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31 December, 2014

लौट आओ हुआ सवेरा

 


लौट आओ, हुआ सवेरा ,
एक नयी उम्मीद के साथ
समय आया कुछ कर दिखाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ , हुआ सवेरा |

बीत गया जो बीतना था
एक पुराने एहसास के साथ
समय आया उसे भूल जाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ, हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
वो समय , जो गलत था
जिसको हमने नहीं समझा ,
एक गलतफहमी के साथ
नया साल आया उसे भूल जाने को
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ , हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
सारी भूमिकाएं पीछें छुट गयी
एक नए वादों के साथ
वो सारे दिन चले गए छोड़ हमें
एक नयी कहानी के साथ
समय आया एक नए हौसलों का
बहुत ही दिनों के बाद
लौट आओ, हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
कर गया अंकित हमें
पुरे अंजर-पंजर के साथ
कैसे निकलू इस अंतःकरण से
इस गंभीर कल्पना के साथ
लौट आओ ,हुआ सवेरा

एक नयी उम्मीद के साथ
समय आया कुछ कर दिखाने को
बहुत ही दिनों के बाद|
लौट आओ ,हुआ सवेरा
 
-सौम्या पाण्डेय (बिट्टू)
 

ऐसे बुद्ध जिनका श्रम ही आनंद - डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय

