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28 September, 2012

ईमानदारी को बनाएं हथियार

जानकारी और ज्ञान में वही फर्क है, जो आंख और प्रकाश में है। प्रकाश यानी दृष्टि। दृष्टि न हो तो आंख किस काम की और ज्ञान न हो तो जानकारियों का वजन भी मनुष्य की चाल को बिगाड़ देगा। इन बातों का असर हमारे दो अभियानों पर भी पड़ा। भ्रष्टाचार और अपराध, देश के ये दो कलंक बिंदिया बनकर चिपक गए। जब दुर्गुण ही शृंगार बन जाए, तब चेहरे को विकृत होना ही है। भ्रष्टाचार मिटेगा ईमानदारी से। हमारे पास ईमानदारी जानकारी की शक्ल में है, ज्ञान के रूप में नहीं। इसलिए ईमानदारी को समझदारी से जोडऩा होगा। एक गहरी समझ के साथ इसे शस्त्र बनाकर बेईमानों पर प्रहार करना होगा। लोगों ने ईमानदारी को ढाल बना लिया, अब हथियार बनाना होगा। इसी तरह अपराध के मुकाबले के लिए जिम्मेदारी को बहादुरी से जोडऩा होगा। कर्तव्यनिष्ठ लोग साहस दिखाने के मामले में रिजर्व हो जाते हैं। यह बिल्कुल ऐसा है कि हमारे पास जिम्मेदारी की आंख है, पर बहादुरी की दृष्टि नहीं। अंधे होकर आखिर कितनी लंबी यात्राएं कर पाएंगे। इसीलिए बेईमानों की जानकारी भी ईमानदारों के ज्ञान पर भारी पड़ जाती है और अपराधियों की दृष्टि जिम्मेदारों की आंख पर हावी हो जाती है। आध्यात्मिकता ही इस गड़बड़ाए तालमेल को ठीक कर पाएगी।

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27 September, 2012

मुसीबत में शरीफ़ों की शराफ़त

मुसीबत में शरीफ़ों की शराफ़त कम नहीं होती,
करो सोने के सौ टुकडे तो क़ीमत कम नहीं होती.
मुझे बचपन में ये सीख दी है मेरी मम्मी ने,
बुज़ुर्गों की दुआ लेने से इज्ज़त कभी कम नहीं होती.
जरूरतमंद को कभी देहलीज से ख़ाली ना लौटाओ,
भगवन के नाम पर देने से दौलत कम नहीं होती.
पकाई जाती है रोटी जो मेहनत के कमाई से,
हो जाए गर बासी तो भी लज्ज़त कम नहीं होती
याद करते है अपनी हर मुसीबत में जिन्हें हम
गुरु और प्रभु के सामने झुकने से गर्दन नीचे नहीं होती

जय हिंद ... वन्देमातरम .....
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