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14 February, 2012

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13 February, 2012

बढती हुई मंहगाई का जिम्मेदार कौन है ?

अनुज
देश में मँहगाई बढ रही है , लोगों का जीना मुश्किल हो गया है , इस तरह की उक्ति हम आये दिन सुनते रहते है | संसद के हर सत्र में इस मुद्दे पर गतिरोध बना रहता है | राजनैतिक पार्टियाँ पक्ष – विपक्ष की भुमिका में अपनी जोर-आजमाईश करती नजर आती हैं पर ले-दे के मुद्दा ही गौण रह जाता है | फिर अगले सत्र की आस लग जाती है पर सवाल उठता है कि बढती हुई मंहगाई का जिम्मेदार कौन है ? बता  रहे है अनुज जी ....
इस सवाल के जबाव में हमारे प्रधानमन्त्री कहते हैं कि महंगाई भारतीय लोगों की समृद्धि का प्रतीक है | अर्थशास्त्री मनमोहन जी को लगता है कि उनके द्वारा बनायी गयी हरेक नीति अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है | इसीलिये तो मौका मिला ना कि हाजिर हो जाते हैं एक नये बिल के साथ पर सरकार को कोई तो बताये कि नया बिल बनाने से बेहतर है कि पुरानों को सही कार्य दिशा मिले । हाल ही में एफडीआई जैसे बिल इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं । अब बात जब मंहगाई पर चल रही है तो चर्चा इसके प्रत्यक्ष प्रभाव पर भी हो जाये , भारत में रहने वाले अधिकतर लोग मंहगाई से त्रस्त तो हैं लेकिन मँहगाई से जो समाप्ति की कगार पर हैं वो वर्ग ६०फीसदी से अधिक है , गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले इन लोगों के लिये दो वक्त की रोटी के लिये भी मशक्कत करनी पड रही है , भोजन जो कि मानव की प्राथमिक जरुरत है , के अभाव में दम तोडने वालों की संख्याँ दिन – प्रतिदिन बढती जा रही है ।
वहीं एक दूसरा वर्ग भी है जिसे मंहगाई की परवाह तो है पर दूसरे रुप में । इन्हें आज तक भले – बुरे , ऊँच – नीच की सही परख नहीं है , इनकी बातें बाज़ारों में खरीदारी की होती हैं , बाज़ार में रोज कारों की कीमत में इजाफा हो रहा है , कम्पनियाँ रोज नये माडल बनाकर कीमत टाइट कर रही हैं पर वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम के अनुसार नवंबर २०‍१‍१ में कारों की बिक्री भारत में ७ फीसदी बढकर ‍१७‍१,‍१३‍१ इकाई हो गयी जबकि मोटरसाइकिलों की बिक्री २३ फीसदी बढकर ८,६९,०७० इकाई हो गयी । सियाम के अनुसार बाज़ार में घरेलु कार बिक्री में तेजी आयी है । ये आँकडें इस भारतीय मानसिकता को दर्शाने के लिये काफी हैं , अगर ये कार खरीदने जाते है तो भले ही उसका दाम प्रतिदिन आसमान को छूता जाये इनकी नाक – भौं नहीं सिकुडेगी पर अगर किसानों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की कीमतों में जरा सी वृद्दि की भनक लग गयी कि लगे हाय – तौवा मचाने , बाज़ार में यदि ५० पैसे का कोला ‍१० रुपये में बिक रहा है तो ये चाव से पीयेंगे ही मित्रों को भी इनवाइट करेंगे , कोई मोल -भाव नही प्रिंट की कीमत अदा करने में लेकिन सब्जी की खरीदारी में सब्जी – वाले से मोल भाव करेंगे आखिर ऐसा क्यों ? ये लोग ५ स्टार की पार्टियों में एक-एक प्लेट खाने की कीमत पाँच सौ से हज़ार में देते हैं लेकिन घर के लिये खरीदे गये चावल में मंहगाई की बू आती है इन्हें ।