अनुकरणीय: लोक सेवक की साहित्य साधना बनी चर्चा का विषय

ब्रजेश पाण्डेय, सिद्धार्थनगर - गौतम की धरती को एक ऐसे बुद्ध मिले हैं, जो अक्षर के ज्ञान रूपी सागर को गागर में भरने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। यह कोई और नहीं अपने डीएम हैं डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय। माटी का सौभाग्य है कि चौबीस में बारह घंटे आम जनता और सरकार को देते हैं, तो तीन से चार घंटे किताबों को। 1 बहुत कम लोगों को पता है कि जिलाधिकारी लेखन प्रतिभा के धनी हैं। अध्यात्म से लेकर योग और साहित्य पर इतनी मजबूत पकड़ कि व्यस्त समय में दो दर्जन किताबें हमारे बीच प्रकाश पुंज हैं। वास्तु विमर्श और न्यायाधिपति ग्रह शनि-एक समग्र विवेचक नाम से दोप्रकाशाधीन हैं। कपिलवस्तु महोत्सव के बहाने ही सही इनकी किताबें भी चर्चा की विषय बनी हुई हैं। किताबों के संग्रह भंडार में ज्ञान की असीम दीप जलायी गयी है। 1शब्द संक्षेप सागर के नाम से नवीन विधा की रचना हिन्दी रूपांतरण ने इसकी बोधगम्यता, उपयोगिता, व सार्थकता द्विगुणित कर दी है। सामान्य ज्ञान की दिशा में यह किताब मील का पत्थर है। इसमें सामान्य ज्ञान के व्यापक आयाम एवं अंतरदृष्टि को लेकर प्रणीत है। हिन्दी भाषा के प्रसार एवं उसको हिन्दीतर क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाने के साथ ही यह शिक्षा, कृषि विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, कंप्यूटर राजनीति अन्तर्जाल एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए निश्चित तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। दैनिक काम काज में जुड़े ऐसे लोग जिनके लिए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूपांतरण कठिन है, उनके लिए यह मुफीद है। 1 गंगा दशहरा जून 2014 को प्रकाशित ‘शब्द संक्षेप सागर’ को लिखने के पीछे की कहनी कम दिलचस्प नहीं है। डा. सुरेन्द्र बताते हैं कि जुलाई 2013 में विशेष सचिव वित्त के रूप में सचिवालय में जब तैनात था तो बैठकों में अनेक योजनाएं, संस्थान, समितियों एवं विभागों का नाम संक्षेप में प्रयोग किया जाता था।1 शब्द संक्षेपों के बारे में जानकारी न होने पर मुङो व अन्य प्रतिभागियों को भी विषय वस्तु को आत्म सात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उसी संकल्प एवं निश्चय का प्रतिफल है कि आज यह किताब मौजूदा एवं भावी पीढ़ी के लिए समर्पित है। पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी के लिए सुलभ कराया गया है। पुस्तक रचना में अग्रज राकेश चौबे विशेष सचिव वित्त का भरपुर मार्ग दर्शन और सहयोग मिला। मेरा श्रम ही मेरे लिए आनंद है। किताब के लिए तीन से चार घंटे तो निकाल ही लेता हूं। योग और अध्यात्म के बारे में लिखी गई पुस्तक पर कहते हैं कि रचना में उनकी प}ी प्रेमा पाण्डेय का अहम योगदान हैं, जिन्होंने गृह कार्यो से निश्चित रखकर मुङो सहयोग दिया।ब्रजेश पाण्डेय, सिद्धार्थनगर 1गौतम की धरती को एक ऐसे बुद्ध मिले हैं, जो अक्षर के ज्ञान रूपी सागर को गागर में भरने का भगीरथ प्रयास कर रहे हैं। यह कोई और नहीं अपने डीएम हैं डा. सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय। माटी का सौभाग्य है कि चौबीस में बारह घंटे आम जनता और सरकार को देते हैं, तो तीन से चार घंटे किताबों को। 1 बहुत कम लोगों को पता है कि जिलाधिकारी लेखन प्रतिभा के धनी हैं। अध्यात्म से लेकर योग और साहित्य पर इतनी मजबूत पकड़ कि व्यस्त समय में दो दर्जन किताबें हमारे बीच प्रकाश पुंज हैं। वास्तु विमर्श और न्यायाधिपति ग्रह शनि-एक समग्र विवेचक नाम से दोप्रकाशाधीन हैं। कपिलवस्तु महोत्सव के बहाने ही सही इनकी किताबें भी चर्चा की विषय बनी हुई हैं। किताबों के संग्रह भंडार में ज्ञान की असीम दीप जलायी गयी है। 1शब्द संक्षेप सागर के नाम से नवीन विधा की रचना हिन्दी रूपांतरण ने इसकी बोधगम्यता, उपयोगिता, व सार्थकता द्विगुणित कर दी है। सामान्य ज्ञान की दिशा में यह किताब मील का पत्थर है। इसमें सामान्य ज्ञान के व्यापक आयाम एवं अंतरदृष्टि को लेकर प्रणीत है। हिन्दी भाषा के प्रसार एवं उसको हिन्दीतर क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाने के साथ ही यह शिक्षा, कृषि विज्ञान, प्रशासन, चिकित्सा, कंप्यूटर राजनीति अन्तर्जाल एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के लिए निश्चित तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है। दैनिक काम काज में जुड़े ऐसे लोग जिनके लिए अंग्रेजी शब्दों का हिन्दी रूपांतरण कठिन है, उनके लिए यह मुफीद है। 1 गंगा दशहरा जून 2014 को प्रकाशित ‘शब्द संक्षेप सागर’ को लिखने के पीछे की कहनी कम दिलचस्प नहीं है। डा. सुरेन्द्र बताते हैं कि जुलाई 2013 में विशेष सचिव वित्त के रूप में सचिवालय में जब तैनात था तो बैठकों में अनेक योजनाएं, संस्थान, समितियों एवं विभागों का नाम संक्षेप में प्रयोग किया जाता था।1 शब्द संक्षेपों के बारे में जानकारी न होने पर मुङो व अन्य प्रतिभागियों को भी विषय वस्तु को आत्म सात करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। उसी संकल्प एवं निश्चय का प्रतिफल है कि आज यह किताब मौजूदा एवं भावी पीढ़ी के लिए समर्पित है। पुस्तक को और अधिक ज्ञानवर्धक बनाने के लिए सभी के लिए सुलभ कराया गया है। पुस्तक रचना में अग्रज राकेश चौबे विशेष सचिव वित्त का भरपुर मार्ग दर्शन और सहयोग मिला। मेरा श्रम ही मेरे लिए आनंद है। किताब के लिए तीन से चार घंटे तो निकाल ही लेता हूं। योग और अध्यात्म के बारे में लिखी गई पुस्तक पर कहते हैं कि रचना में उनकी प}ी प्रेमा पाण्डेय का अहम योगदान हैं, जिन्होंने गृह कार्यो से निश्चित रखकर मुङो सहयोग दिया।स्टाल पर प्रदर्शित जिलाधिकारी डा.सुरेन्द्र कुमार द्वारा लिखी गई पुस्तकें। जागरण ।डा.सुरेन्द्र कुमार।ज्यातिष शब्द कोष, ज्योतिष पंचशील, आयुर्वेद पंचशती, श्लेष अलंकर सिद्धांत एंव प्रयोग, धर्म शास्त्रस्रसहस्रकम, उत्तर खोजते प्रश्न, र} विमर्श, उत्तर प्रदेश की नदियां एवं पहाड़, हिन्दु समाज के प्रचलित संस्कार, भारत की विदुषी महिलाएं, शंकर गीता, वास्तु शब्दार्णव (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) अमृत जीवन (उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) अरिष्टयोग विमर्श,(उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान से पुरस्कृत) पूर्वाचल लोक भाषा कोश, अमेरिका का प्रशैक्षणिक यात्र-एक संस्मरण, सम्पादन-सूर्य विमर्श, संपादन-हिन्दुस्तानी त्रैमासिक लेख-अनुक्रमणिका, संपादन-संस्कृति पुरुष: पंडित विद्या निवास मिश्र, संपादन-सोहित्य-शेवधि, संपादन-इलाहाबाद साहित्यकार को कोष, संपादन-भारतीय मनीषा दर्शन, कौशाम्बी का स्वर्णिम इतिहास एवं वर्तमान, योग और अभ्यास।

हैरान कर दिया – अनुज शुक्ला

एक बार फिर उसने हैरान कर दिया
बात कर के परेशान कर दिया
बार बार हाल पूछ कर
मुझे ही बीमार कर दिया |
पूछता हूँ की – क्यों दरवाजा बंद
तो मेरा हाल बेहाल कर दिया
क्यों कमरे के शीशे तोड़ कर
अपने ही घर में मेहमान कर दिया |
किसी की ख़ामोशी को समझने के लिए
खुद को ही खामोश कर दिया
यही तो था मेरा गाँव खुशियों का
बता तूने क्यों मुझे गुमनाम कर दिया |
बता कौन आया था मिलने तुमसे
जिसने जीना हराम कर दिया
तुम्हारी गलिया नहाती थी मेरी रचनाओ से
आज क्यों तुमने वीरान कर दिया |
पता तो था की तुम मेरी नहीं
इसलिए मैंने तुम्हे अस्वीकार कर दिया
कुछ इस तरह मैंने अपनी जिन्दगी को  
शायद आसान कर दिया |
रोती रहेगी अब हर आँख
और हर चीज को उसने तार तार कर दिया
और चारों ओर एक खिन्न दृष्टि से देख कर
तुमने असफल इतिहास को त्याग कर दिया |
मैं तो आज भी गम का ज़हर पिया करता हूँ
यह कह कर उसने भी ‘अनुज’ का नाम कर दिया
इन रिश्तों की उलझनों में मैंने ख़ुद को कही खो दिया.
और इस तरह मैंने ज़िंदगी  को आसान कर लिया |

