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07 February, 2012

पति-पत्री ही एक दूसरे को चुनावी मैदान में चुनौती दे रहे हैं।

कहते हैं कि सियासत में रिश्ते बेमानी हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसकी मिसाल सिद्धार्थनगर जिले में देखने को मिल रही है। यहां पति-पत्री ही एक दूसरे को चुनावी मैदान में चुनौती दे रहे हैं।VMW Team के टी.के.ओझा "निशु" की एक रिपोर्ट...
सिद्धार्थनगर जिले की शोहरतगढ़ विधानसभा सीट से रविंद्र चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के टिकट पर पिछला चुनाव जीत चुके रविंद्र का मुकाबला इस बार अपनी ही पत्री साधना चौधरी से है, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार हैं। रविंद्र पूर्व में दो बार भाजपा के टिकट से भी विधायक रह चुके हैं।
तब साधना उनके साथ चुनाव प्रचार में अहम भूमिका अदा करती थीं, लेकिन करीब दस वर्षों से दोनों अलग-अलग रहते हैं। साधना ने कहा कि वह भाजपा उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस, सपा और बसपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। वैसे भी चुनावी जंग, दलों के बीच होती है, व्यक्तियों के बीच नहीं।
एक बार जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकीं साधना से जब पति से रिश्तों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में बात न करने का आग्रह करते हुए कहा कि वह विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रही हैं, और इस बार शोहरतगंढ़ की जनता भाजपा को जिताने का मन बना चुकी है, क्योंकि वह समझ चुकी है कि भाजपा शासन में ही पिछड़ों का हक सुरक्षित रह सकता है।
शोहरतगढ़ कुर्मी बाहुल्य सीट है। इसलिए भाजपा ने सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के कुर्मी उम्मीदवार की पत्री को ही मैदान में उतार दिया है। पति-पत्री की जंग ने जहां सीट का चुनावी समीकरण बदल दिया है, वहीं दूसरे दल इसका फायदा लेने की फिराक में हैं।
अन्य दलों को लगता है कि कुर्मी मतदाताओं के दम पर जीत दर्ज कराने वाले रविंद्र चौधरी के वोट बैंक में उनकी पत्री व भाजपा उम्मीदवार सेंध लगा सकती है, और इसका फायदा उन्हें मिल सकता है। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने मुस्लिम उम्मीदवार मुमताज अहमद और समाजवादी पार्टी(सपा) ने लाल मुन्नी सिंह को मैदान में उतारा है। शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर पहले चरण में बुधवार को मतदान होना है।
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