खाद्य पदार्थों की बढती कीमतों के लिये वर्तमान अर्थव्यवस्था को जिम्मेदार ठहराएं या सरकारी नीतियों को और प्रबंधन की खामियों को ? जिम्मेदार कोई भी हो पर सबसे ज्यादा घाटा तो किसानों को ही उठाना पड़ता है यह दबा-कुचला तबका ऊपज तो अपनी मेहनत – मशक्कत और सामर्थ्य के बल पर करता तो है पर उसकी उपज की कीमत बाजार तय करती है । एक छोटा किसान जो कि प्रतिदिन थैले में अनाज लेकर मंडी जाता है तो राशन – पानी का जुगाड होता है , भला उसे अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति जैसे कठिन शब्दों से क्या वास्ता, उसे तो गृहस्थी का सामान कैसे जुटाना है इसके लिए भी सोचना पड़ता है। आज चावल बाज़ार में ३० रुपये किलो मिल जाता है पर किसान के यहाँ से ‍महज १०-‍१२ रुपये प्रति किलो खरीदा जाता है | इस अंतर के बाबजूद किसान तो अपनी ऊपज के बाद बाज़ार पर ही निर्भर रहते हैं , बाज़ार जहाँ कि बिचौलियों और कालाबाज़ारियों की चलती है वहाँ से इनको लुटे – पिटे ही घर लौटना पड़ता है | जहां तक बात सरकारी नीतियों की है तो भारत में नीतियों के क्रियान्वयन में घोर अनियमितता व्याप्त है और इसी के कारण आज तक कृषकों को उनका सही स्थान नहीं मिल सका है | बाज़ार में व्याप्त कालाबाजारी और जमाखोरी ने किसानों की हालत खस्ती कर दी है | ज्यादातर किसान या तो खेती करना नही चाहते या फिर करते हैं तो उन्हें उचित लाभांश नहीं मिल पाता है | किसानों के हित में उचित समर्थन मूल्य की कमी ने इन बिचौलियों को पैर पसारने की खुली अनुमति दे रखी है |
भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है , ऐसे में ना केवल भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार की गुंजाईश कृषि क्षेत्र पर निर्भर है बल्कि एक बडे वर्ग को खाद्य की उपलब्धता को कृषि क्षेत्र ही सुनिश्चित कर सकता है | खाद्य पदार्थो का उचित वितरण ही इस समस्या को निर्मूल करने में सहायक होगा ।जन वितरण प्रणाली में न सिर्फ मिटटी के तेल बल्कि बहुत सारे खाद्य सामग्रियां भी उपलब्ध कराई जाती रही है पर या तो ये योजना बंद कर दी गयी या भ्रष्ट तन्त्र का हिस्सा बन चुकी हैं | यह अभी के समय में निचले स्तर की भ्रष्ट प्रणाली का एक बड़ा पर्याय है इसको दुरुस्त करना सरकार की अहम जिम्मेदारी होनी चाहिए ताकि गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे लोगों के लिए उचित मूल्य पर भोजन की उपलब्धता हो |