अनुज शुक्ला

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18 December, 2014

अपना परिचय ठीक से नहीं करा पाता

एम के पाण्डेय 'निल्को'  
कुछ मेरे मित्र मेरे परिचय के बारे में ज्रिक कर रहे थे , उनकी शिकायत थी की कभी मैंने अपना परिचय ठीक से नहीं दिया | बताना चाहूगा की यह मेरी कमजोरी है की मैं अपना परिचय ठीक से नहीं करा पाता कई बार कोशिश की किन्तु सफल पूरी तरह से न हो सका , एक बार पुनः संक्षिप्त में कोशिश कर रहा हूँ ज़रा आप की बताइए कहा तक यह कोशिश सफल हुई | लेकिन इस बात का अफ़सोस है की कुछ लोग - 


हज़ारों ऐब ढूँढ़ते है वो निल्को में इस तरह,
अपने किरदारों में वो फरिश्तें हो जैसे …..!


और मैं हर बार यही कहता हूँ की -

जैसा भी हूँ अच्छा या बुरा अपने लिए हूँ 
मैं ख़ुद को नहीं देखता औरो की नज़र से ....!
वैसे 
ख़ामोशी भी  बहुत कुछ कहती है
कान लगाकर नहीं ,
दिल लगाकर सुनो ....

मै कोई बहुत बड़ा लेखक या कवि नहीं , बस यूं ही अपने मन के भावों को अपनी कलम के जरिये कागज़ पर उतार लेता हूँ जो कहीं कविताओं के रूप मे, कहीं लेखो के रूप मे अपनी जगह बना लेते है । मैं इस विश्व के जीवन मंच पर अदना सा किरदार हूँ जो अपनी भूमिका न्यायपूर्वक और मन लगाकर निभाने का प्रयत्न कर रहा है। पढ़ाई लिखाई के हिसाब से बुद्धू डिब्बा (कम्प्युटर) से स्नातक हूँ और प्रबंधन से परास्नातक। कई मासिक पत्रिका और वैबसाइट पर स्वतंत्र लेखन में कविता, टिप्पणी, आलोचना आदि में विशेष रुचि है उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िला के हरखौली गाँव मे जन्म और राजस्थान मे पढ़ाई की और आगे गांवो के लिए कुछ सरकारी - गैर सरकारी , सामाजिक परियोजनाओ का संचालन करने का इरादा । अपनी रचनाओ के माध्यम से गांवो/लोगो में जागरुकता लाना चाहता हूं ऒर समाज के लोगों का ध्यान उनकी समस्याओं की ऒर खीचना चाहता हूं। ताकि उनको भी स्वतंत्र पहचान एवं उडान भरने के लिए खुला आसमान मिल सके। बस यही मेरे जीवन का लक्ष्य है । बस इतनी सी बातें है मेरे बारे में।

सादर 

एम के पाण्डेय 'निल्को' 


17 December, 2014

पेशावर - खून के नापाक ये धब्बे


खून के नापाक ये धब्बे ,

खुदा से कैसे छिपाओगे ?

मासूमो के कब्र पर चढ़कर

कौन सा जन्नत पाओगे ?

अल्लाह की भी रूह काप गई होगी

शांति दूतो के इस कृत्य से ?

कैसी होगी उस माँ की हालत

जिसके बच्चे ने कहा होगा -

माँ, मैं आज स्कूल नहीं जाऊंगा

पर माँ ने उसे डाट कर

जबरजस्ती स्कूल भेजा होगा |

आतंक के खिलाफ गर

पाकिस्तान ने आवाज़ उठाई होती

तो मासूमो की जान

आज यू न जाई होती |

अब स्कूल मदरसे भी डरे हुए है

किसी अनजान डर से सहमे हुए है

क्यों इंसानियत होती है हर बार शर्मशार ?

क्या इसका जवाब कोई देगा.....&%*#$@$........?

किसी ने सच ही कहा है -

आज दिन में एक अजीब सा दर्द है मेरे मौला

ये तेरी दुनिया है , तो यहाँ इंसानियत क्यों मरी है …?

हिंदुस्तानी होना क्या होता है

ये तब पता चलता है जब गाढ़े वक़्त में

पाकिस्तान के लिए भी दुःख होता है

पेशावर में मासूम परिंदों के लहू से

भरे पंखों को पेशा बना डाला...

लगा ऐसा जैसा शैतान ने खुदा को

भी अपने जैसा बना डाला..



ईश्वर उन बच्चों की आत्मा को शांति प्रदान करे जिनका जीवन, जीवन बनने से पहले ही समाप्त कर दिया गया और प्रभु बाकी बचे बच्चों को साहस और हिम्मत दे कि वो इस ह्रदय विदारक घटना से खुद को उबार पाये। मासूम बच्चों की मौत का हमें बड़ा दुःख है और पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है मगर फिर भी हमें बच्चों की मौत का मजाक नहीं बनाना चाहिए, लेकिन ये बात #
जेहाद का समर्थन करने वाले मुसलमानों को समझनी चाहिए कि आज ये जेहादी बीमारी गैर- मुसलमानों से ज्यादा खुद मुसलमानों को ही निगल रही है, ये जेहाद सिर्फ और सिर्फ इंसानियत के खिलाफ है न की किसी समुदाय विशेष के खिलाफ।।

