भी यही है। प्राधिकरण की बायोमेट्रिक समिति ने भी यह चेतावनी दी है कि 5 करोड़ लोगों (अब तक बायोमेट्रिक चिन्ह लिए जाने वाले लोगों की यही अधिकतम संख्या है) के बायोमेट्रिक चिन्ह लिए जाने के बाद क्या ये चिन्ह विशेष रह जाते हैं, इसके कोई अध्ययन नहीं हुए हैं। भारतीय सन्दर्भ में निशानों की गुणवत्ता और सटीकता का कोई अध्ययन नहीं हुआ है।

यह अध्ययन जरूरी है क्योंकि यहां लोग चाय बागानों में काम करते हैं, समुद्र और नदियों में काम करते हैं, मजदूरी करते हैं, उनकी उंगलियों के निशान कितने सटीक होंगे, इस सवाल का उत्तर खोजा जाना जरूरी है।

पंजीयन के दौरान यह घोषणापत्र भरवाया जाता है कि आवेदक के द्वारा दी गयी सूचनाएं प्राधिकरण उपयोग में ला सकता है और इनका उपयोग जन-कल्याणकारी योजनाओं-वित्तीय सेवाओं के लिए किया जा सकता है। हर व्यक्ति की जानकारी हर उस विभाग के लिए उपलब्ध रहेगी जो अपनी योजनाओं में हितग्राहियों की जांच करना चाहता है और जो पंजीयन कर रहे हैं।

यह पूरी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध रहेगी, जिसकी सुरक्षा करना कठिन ही होगा। यानी हमारी निजी जानकारियां गोपनीय नहीं रह पाएंगी। (वेब दुनिया से साभार )



आधार पर हमारे मधुलेश पाण्डेय जी का नज़रिया ........

सरकारी योजनाओ के लाभ के लिए – आधार
सरकारी विभाग भी जनता से मांग रही – आधार
गैस सिलेन्डर वाले बोले चाहिए हमे आधार
बैंक बोले , दिखाओ अपना आधार
लेकिन आधार तो है दोहरी तलवार
इसके आड़ मे कंपनिया करेगी वार
थोड़ा करे विचार .....
आप के डेटा की कंपनिया कर रही प्रचार
इसी मे है उनका आधार
और आप हो रहे निराधार
देश मे निजी जानकारी इकठ्ठा करना कोई क़ानून नहीं
आँखें , हथेली हमारी है , कोई सरकार की नहीं
एक बात नहीं समझ रहा निल्को
आख़िर क्यो जरूरी है ये आधार
अप्रत्यक्ष रूप से बाध्य कर रही सरकार
ऐसा करना नहीं है उसका अधिकार
फिर आख़िर क्यो जरूरी है ये आधार ......!
***************
एम के पाण्डेय निल्को
एक आधार कार्ड धारक 



आप मेरे ब्लाग पर पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, और ब्लॉग पसंद आवे तो कृपया उसे अपना समर्थन भी अवश्य प्रदान करें! धन्यवाद .........!
Loading...