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01 April, 2012

प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी..

नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा.। गोस्वामी तुलसीदास जी का भगवान श्रीराम के प्राकट्य के दिन का यह वर्णन शनिवार को रामनगरी के चौराहों से लेकर गलियों तक में गुंजायमान होता रहा। मध्याह्न ठीक बारह बजे भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी.. की ध्वनि कनक भवन व गोकुल भवन समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में सुनाई दी। श्रद्धालुओं के भक्तिकलश से रह-रह कर टपकते, छलकते श्रद्धा के भाव जयकारे के रूप में गुंजायमान रहे। सचमुच अयोध्या में जैसे सब कुछ ठहरा सा और चहुंओर राम ही राम.।

सत्य प्रकाश सोनकर

प्रवक्ता बी.एड विभाग ,
आई.एल.ए.एस. कॉलेज ,
गढ़मुक्तेश्वर 
अयोध्या में श्रीराम के जयघोष के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लास में डूबे श्रद्धालुओं की श्रद्धा फलीभूत होती दिखी। मध्याह्न 12 बजते ही सोहर व बधाइयों की धुन के बीच श्रीराम का प्राकट्य एक बार पुन: हुआ। कनक भवन के गर्भगृह का पर्दा खुलते ही युगल सरकार की दिव्य मनोहर झाकी ने अपनी करुणा बरसाते हुए सभी को आह्लादित कर दिया। भये प्रकट कृपाला दीन दयायाला.. व नव कंज लोचन कंज, मुख कर कंज पद कंजारुणम् जैसी स्तुतियों के बीच श्रद्धालु रोमाचित हो उठे।
चैत्ररामनवमी मेले के मुख्य आकर्षण श्रीराम का जन्मोत्सव पर कनक भवन में भक्ति और उत्साह का अटूट संगम देखा गया। टीकमगढ़ ओरछा से आए कलाकारों की टोली ने पारंपरिक लोकधुन और गीतों से माहौल को पूरी तरह भक्ति के रस में डूबों दिया। ओरछा के महराज मधुकर शाह जू देव ने सबसे पहले विग्रह का पूजन अर्चन किया उसके बाद भक्तों ने पूजन किया। ऐसी मान्यता है कि कनक भवन को माता कैकेयी ने सीता जी को मुंह दिखाई में दिया था। मौजूदा मंदिर ओरछा [मध्य प्रदेश] की महारानी ने बनवाया था। श्रीकालेराम मंदिर व वशिष्ठ भवन मंदिर जानकी महल मंदिर में भी शनिवार को श्रीरामजन्मोत्सव पर भक्तों का उल्लास चरम पर रहा। युगल सरकार की छवि निहारने को भक्तों का उल्लास देखते ही बन रहा है। हर आम ओ खास बस राममय और जन्म की पद्य में डूबा नजर आया। युगल सरकार की झाकी को निहारती भक्तों की आखें मानों राम को हमेशा के लिए बसा लेने का मन बनाए हो।

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Saty Prakash Sonkar 

ILAS College,

Garhmukteshwar  

 
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