भगवान इस हादसे में मारे गए बच्चों की आत्मा को शांति दें।।

12 December, 2014

विलक्षण प्रतिभा - गजब की स्मरण शक्ति जयपुर के WONDER BOY मनन सूद की

Manan Sood
गूगलब्वॉय के नाम से प्रसिद्ध कौटिल्य पंडित के बाद अब जयपुर के मनन सूद भी अपने जवाबों से लोगों को चकित करने में लगा हैं. वह भी गूगल ब्वॉय की तरह विलक्षण स्मरण शक्ति की धनी हैं, किसी भी सवाल का जवाब सेकेंड़ों में देकर वह लोगों को दांतों तले अंगुलियां दबाने पर मजबूर कर देता हैं चार साल का मनन सूद यूं तो आम बच्चों सा दिखता है, लेकिन उसकी खासियत तब सामने आती है, जब कठिन से कठिन सवालों का जवाब वह बिना देरी किए देने लगता है। एलकेजी में पढ़ रहे मनन को राजस्थान और देश के अलावा विश्व के मानचित्र में महारथ है। वह देश का स्थान और राजधानियां ऎसे बताता है, जैसे वर्णमाला सुना रहा हो। उसे केमिस्ट्री की आवर्त सारणी, सौर मंडल, देशों की मुद्राएं, आविष्कार और किताबों के रचनाकारों के नाम कंठस्थ हैं। इनसे जुड़ा कोई सवाल किसी भी वक्त उससे पूछ सकते हैं। महज चार वर्ष की आयु में जिले का नाम रोशन करने वाले मनन को सभी देशों की राजधानी, सभी आविष्कारों के बारे में जानकारी है किसी भी आविष्कार के वैज्ञानिक का नाम झट से बताता है 
विश्वभर की जानकारी रखने वाले कौटिल्य पंडित की प्रतिभा से तो कोई अनजान नहीं होगा, ठीक वैसे ही सिविल लाइन्स जयपुर के निवासी श्री आलोक सूद के चार वर्षीय मनन को भी पूरे वर्ल्ड के बारे में ज्ञान है वह एक बार जो पढ़ लेता है, उसे कभी नहीं भूलता | 
उसकी उम्र भले ही अभी छोटी है, मगर विश्व के देशों की भौगोलिक सीमाएं, क्षेत्रफल व अन्य तमाम जानकारियां उसे जुबानी याद हैं। आपने सवाल किया नहीं कि जवाब तुरंत हाजिर। मनन के पिता आलोक सूद बताते हैं कि उनका बच्चा इतिहास और भूगोल की अच्छी जानकारी रखता है. वह किसी भी विषय को रटके नहीं बल्कि अच्छी तरह समझता है और इस पर अपनी राय भी देता है. विश्व के कई धर्मों और परम्पराओं के बारे में इसे पता है इसके साथ साथ वह मार्शल आर्ट भी सीखता है |
मनन के जीवन से वास्तव में आजकल के माता-पिता को सीख लेनी चाहिए कि बच्चा एक कच्चे घड़े की तरह होता है। जैसा हम ढालना चाहते हैं वैसा ही ढल जाता है। हम अपनी व्यस्तता के कारण उनके लिए समय नहीं निकाल पाते और न ही उनके प्रश्नों के उत्तर देने के अहमियत को समझते हैं या फिर उनको डांट देते हैं तो इसीलिए बच्चे भी मां बाप से बात करने में कतराने लगते हैं और अपने मन में आने वाले सवालों को अपने तक ही सीमित रख लेते हैं। उनकी जिज्ञासा तभी बढ़ती है जब उन्हें अपने प्रश्नों का जवाब मिले। यही कारण है कि मनन का दिमाग इतना तेज चलता है क्योंकि उसके दिमाग को पूरी खुराक मिल जाती है बचपन से ही वह काफी उत्सुक स्वभाव का है और बहुत कल्पनाशील है। अपने पिता व दादाजी से सब तरह के प्रश्न पूछता है। अधिकतर माता-पिता अपनी व्यवस्तता एवं अज्ञानता के चलते उन प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाते पर मनन के पिता और दादाजी जो शुरू से ही उसके सभी प्रश्नों के उत्तर देते रहे हैं और उनके अनुसार यदि उनको किसी प्रश्न का उत्तर मालूम नहीं होता तो भी इंटरनेट से ढूंढ़ कर वे उसे उत्तर देते हैं और तब तक उत्तर देते रहते हैं जब तक कि उसकी जिज्ञासा शांत नहीं हो जाती। इसी के फलस्वरूप मनन को सारे एटलस, सौरमंडल, देश, विदेश आभा बंसल, फ्यूचर पाॅइंट की राजधानी व राजनीति की बहुत जानकारी है। मनन के दादाजी श्री राकेश चंद्र सूद जो की एक वरिष्ठ मार्शल आर्ट प्रशिक्षक है मनन को पढ़ाते हैं और उसका एक दोस्त की तरह साथ देते हैं और उसके साथ बच्चा बनकर खेलते भी हैं। 

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एम के पाण्डेय निल्को

10 December, 2014

मैं कौन हूँ ......TRIPURENDRA OJHA NISHAAN

कैसे मै कहूं मै कौन हूँ ,
बस यूँ समझ लो 
मिल जाय मुझे गंगा तो सागर हूँ 
वरना अविरल बहता पानी हूँ,
स्वीकार करे समाज तो एक अनमोल रिश्ता हूँ ,
वरना एक अधूरी कहानी हूँ ,
पा लूं मंजिल तो एक मिसाल हूँ,
हो जाऊ बर्बाद तो मशहूर जवानी हूँ,
बदगुमां हूँ , बदनाम हूँ , 
जवानी की हरकत पुरानी हूँ,
जो पूछते हो तो बताती हूँ 'निशान',
न पहचाना तो खैर,
पहचान गये तो इश्क रूहानी हूँ 
.पर 
कैसे कहूं मै कौन हूँ .......................