यूपी ने देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री........

 



यूपी में जातियों के ब्लूप्रिंट पर नजर डालें तो प्रदेश में 49 जिले ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा संख्या दलित मतदाताओं की है. कुछ जिले छोड़ दें तो बाकी जगहों पर दलित दूसरा सबसे बड़ा वोट बैंक है. वहीं 20 जिले ऐसे हैं, जहां मुस्लिम वोटर सबसे ज्यादा हैं और 20 जिलों में वे दूसरा सबसे बड़ा वोट बैंक है

अगड़ी जाति

16 फीसदी वोट बैंक
ब्राहमण – 8 फीसदी
ठाकुर – 5 फीसदी
बनिया – 3 फीसदी

पिछड़ी जाति

35 फीसदी वोट बैंक
यादव – 13 फीसदी
कुर्मी – 12 फीसदी
अन्य – 10 फीसदी

इसके अलावा

दलित – 25 फीसदी
मुस्लिम -18 फीसदी
जाट – 5 फीसदी
और अन्य – 1 फीसदी

कहते हैं यूपी देश की राजनीती की दशा और दिशा तय करता है लेकिन 18 मंडल, 75 जनपद, 312 तहसील, 80 लोकसभा, 30 राज्यसभा के साथ 403 सदस्यीय विधानसभा वाला यह राज्य बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा है | विकास कहीं पीछे छूट गया है और जाने-अनजाने में यह सूबा धर्म व जाति आधारित राजनीति की प्रयोगशाला बन गया है। जिस यूपी ने देश को सर्वाधिक आठ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर और अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में दिए हों, वहां धर्म व जाति आधारित राजनीति का बोलबाला है |  और यही यूपी और इस देश का दुर्भाग्य है |

11 February, 2012

सलमान का मुंह बंद करवाओ महामहिम

नोटिस और फटकार के बावजूद भी केंद्रीय कानून मंत्री की मुसलमानों के लिए आरक्षण पर बयानबाजी जारी रहने पर अब चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सलमान खुर्शीद के मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
अपने पत्र में चुनाव आयोग ने कहा है कि नोटिस और फटकार लगाए जाने के बावजूद कानून मंत्री की बयानबाजी जारी है ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति को दखल देना चाहिए।
गौरतलब है कि मुस्लिम आरक्षण पर दिए गए बयान को लेकर चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद को फटकार लगाई थी लेकिन इसके बावजूद भी सलमान खुर्शीद की इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी रही।

सलमान ने अपने ताजा बयान में कहा है कि वो मुसलमानों को आरक्षण दिलवाने के लिए फांसी पर चढ़ने को भी तैयार हैं। सलमान  ने चुनाव आयोग को चुनौती देते हुए यह भी कहा है कि चुनाव आयोग रहे न रहे लेकिन मुसलमानों को आरक्षण मिलकर रहेगा।
सलमान के इस बयान के बाद ही चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कानून मंत्री सलमान खुर्शीद की शिकायत की है। पत्र में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने के लिए कहा है।
सलमान खुर्शीद के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कानून मंत्री डंके की चोट पर गैर कानूनी काम कर रहे हैं। अब प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

