Blockquote

Followers

02 August, 2012

सुरमन- एक मां ऐसी जो ..........

अपने लिए जीएं तो क्या जीएं, ए दिल तू जी जमाने के लिए...कुछ इसी तरह का जज्बा इन दिनों हर देशवासी के दिल में पनप रहा है। सभी लोग बढ़- चढ़कर देश के लिए बहुत कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए आगे बढ़ने की चाहत रखते हैं। शहर में कई ऎसे लोग हैं, जिन्होंने कभी किसी के साथ की जरूरत महसूस नहीं की और आगे बढ़ते चले गए। आज उन्होंने साबित कर दिया है कि हम सभी में एक हीरो है। मतलब अगर समाज के लिए आप कुछ करना चाहते हैं तो कदम बढ़ाइए, दिशा अपने आप बनती चली जाएगी।
मां कौन होती है जो सिर्फ जन्म दे या फिर वो जो जीवन दे। जयपुर में एक मां ऐसी भी है जो ऐसे को बच्चों को जीवन दे रही है जिनका इस दुनिया में और कोई नहीं। वह हैं  मनन चतुर्वेदी..........
यशोदा बनकर मां के आंचल में छिपाना आसान काम नहीं है लेकिन मनन चतुर्वेदी को देखकर खुद यशोदा भी हैरान हो सकती है। मनन एक नहीं दो नहीं बल्कि कई  बच्चों की मां है।वो  जब  13 साल की थी तो अपनी मम्मी-पापा के साथ घूमने जा रही थी एक 13 साल का बच्चा उनके  पास भीख मांगने के लिए आया। वह उनके  जीवन का एक ऐसा हादसा था जिससे उन्हे  लगा कि हमारे पास सब कुछ है लेकिन इनके पास कुछ नहीं। उस दिन ने उनकी  जिंदगी में ऐसा बदलाव आया  कि आज वह कई  बच्चों की मां हैं । बच्चो के लिए उन्होने "सुरमन संस्थान" बनाया है , जहा बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ कई चीजे सीखते है ।  वो बताती है की - कुछ साल पहले फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद दिल्ली से आ रही थी, तभी एक जगह कूड़े के ढेर के पास एक बच्ची को खराब खाना खाते देखा। इस घटना ने मन को अंदर तक कचोट दिया। खुद से सवाल किया, जब लोगों के पास पहनने के लिए कपड़े ही नहीं तो मैं कपड़े डिजाइन आखिर किसके लिए करना चाहती हूं, यह कहना है सुरमन संस्थान की सैक्रेट्री मनन चतुर्वेदी का। वे बताती हैं, इस समय मैं करीबन 66 बच्चों की मां हूं। ये बच्चे मुझे मम्मी और एंजिल ऑफ लव कहकर पुकारते हैं। मेरे लिए यह बड़ी बात नहीं है कि मैंने इन्हें अपनाया है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि इन्होंने मुझे अपनी मां की जगह दी है। आठ- नौ साल पहले जब सुरमन संस्थान शुरू किया था, तब कोई भी साथ नहीं था। लेकिन आज हमारे साथ कई लोग जुड़ चुके हैं, जो वॉलिएंट्री हमारी हैल्प करते हैं।
शुभकामना कार्ड छपाना, हस्तनिर्मित वस्तुओं की बिक्री, बोगन वेलिया नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन और चित्र बनाना जैसे कामों से होने वाली आय से पालना का खर्च चल रहा है। मनन के इस कार्य में कई दानदाताओं ने भी सहयोग दिया है।  वह सुरमन ग्राम का निर्माण करने की ओर अग्रसर हैं। जहां बच्चे, परित्यक्त महिलाएं एवं बेघर स्वाभिमान की जिंदगी जी सकें एवं खुली हवा में सांस ले सकें।


अच्छा लगने पर ब्लॉग समर्थक बनकर मेरा उत्साहवर्द्धन एवं मार्गदर्शन करें | 
vmwteam@live.com 
+91-9024589902 +91-9044412246
Loading...