                                   
 त्रिपुरेन्द्र ओझा " निशान "





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08 December, 2014

Wonder Boy - Manan Sood


The cute little boy Manan Sood is an Indian boy, who has became the great celebrity with his extraordinary memory. At the age of four years and five months, he talks about the world geography, per capita income, gross domestic product, politics, economy, and answers questions on various topics with ease while others in his age are learning ABC and nursery rhymes. His marvelous super power of grasping and recalling things amazed one and all.

Manan , a resident of Jaipur district in Rajasthan possesses a sound knowledge about geographical boundaries, outlines and other information related to the subject. He can answer all questions associated with planets and solar system in a few seconds.His analytical powers and incredible ability to remember facts have left everyone so spellbound that the local media has nicknamed this child prodigy living in northern India "Wonder boy." 



Personal ProfileName: Manan Sood
Famous as: Wonder Boy
Birth place: Jaipur 
Age: 4 Years
School: The Roots Public School
Father name: Mr. Alok Sood



04 December, 2014

सत्य जिन्दगी के ....

जिस दिन हमारी मोत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रहा जाता है।

जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।

जब हम चले जाते है तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।

एक चीनी बादशाह की मोत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा -
"मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।"

सीख?

ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय।
• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
• 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता
तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहेँ।
• धनी न होने पर भी परिपूण॔ रहें।
********
बेहतर जीवन जीयें !!!
********
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
*******
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
******
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
********

सादर





एम के पाण्डेय निल्को

03 December, 2014

कान्हा ओं कान्हा - एम के पाण्डेय ‘निल्को’

आदरणीय मित्रो ;
नमस्कार;
मेरी पहली भक्ति रचना  "कान्हा ओं कान्हा" आप सभी को सौंप रहा हूँ । मुझे उम्मीद है कि  मेरी ये छोटी सी कोशिश आप सभी को जरुर पसंद आएँगी,  रचना   कैसी लगी पढ़कर बताईये कृपया अपने भावपूर्ण कमेंट से मेरा हौसला बढाए. कृपया अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा. आपकी राय मुझे हमेशा कुछ नया लिखने की प्रेरणा देती है और आपकी राय निश्चिंत ही मेरे लिए अमूल्य निधि है |


कान्हा ओं कान्हा

कैसा हो गया जमाना
लगता है अब फिर पड़ेगा
तुम्हे धरती पे आना
कान्हा ओं कान्हा....!
सब कुछ तुम देख रहे हो
फिर भी नहीं कुछ बोल रहे हो
पर आज तुम्हे पड़ेगा बताना ....!
बासुरी की धुन पर
तुम सबको नचाते
पता नहीं क्या – क्या
तुम रास रचाते ...!
दिल किसी का
तुम न दुखाते
फिर क्यों ऐसा
दिन दिखाते ....!
पर ये जो कुछ भी
हो रहा है
तुम सब यह देख रहे हो
पर मौन का कारण
तुम्हे पड़ेगा बताना ...!
दुःख तो बहुत है
लोग भी बहुत है
पर तुम बिन
कोई नहीं है...!
एक बार फिर आ जाओ
अपने दर्शन करा जावो
‘निल्को’ की यही चाह
पूरा करा जाओ ...!
जब तक तुम न आओगे
मुझे अकेला पाओगे
कैसे मुझे समझोगे
जब तुम्हे हम बुलायेगे ...! 

*************
एम के पाण्डेय निल्को’



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02 December, 2014

Wonder Boy- Manan Sood


Post by Vmwteam Bharat.

The cute little boy Manan Sood  is an Indian boy, who has became the great celebrity with his extraordinary memory. At the age of four years and five months, he talks about the world geography, per capital income, gross domestic product, politics, economy, and answers questions on various topics with ease while others in his age are learning ABC and nursery rhymes. His marvelous super power of grasping and recalling things amazed one and all.