शनि की अशुभ स्थिति से मुक्ति और बचाव

शनि की अशुभ स्थिति से मुक्ति और बचाव के लाल किताब पर आधारित कुछ टोटके प्रस्तुत हैं। इन टोटकों का प्रयोग निष्ठापूर्वक किया जाए तो अनुकूल फल की प्राप्ति हो सकती है।
शनि जब शुभ होगा तब मकान के स्वामी व निवासी को सुख मिलेगा। शनि के अशुभ होने पर मकान से संबंधित परेशानी होती है और गृहस्वामी, गृहस्वामिनी और संतान को कष्ट झेलना पड़ता है। किरायेदार द्वारा मकान पर कब्जा, फैक्ट्री या दुकान कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी, चोरी, या हानि पहुंचाना, न्यायालय द्वारा कुर्की, प्रशासन व महापालिका द्वारा अनेक प्रकार की आपत्तियां आदि समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
---शनि लग्नस्थ हो और मकान बनवाया जाए तो यह धन और परिवार के लिए अशुभ होगा। निर्धनता, कुर्की, पैतृक संपत्ति के नाश होने आदि की संभावना रहती है। व्यक्ति धोखेबाज, अशिक्षित, बेईमान, झगड़ालू, नेत्रहीन और अल्पायु हो सकता है। उसे संतान सुख की संभावना भी कम रहती है ।
उपाय:
1-मद्यपान व मांस का सेवन न करें।
2-वीरान जगह पर भूमि के नीचे सुरमा दबाएं।
3-बरगद के वृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाकर गीली मिट्टी का तिलक लगाएं, विद्या में बाधा व रोग से मुक्ति मिलेगी।
4-धन वृद्धि के लिए बंदर पालें अथवा शनिवार को बंदर को खाना दें।
5-लोहे के तवे, चिमटे व अंगीठी का दान करें।
---शनि अगर दूसरे भाव में अशुभ हो तो मकान अपने आप बनेगा। परंतु आपत्ति हानिकारक होगी। यदि शनि दूसरे में और राहु 12वें में हो तो ससुराल में धन की कमी होती है। यदि गुरु 11वें में हो तो अपयश मिलेगा। यदि दूसरे भाव में शनि के साथ मंगल अशुभ हो तो जातक 28 से 39वें वर्ष तक रोगी रहेगा।
उपाय:
1-प्रत्येक शनिवार नंगे पांव मंदिर जाकर क्षमा याचना करें।
2-शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
3-काली या दोरंगी भैंस, कुत्ता व अन्य कोई जानवर न पालें।
4-अपने माथे पर कभी तेल न लगाएं।
5-गाय के दूध या दही का तिलक लगाएं।
---शनि जन्मकुंडली के तृतीय भाव में अशुभ स्थिति में हो तो धन का अभाव या हानि कराता है। जातक को नेत्र रोग होगा या दृष्टि कमजोर होगी रोमकूपों में रोएं अधिक हों तो जातक निर्धन, अयोग्य व अय्याश होगा। शनि तीसरे व चंद्र 10वें में हो तो अवैध ढंग से धनार्जन करने के बावजूद जातक धनहीन रहेगा और उसके घर का कुआ अथवा घर ही मौत का कारक बनेगा। तीसरे भाव स्थित शनि के शत्रु ग्रह साथ हों तो जातक समस्याओं व धनहानि से परेशान रहेगा। यदि सूर्य भाव 1, 3 या 5 में हो तो लड़का व शनि का अशुभफल मिलेगा।
उपाय:
1-फकीरों और पालतू व कुत्तों की सेवा करें, या तीन कुत्तों की सेवा करें तो मकान बनेगा।
2-घर में कुत्ता सदैव पालें अन्यथा शनि व केतु का अशुभ फल मिलेगा।
3-केतु का उपाय करने पर धन संपत्ति बढ़ेगी।
4-घर की दहलीज को लोहे की कीलों से कीलें।
5-नेत्रों की औषधि मुफ्त बांटने से दृष्टिदोष दूर होगा।
6-भवन के अंत में अंधेरी कोठरी बनाना धन संपत्ति के लिए शुभ होगा।
7-मांस या शराब का सेवन यदि आप नहीं करेगे तो दीर्घ आयु होगी।
