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27 April, 2012

2,900 करोड़ रूपए का शौचालय घोटाला

उत्तर प्रदेश घोटालों का प्रदेश बन चुका है। एनआरएचम घोटाले से लेकर जमीन घोटाले तक केवल घोटाले और भ्रष्टाचार। प्रदेश में अब एक नया घोटाला सामने आ रहा है, शौचालय घोटाला। यह वाकई में शर्मनाक है।
केंद्र सरकार की ओर से संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शौचालय बनाए जाने थे। उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय को बताया गया कि प्रदेश में 1.71 करोड शौचालयों का निर्माण करवाया गया है। लेकिन घरेलू जनगणना आंकड़ों में सामने आया कि प्रदेश में केवल 55 लाख ग्रामीणों के घर में ही शौचालय है। इससे साफ है कि उत्तर प्रदेश के 1.16 करोड़ ग्रामीणों के घर में शौचालय नहीं है।
पूर्ण स्वच्छता अभियान की शुरूआत वर्ष 1999 में हुई थी, जिसके तहत वर्ष 2017 तक संपूर्ण भारत को गंदगी मुक्त बनाना है। उत्तर प्रदेश में इस योजना की शुरूआत वर्ष 2002 में हुई। इस योजना के तहत समाज के विभिन्न वर्गों को अपने घरों में स्थायी शौचालय बनवाने के लिए सब्सिडी दी गई। वर्ष 2002 में यह सब्सिडी राशि 600 रूपए थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 4,500 रूपए कर दिया गया। एक नए शौचालय का निर्माण 2,500 रूपए में हो सकता है, जिसके आधार पर इस योजना में 2,900 करोड़े के हेरफेर की आशंका है।
टोटल सेनिटेशन कैंपेन के आंकड़ों की मानें तो उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में मात्र 17.50 प्रतिशत लोगों के घर में शौचालय नहीं है। जबकि जनसंख्या विभाग के आंकड़ों के अनुसार 78 प्रतिशत लोग शौचालय की सुविधा से महरूम हैं। टोटल सेनिटेशन कैंपेन के ऑनलाइन डाटा के अनुसार उत्तर प्रदेश के केवल दो जिलों लखीमपुर खीरी और फर्रूखाबाद में 100 फीसदी घरों में शौचालय हैं। इन आंकडों को भी जब जनसंख्या विभाग के आंकड़ों से क्रॉसचैक किया गया तो मालूम चला कि 2011 की जनसंख्या रिपोर्ट के आधार पर इन जिलों में 81.7 प्रतिशत और 76.10 प्रतिशत घरों में शौचालय हैं।
शौचालयों की संख्या के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए इस आकलन की चपेट में प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी शामिल है। टीएससी रिपोर्ट्स के आधार पर लखनऊ के 89.84 प्रतिशत लोगों के घरों में शौचालय है, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या मात्र 65.6 प्रतिशत है।
ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमेन एसोसिएशन की सेकेट्री मधु गर्ग इस मामले में कहती हैं "उत्तर प्रदेश के अधिकांश ग्रामीणों के घरों में शौचालय न होने की बात से यह जाहिर है कि प्रदेश में महिलाओं की स्थिति कैसी है। अधिकतर महिलाओं को सुबह के समय खेतों में जाना पड़ता होगा और अगर बदकिस्मती से किसी महिला की तबियत खराब हो गई तो उसपर मुसीबतों का पहाड़ टूट जाता होगा। "
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