29 November, 2014

फ्रिज में रखे आटे के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी।

भोजन केवल शरीर को ही नहीं, अपितु मन-मस्तिष्क को भी गहरे तक प्रभावित करता है। दूषित अन्न-जल का सेवन न सिर्फ आफ शरीर-मन को बल्कि आपकी संतति तक में असर डालता है।
ऋषि- मुनियों ने दीर्घ जीवन के जो सूत्र बताये हैं उनमें ताजे भोजन पर विशेष जोर दिया है। ताजे भोजन से शरीर निरोगी होने के साथ-साथ तरोताजा रहता है और बीमारियों को पनपने से रोकता है। लेकिन जब से फ्रीज का चलन बढा है तब से घर-घर में बासी भोजन का प्रयोग भी तेजी से बढा है। यही कारण है कि परिवार और समाज में तामसिकता का बोलबाला है। ताजा भोजन ताजे विचारों और स्फूर्ति का आवाहन करता है जबकि बासी भोजन से क्रोध, आलस्य और उन्माद का ग्राफ तेजी से बढने लगा है। शास्त्रों में कहा गया है कि बासी भोजन भूत भोजन होता है और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति जीवन में नैराश्य, रोगों और उद्विग्नताओं से घिरा रहता है। हम देखते हैं कि प्रायःतर गृहिणियां मात्र दो से पांच मिनट का समय बचाने के लिए रात को गूंथा हुआ आटा लोई बनाकर फ्रीज में रख देती हैं और अगले दो से पांच दिनों तक इसका प्रयोग होता है। गूंथे हुए आटे को उसी तरह पिण्ड के बराबर माना जाता है जो पिण्ड मृत्यु के बाद जीवात्मा के लिए समर्पित किए जाते हैं। किसी भी घर में जब गूंथा हुआ आटा फ्रीज में रखने की परम्परा बन जाती है तब वे भूत और पितर इस पिण्ड का भक्षण करने के लिए घर में आने शुरू हो जाते हैं जो पिण्ड पाने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे भूत और पितर फ्रीज में रखे इस पिण्ड से तृप्ति पाने का उपक्रम करते रहते हैं। जिन परिवारों में भी इस प्रकार की परम्परा बनी हुई है वहां किसी न किसी प्रकार के अनिष्ट, रोग-शोक और क्रोध तथा आलस्य का डेरा पसर जाता है। इस बासी और भूत भोजन का सेवन करने वाले लोगों को अनेक समस्याओं से घिरना पडता है। आप अपने इष्ट मित्रों, परिजनों व पडोसियों के घरों में इस प्रकार की स्थितियां देखें और उनकी जीवनचर्या का तुलनात्मक अध्ययन करें तो पाएंगे कि वे किसी न किसी उलझन से घिरे रहते हैं। आटा गूंथने में लगने वाले सिर्फ दो-चार मिनट बचाने के लिए की जाने वाली यह क्रिया किसी भी दृष्टि से सही नहीं मानी जा सकती।
पुराने जमाने से बुजुर्ग यही राय देते रहे हैं कि गूंथा हुआ आटा रात को नहीं रहना चाहिए। उस जमाने में फ्रीज का कोई अस्तित्व नहीं था फिर भी बुजुर्गों को इसके पीछे रहस्यों की पूरी जानकारी थी। यों भी बासी भोजन का सेवन शरीर के लिए हानिकारक है ही।

आइये आज से ही संकल्प लें कि आयन्दा यह स्थिति सामने नहीं आए। तभी आप और आपकी संतति स्वस्थ और प्रसन्न रह सकती है और औरों को भी खुश रखने लायक व्यक्तित्व का निर्माण कर सके । 

अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा - 2014


महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के अनेक जन-पक्षीय संगठनों ने अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच और देश के 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इससे जुड़े तकरीबन 45 सदस्य-संगठनों व 100 से ज्यादा बिरादराना संगठनों द्वारा आयोजित की जा रही अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014 में सक्रिय भागीदारी की घोषणा की।
इस यात्रा का मकसद है शिक्षा में बाजारीकरण और सांप्रदायीकरण व हर तरह के भेदभाव के विरुद्ध जनता के व्यापक हिस्सों को संगठित करना ताकि केजी से पीजी तक पूरी तरह मुफ्त और राज्य द्वारा वित्त-पोषित समान शिक्षा प्रणाली की स्थापना की जा सके जो समतामूलक, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, प्रबुद्ध और मानवीय भारत का निर्माण करने में सक्षम हो जिसका ख्वाब शहीद भगत सिंह व उनके क्रांतिकारी साथियों ने देखा था।


आयोजन समिति के सदस्य लोकेश मालती प्रकाश ने कहा कि अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा में:-

 (क) हम समानता के मूलभूत संवैधानिक उसूल का उल्लंघन करने वाली मौजूदा भेदभावपूर्ण बहुपरती शिक्षा प्रणाली का विरोध करेंगे और पूरी तरह से राज्य द्वारा वित्त-पोषित व बराबरी पर आधारित, 12वीं कक्षा तक समान पड़ोसी स्कूल व्यवस्था समेत, केजी से पीजी तक की समान शिक्षा प्रणाली के लिए संघर्ष करेंगे जिसमें बच्चों व युवाओं को उनकी सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, आंचलिक, जातीय, भाषाई या लैंगिक पृष्ठभूमि और शारीरिक या मानसिक विकलांगता के आधार पर भेदभाव किये बगैर पूरी तरह से मुफ़्त और समान शिक्षा की गारंटी हो।

