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30 May, 2012

तेरी औकात भी है मेरी तरफ देखने की?

दानदाता ने एक रूपए का सिक्का फेंका तो वह बजाए भिखारी के डिब्बे में गिरने के सड़क पर जा गिरा। भिखारी ने दानदाता को दुआएं देते हुए सिक्का उठाकर डिब्बे में डाल लिया। तभी कहीं से हंसने की आवाज आई, खिलखिलाकर हंसने की! एक रूपए के सिक्के ने क्रोध से चौंककर आसपास देखा तो उसे पास की दुकान के शानदार शो-केस में रखा पांच सौ रूपए का नोट दिखा, खिलखिलाकर हंसता हुआ!  'गुस्से से क्या देख रहा है।' पांच सौ रूपए का नोट गर्वोक्ति से बोला 'तेरी औकात भी है मेरी तरफ देखने की? और जहां तक हंसने का सवाल है तो भिखारी को दी जाने वाली चीज सड़क पर गिर जाए तो हंसी आ ही जाती है।'
'कोई बात नहीं, हंस लो, खूब हंस लो' एक रूपए के सिक्के ने शांति से जवाब दिया 'पर जरा बाद में अपने बारे में भी सोच लेना। हमें पाकर भिखारी दाता को दुआएं ही देता है। हमें या दाता को शक की नजर से नहीं देखता, हमारी असलियत नहीं परखता।'
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