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27 June, 2012

गुम हुए नेताजी

विजय पाण्डेय 
आजाद हिन्द फौज के जरिए अंग्रेजों की नाक में दम कर देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का सच आज भी सामने नहीं आ पाया है और यह रहस्य साधु-संन्यासियों के मिथकों तथा गोपनीय फाइलों में गुम हो गया है।बता रहे है विजय पाण्डेय ..........
 कहा जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ऊपर हुए एक विमान हादसे में भारत के इस महान सपूत की मौत हो गई थी लेकिन इस कहानी पर बहुत से सवालिया निशान है। मिशन नेताजी से जुड़े अनुज धर ने जब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सरकार से नेताजी की कथित मौत से संबंधित फाइल मांगी तो इसे देने से इंकार कर दिया गया। नेताजी के रहस्य पर पुस्तक लिख चुके अनुज धर का मानना है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ऊपर विमान हादसे और उसमें नेताजी की मौत की कहानी मनगढ़ंत है तथा ऐसा कोई सबूत नहीं है जो इसकी पुष्टि करता हो। उनका आरोप है कि नेताजी की मौत का सच जानबूझकर छिपाया जा रहा है। आजाद हिन्द फौज में शामिल रहे बहुत से सैनिक और अधिकारी दावा कर चुके है कि विमान हादसे में नेताजी की मौत नहीं हुई थी और वह आजादी के बाद भी जीवित रहे। उनका कहना है कि सुभाष चंद्र बोस आजादी के बाद देश में जन्मी घटिया राजनीति की वजह से सामने नहीं आ पाए और उन्होंने गुमनामी का जीवन जीना ही श्रेष्ठ समझा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कथित मौत की जांच के लिए बनाई गई शाहनवाज समिति ने जहां विमान हादसे की बात को सच बताया था, वहीं इस समिति में शामिल नेताजी सुभाष चंद्र के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और कहा था कि विमान हादसे की घटना को जानबूझकर सच बताने की कोशिश की जा रही है। 1999 में गठित मुखर्जी आयोग ने 18 अगस्त 1945 को विमान हादसे में नेताजी की मौत को खारिज कर दिया तथा कहा कि इस मामले में आगे और जांच की जरूरत है। आयोग ने आठ नवम्बर 2005 को अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सौपी थी। 17 मई 2006 को इसे संसद में पेश किया गया जिसे सरकार ने मानने से इंकार कर दिया ।
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विजय पाण्डेय 
विनायक नर्सरी (VINAYAK NURSERY), जयपुर 
+91-8952021604
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