 (ख) हम सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़.डी.आइ.) समेत शिक्षा के किसी भी प्रकार के बाज़ारीकरण का विरोध करेंगे और हाशिए पर धकेले गए समूहों, यथा दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, विकलांगों और धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों खासतौर से इन समुदायों की महिलाओं के लिए व अन्य उत्पीड़ित समुदायों एवं समूहों जैसे खानाबदोश कबीलों, डी-नोटिफाइड जनजातियों, बंधुआ मजदूरों, विस्थापितों, सुदूर द्वीपों के निवासियों और रेगिस्तान, जंगलों व गांवों के निवासियों और ट्रांसजेंडरों के सामाजिक न्याय व समानता के अधिकार के लिए संघर्ष करेंगे।
(ग) हम शिक्षा के नव-उदारवादी एजेंडे का विरोध करेंगे जो वैश्विक पूंजी की जरूरत के मुताबिक शिक्षा के उद्देश्य को विकृत कर उसे गुलाम मानसिकता के कुशल कामगारों के उत्पादन तक सीमित कर देता है और इसकी जगह पर हम ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष करेंगे जिसका उद्देश्य समाज के मानवीय विकास के लिए हरेक व्यक्ति को प्रबुद्ध व सचेत बनाना होगा।
 (घ) हम भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्व व्यापार संगठन-गैट्स को दिए गए प्रस्तावों और हमारी उच्च शिक्षा को वैश्विक पूंजी का पिछलग्गू बनाने की कानूनी चालों का विरोध करेंगे और शिक्षा व सभी स्तरों पर ज्ञान के निर्माण व उस संबंध में नीति-निर्माण के लिए देश की संप्रभुता को बरकरार रखने के लिए संघर्ष करेंगे।
 (ङ) हम शिक्षा के सांप्रदायीकरण एवं दक्षिणपंथी संगठनों, खासतौर से संघ परिवार व उससे जुड़े संगठनों द्वारा शिक्षा में दकियानूसी, संकीर्ण और विभाजनकारी दुष्प्रचार का विरोध करेंगे और पाठ्यचर्या को वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष, आलोचनात्मक और लोकतांत्रिक नज़रिए से लैस करने के लिए व देश की बहुलता के सम्मान और धार्मिक, भाषाई व सांस्कृतिक समूहों के लोकतांत्रीकरण के लिए संघर्ष करेंगे ताकि वर्ग, जाति, जेंडर, भाषा, अंचल, और शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता पर आधारित गैर-बराबरी का खात्मा किया जा सके।
 (च) हम स्कूलों, कालेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे हमलों का विरोध करेंगे और शिक्षा संस्थानों व कैम्पसों में किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की आज़ादी, आलोचनात्मक विचार, असहमति की अभिव्यक्ति व बहस की आज़ादी, और शांतिपूर्ण विरोध (सत्याग्रह) के अधिकार के पक्ष में संघर्ष करेंगे।
 (छ) बहुभाषीयता के संदर्भ में मातृभाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाए जाने के शिक्षाशास्त्रीय महत्व पर बल देते हुए, हम सभी सरकारी व निजी शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के माध्यम के रूप में अंगरेजी के वर्चस्व का विरोध करेंगे और एक बहु-भाषाई परिवेश में मातृभाषा को शिक्षा के माध्यम के तौर पर स्थापित करने के लिए संघर्ष करेंगे। साथ ही विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में, ज्ञान-उत्पादन में, विज्ञान के प्रसार और कामकाज में, सामाजिक विज्ञानों व मानविकी में, लेन-देन और व्यापार में भारतीय भाषाओं की मुख्य भूमिका के लिए संघर्ष करेंगे; और देश की भाषाओं में भारत और विश्व भर के सारे विषयों के बहु-आयामी अनुवाद के लिए प्रचार करेंगे।

All India Shiksha Sangharsh Yatra – 2014

‘All India Shiksha Sangharsh Yatra – 2014’ organised by AIFRTE
 is a call to resist commercialisation and communalisation of education in India.


प्रस्तुति द्वारा  एम के पाण्डेय 'निल्को'
जयपुर, राजस्थान 

27 November, 2014

क्रंदन ............Tripurendra Ojha NISHAAN


आ कर देख ले मुझपे सितम करने वाले ,
तेरे बिना दिन भी कट गया रात भी गुजर गई
इस खुशफहमी में कि तू मिलेगा मुझे
इन्तेजार करते करते एक  मुद्दत गुजर गई ,
अरे बेमुरव्वत जब तुझे कोई और मिला ,
तुझे लगा तेरी जिन्दगी संवर गई ?
मत रहना इस गफलत में अरे बेगैरत,
क्यों कि करेगा जब रुसवा तुझे
फिर न कहना मेरी जिन्दगी बिखर गई ,
किसी के अरमां कुचल के सपनो का ताजमहल बनाने वाले ,
तुझे न पता एक टूटे दिल कि आह से दुनिया सिहर गई ,
तुझमे औ मुझमे बड़ी समानता थी न ?
सो मेरी तरह तू भी खायेगा धोखा उसी से
जिस पर तू दिल ओ जान से मर गई .....:(
                                                               

***********

Tripurendra Ojha NISHAAN

झुकना – नज़र निल्को की

वो शख्स जो
तुमसे झुक का
मिला हो
शायद
वह तुमसे
कई गुना बड़ा हो ..!
उसकी आँखों में
तुम्हे लिए
जो खास बात है
वह एक
किसी के लिए
मिशाल है ...!
मत हस
उसके इस
चाल चलन पर
वह गई गुना
समझदार है तुमसे ...!
तुमने हस दिया
उसकी बुद्दिमता पर
लेकिन वह
सफल हो गया
अपनी इरादों पर.....!
तुमसे हस कर
जो कह दिया
ठीक है
उसने सचमुच में ही
ठीक कर दिया .....!
एक अनोखे तरीके से
अपना और तुम्हारा
काम कर गया ....!



एम के पाण्डेय ‘निल्को’

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25 November, 2014

जिजीविषा 2......डायरी के पीले पन्ने (ii) -Tripurendra Ojha 'nIshaan'