---शनि जन्मकुंडली के चतुर्थ भाव में अशुभ हो तो माता, मामा, दादी, सास और नानी पर अशुभ प्रभाव पड़ेगा। अर्थात मकान की नींव खोदते ही ससुराल और ननिहाल पर अशुभ प्रभाव पड़ना शुरू हो जाएगा या जातक को अपने बनाए मकान का सुख प्राप्त नहीं होगा। ऐसे जातकों को प्लाॅट लेकर मकान नहीं बनवाना चाहिए। परस्त्री से संबंध बनाने पर शनि का अशुभ फल मिलता है। शनि चैथे व गुरु तीसरे में हो तो धोखे व लूटपाट से संपत्ति बढ़ेगी। मकानों के कारोबार से लाभ मिलेगा।
उपाय:
1-सांप को दूध पिलाएं।
2-कौओं को छत पर रोटी डालें।
3-भैंस पालें या उसे प्रिति दिन रोटी खिलायें।
4-मजदूर से अतिक्ति सेवा लेने का प्रयास न करे।
5-कुएं में कच्चा दूध डालें।
6-परस्त्री अथवा विधवा से संबंध रखें अन्यथा निर्धन और कंगाल हो जाएंगे।
7-बहते पानी में शराब बहाएं।
8-रोग से मुक्ति हेतु शनि की वस्तुओं का प्रयोग करें।
9-सांप को न मारें।
10-शराब न पीएं।
11-रात्रि में दूध न पीएं।
---शनि जन्मकुंडली के पंचम भाव में हो तो मकान बनवाने पर संतान को कष्ट होगा। संतान का बनाया मकान जातक को शुभ फल देगा। संतान को यदि मकान बनवाना पड़े तो जातक की 48 वर्ष की आयु के बाद ही बनवाएं। संतान के बनाए मकान में वहम न करें। शनि पांचवें भाव में हो और वर्ष कुंडली में जब भी सूर्य, चंद्र और मंगल 5 वें में आएंगे तब जातक का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा। जातक के तन पर बाल अधिक हों तो वह चोर, धोखेबाज और दुर्भाग्यशाली होगा। कलम पर काबू होने पर भी निर्धन रहेगा। रोग, मुकदमे व झगड़ों से परेशान रहेगा। धन की हानि और संतान को कष्ट होगा साथ ही स्वास्थ्य खराब रहेगा और गुलामी करनी पड़ेगी।
उपाय:
1-पैतृक भवन की अंधेरी कोठरी में सूर्य की वस्तुएं गुड़, तांबा, भूरी भैंस, बंदर, मंगल की वस्तुएं सौंफ, खांड, शहद, लाल मूंगे, हथियार और चंद्र की वस्तुएं चावल, चांदी, दूध, कुएं, घोड़े आदि की व्यवस्था करें।
2-अपने भार के दशांश के तुल्य बादाम बहते पानी में बहाएं या धर्मस्थल में ले जाकर आधे बादाम घर में रखें, उन्हें खाएं नहीं।
3-संतान के जन्म लेने पर मीठा न बांटें, यदि बांटंे तो उसमें नमक लगा दें।
4-कुत्ता पालें।
---शनि जन्म कुंडली के षष्ठ भाव में अशुभ स्थिति में हो तो जातक अपनी आयु के 36 बल्कि 39 वर्ष बाद मकान बनाए तो शुभ होगा। 48 वर्ष की आयु के बाद बनाना लड़की के ससुराल के लिए अशुभ होगा। ऐसे जातकों को नुक्कड़ का मकान न तो बनवाना चाहिए और न ही खरीदना चाहिए। शनि की वस्तुएं (चमड़े व लोहे की वस्तुएं) घर पर लाना या सजाना अशुभ होगा। जिस वर्ष वर्ष कुंडली में भी छठे भाव में आए, उस वर्ष राज्यभय, दुख व अशुभ फल मिलेंगे। शराब व मांस का सेवन हानिकारक होगा। 28 से पूर्व विवाह करने पर 34 से 36 वर्ष के बीच माता व संतान शोक होगा तथा कष्ट बढ़ेंगे।
उपाय:
1-तेल में अपना मुंह देखकर सरसों के तेल का भरा बर्तन पानी के भीतर जमीन के नीचे दबाएं।
2-शनि संबंधी कार्य कृष्ण पक्ष में रात्रि में करें।
3-सांप की सेवा (दूध पिलाने) से संतान सुख मिलेगा।
4-नारियल या बादाम बहते पानी में प्रवाहित कराएं।
5-बुध का उपाय करें।
6-काला कुत्ता पालें या उसकी सेवा करें या उसे रोटी दें।
**********************
आप अपने विचारो से अवगत अवश्य करायें।

