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30 March, 2013

Happy Father's Day





हर पिता चाहता है कि उसके बच्चे अच्छे इंसान बने. आमतौर पर हम सभी के बचपन में अपनी अनुशासनप्रियता सख्ती के चलते पिता हमें क्रूर नजर आते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और हम जीवन की कठिन डगर पर चलने की तैयारी करने लगते हैं, हमें अनुभव होता है कि पिता की वो डाँट और सख्ती हमारे भले के लिए ही थी।यह सामाजिक निष्कर्ष है। पिता बेटी को अधिक प्यार करते हैं और मां बेटे को। कारण साफ है। पिता को पता है कि बेटी पराया धन है। वह कुछ साल ही उनके पास रहेगी, जबकि बेटा सदा। बेटी की बिदाई की सोच में ही पिता की आंखें सावन-भादौ हो जाती है। बस एक ही बात निकलती है, बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिलें।बदलते समय के बदलते दौर में अब पिता की छवि बदल गई है। आज पिता अपने बच्चों के लिए केवल प्रेरणास्रोत बने हैं बल्कि जीवन में ऐसा मूलमंत्र दे रहे हैं जिसे जपकर उनके बच्चे कामयाबी की नई इबारतें लिख रहे हैं। पिता... यह शब्द सुनते ही जेहन में एक दृढ़ व्यक्तित्व की छवि उभरती है। ऐसा व्यक्ति जो हमारा सबसे बड़ा आदर्श होता है, मर्यादा जिसके रिश्ते की पहचान है।कहा जाता है कि फादर्स डे पहली बार एक अमेरिकी महिला सोनारा लुई स्मार्ट के मन विचार आया। सोनारा ने सोचा कि क्यों नहीं मदर्स डे की तरह फादर्स डे भी मनाया जाए। जिस दिन लोग अपने पिताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करें
सोनारा अपने पिता से बहुत प्रभावित थी। मां की छत्रछाया तो वह किशोरावस्था में ही खो चुकी थीं और उनके जीवन का अधिकांश भाग पिता के ही संरक्षण एवं सान्निध्य में बीता था।
सोनारा के पिता विलियम जैकसन स्मार्ट थे, जिन्होंने 1862 के अमेरिकी गृहयुद्ध में एक प्रमुख योद्धा के तौर पर कार्य किया था सोनारा की मां एलन विक्टोरिया स्मार्टका असामयिक निधन तब हो गया था जब वह करीब सोलह वर्ष की थीं उसके बाद उन्होंने अपने सभी छोटे भाइयों की परवरिश में अपने पिता का हाथ बंटाया था सोनारा ने अपने पिता के त्याग, प्रेम और साहस के प्रति अपनी श्रद्धा जताने के लिए उनके जन्मदिन, 19 जून 1810, पर सबसे पहला फादर्स डे का समारोह मनाया था. लेकिन मैं इस बात से १०० % सहमत नहीं हु की पिता के लिए केवल एक दिन ...........? 
त्रिपुरेन्द्र ओझा "नीशु"


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