गतांक से आगे,,,,
                    

सुबह के नौ बजे मै उठा सर दर्द सा महसूस हो रहा था , सीधे छत पर पहुंचा | घना कुहरा गिरा था , बमुश्किल मै उसके छत पे देख सका था , वो वहां न थी | वो वहां रोज ही कपडे डालने के बहाने आया करती थी जो आज कल कम हो गया था | मै दस मिनट रेलिंग के पास खड़ा रहा , सूर्य कांतिहीन, धूमिल सिर्फ एक चमकते आईने के समान दिख रहा था , गली के आते जाते आदमी भूत जैसे दिखते थे | मौसम सर्द था , मै शिथिल खड़ा रहा कुछ देर और ये आशा लिए कि वो आ जाय पर ....
अचानक नीचे कुछ लोगों का कोलाहल सुनाई पड़ा जो कि उसके घर के तरफ से आ रही थी , मै भाग के सीढ़ियों की तरफ लपका और लगभग दौड़ते हुए उसके घर के सामने जा के खडा हो गया |
दरवाजे पर कुछ लोग घबराए हुए खड़े थे दरव्वाजा अन्दर से बंद था और अन्दर से उसके तेज तेज चीखने की आवाज आ रही थी | मुझसे बर्दाश्त न हुआ और मै किसी कि परवाह किये बिना भाग कर दरवाजे से चिपक गया | घबराहट और क्रोध का मिश्रण लिए भाव मै गेट खुलने का इन्तेजार कर रहा था |
बाहर खड़े लोग मुझे देख रहे थे और मेरा दिल किसी अनहोनी की आशंका लिए जोर जोर धड़क रहा था |
उस सर्द मौसम में मेरे माथे पर पसीने छलछला आये थे | अचानक दरवाजा भड़ाक से खुला और मेरे करीब से एक आग का गोला गुजरा , मै सन्न रह गया वो आग कि लपटों में घिरी हुई थी औ बुरी तरह चिल्ला रही थी कि अचानक उसने मेरी तरफ देखा और और इस आस में कि मै उसे बचा लूँगा मेरी तरफ भागी |
मेरे पास आने के ठीक दो गज पहले वो गिर गयी और तड़पने लगी | मै किंकर्तव्यविमूढ़ होकर ये देखता रहा , ये सब मेरे आँखों के सामने हो रहा था और मै अपनी एक ऊँगली हिला पाने में असमर्थ था , मै स्तब्ध था वो तड़प तड़प के मेरे सामने मर गयी और मेरा शरीर सिर्फ एक बुत बन के रह गया | कुछ लोग मुझे खींच रहे थे फिर कुछ याद नही ............................
                           आँख खुली तो मै अपने घर में था कुछ लोग मुझे घेरे खड़े थे , वो मुझे रोकते मै बाहर निकल आया और ठीक उसी जगह मै जा खड़ा हुआ जहाँ अभी तक उसके जले मांस के टुकड़े जमीन में चिपके थे , बहुत ज्यादा भीड़ जमा थी और सबकी आँखे मुझे प्रश्नवाचक नगाहों से देख रही थी |
मै जमीन पर बैठ गया, तब तक एक वर्दीधारी पुलिस वाला आया और मुझे लगभग घसीटते हुए जीप में डाल दिया |
मै थाने पहुंचा जहाँ उसके बाप और भाई पहले से मौजूद थे , बाप बता रहा था ‘साब रात को मेरी बेटी देर से आई तो मैंने गुस्से में मार दिया ..उसका भाई भी पता नही क्या गिडगिडाने लगा था , रुक रुक के वो मेरी तरफ देख कर भी कुछ कहते थे | मेरी पलक भी बंद नही हो रही थी पता नही थानेदार मुझसे कुछ पूछने का असफल प्रयत्न कर रहा था | अब मेरे पास न तो कोई उत्तर था और न कोई सवाल , कुछ थप्पड़ भी बरसाए उसने और अंत में मुझे थक कर छोड़ दिया |
                         मै पैदल चला जा रहा था कहाँ ,पता नही ..पर हाँ मेरे पैर बिल्कुल ठीक पड़ रहे थे |मेरा गाँव छह किलोमीटर दूर पड़ता था , पुल से होकर गुजरा तो किसी मोटर साईकल ने ठोकर मार दिया , मै गिर गया ..और पड़ा रहा | बाइक वाला जा चुका था , कुछ लोगों ने उठने  में मेरी मदद की और मै फिर चल दिया | बहुत जोर कि ठण्ड लग रही थी पर माथे से पसीना आ रहा था , गर्म था , हाथ लगा क्र देखा तो खून था शायद मेरे सर में चोट लगी थी | मैंने चेहरा पोंछना जरुरी न समझा और चलता रहा जब तक कि मुझे थकान महसूस न होने लगी |
मै अपने गाँव का रास्ता छोड़ चुका था कि अचानक देखता क्या हूँ कि वो दूर धवल वस्त्रों में नजर आ रही है |
मैंने अपनी चाल तेज कर दी ,मै जल्द से जल्द उस से मिलना चाहता था |
शाम हो गयी थी वो मुझे अपने पीछे बुला रही थी और मै पागलों कि भांति दौड़ता जा रहा था | वो नदी के तरफ जा रही थी मैंने चिल्ला के बोलना चाह पर मेरे कंठ से स्वर नही फूटे |
वो मेरे करीब आती जा रही थी , हम दोनों नदी के किनारे पर थे केवल दो गज दूर थी वो | वो मुस्करायी ,   सफ़ेद कपड़ों में वो आज बला की खूबसूरत लग रही थी | वो धीरे से नदी में उतर गयी और मुझे मुस्कुरा के बुलाया और मै बढ़ता चला गया |
                             मै उसके बेहद करीब था , मै देख सकता था उसके चेहरे पर चोट का कोई निशान न था , मैंने बढ़ के उसके हाथों को थाम लिया ,उसके उँगलियों के चोट भी गायब थे |
मैंने उसके माथे को चूमा , मेरे दोनों पैरों ने जमीन छोड़ दिया | उसने अपने बाहें फैला दी , मेरी आँखे मुंदने लगी थी ...........उसके ठन्डे हाथ मेरे सिर पर थे , उसने मुझे अपने आगोश में ले लिया था और मै एक दम निश्चिन्त था ..................................................................................
                      
TRIPURENDRA OJHA 'NISHAN'
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