सदा-शिव-कवचं

।श्रीदेवी उवाच।।
भगवन् देव-देवेश ! सर्वाम्नाय-प्रपूजित !
सर्वं मे कथितं देव ! कवचं न प्रकाशितम्।।१
प्रासादाख्यस्य मन्त्रस्य, कवचं मे प्रकाशय।
सर्व-रक्षा-करं देव ! यदि स्नेहोऽस्ति मां प्रति।।२
।।श्री भगवानुवाच।।
विनियोगः- ॐ अस्य प्रासाद-मन्त्र-कवचस्य श्री वाम-देव ऋषिः। पंक्तिश्छन्दः। सदा-शिवः देवता। सकलाभीष्ट-सिद्धये जपे विनियोगः।
ऋष्यादि-न्यासः- श्री वाम-देव ऋषये नमः शिरसि। पंक्तिश्छन्दसे नमः मुखे। सदा-शिवः देवताय नमः ह्रदि। सकलाभीष्ट-सिद्धये जपे विनियोगाय नमः सर्वाङगे।
।।मूल-पाठ।।
शिरो मे सर्वदा पातु, प्रासादाख्यः सदा-शिव।
षडक्षर-स्वरुपो मे, वदनं तु महेश्वरः।।१
पञ्चाक्षरात्मा भगवान्, भुजौ मे परि-रक्षतु।
मृत्युञ्जयस्त्रि-बीजात्मा, आस्यं रक्षतु मे सदा।।२
वट-मूलं सनासीनो, दक्षिणामूर्तिरव्ययः।
सदा मां सर्वतः पातु, षट्-त्रिंशार्ण-स्वरुप-धृक्।।३
द्वा-विंशार्णात्मको रुद्रो, दक्षिणः परि-रक्षतु।
त्रि-वर्णात्मा नील-कण्ठः, कण्ठं रक्षतु सर्वदा।।४
चिन्ता-मणिर्बीज-रुपो, ह्यर्द्ध-नारीश्वरो हरः।
सदा रक्षतु मे गुह्यं, सर्व-सम्पत्-प्रदायकः।।५
एकाक्षर-स्वरुपात्मा, कूट-व्यापी महेश्वरः।
मार्तण्ड-भैरवो नित्यं, पादौ मे परि-रक्षतु।।६
तुम्बुराख्यो महा-बीज-स्वरुपस्त्रिपुरान्तकः।
सदा मां रण-भुमौ च, रक्षतु त्रि-दशाधिपः।।७
ऊर्ध्वमूर्द्धानमीशानो, मम रक्षतु सर्वदा।
दक्षिणास्यं तत्-पुरुषः, पायान्मे गिरि-नायकः।।८
अघोराख्यो महा-देवः, पूर्वास्यं परि-रक्षतु।
वाम-देवः पश्चिमास्यं, सदा मे परि-रक्षतु।।९
उत्तरास्यं सदा पातु, सद्योजात-स्वरुप-धृक्।
इत्थं रक्षा-करं देवि ! कवचं देव-दुर्लभम्।।१०
।।फल-श्रुति।।
प्रातःकाले पठेद् यस्तु, सोऽभीष्टं फलमाप्नुयात्।
पूजा-काले पठेद् यस्तु, कवचं साधकोत्तमः।।११
कीर्ति-श्री-कान्ति-मेधायुः सहितो भवति ध्रुवम्।
तव स्नेहान्महा-देवि ! कथितं कवचं शुभम।।१२
।।इति भैरव-तन्त्रे सदा-शिव-कवचं सम्पूर्णं।।

शनिदेव न तो कभी देर करते है और न पक्षपात।

भारतीय ज्योतिष के अनुसार मनुष्य जिस नक्षत्र और ग्रहों के विशेष योग में पैदा होता है, उसमें आजीवन उन्हीं विशिष्ट गुणों व शक्तियों की प्रचुरता होती है जो उस नक्षत्र और ग्रह के द्वारा पूरे वातावरण में फैलाये जाते हैं। किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली का विश्लेषण व फलादेश करने वाले ज्योतिषियों द्वारा देशकृत ग्रहों का जो संस्कार किया जाता है, वह भी इस बात का द्योतक है कि किसी स्थान विशेष के वातावरण में उत्पन्न एवं पुष्ट होने वाले प्राणी व पदार्थ उस स्थान पर उस समय विशेष में पडऩे वाली ग्रह-रश्मियों को अपनी निजी विशेषता के कारण अन्य स्थान व समय पर जन्मे प्राणियों या पदार्थों की तुलना में भिन्न स्वभाव, गुण व आकृतियों के अनुसार आत्मसात करते रहते हैं। यहां एक बात अवश्य याद रखनी चाहिए कि किसी भी जन्म-कुंडली का विश्लेषण व फलादेश करते समय विश्लेषक अन्य ग्रहों के अलावा शनिदेव के विश्लेषण पर विशेष जोर देते हैं। क्योंकि कर्म के कारक शनिदेव सर्वाधिक समय तक किसी भी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते रहते है।
शनिदेव कर्म के कारक होने की वजह से मनुष्य को क्रियमाण कर्मों का अवलंबन ले अपने पूर्वकृत कर्मों के फल भोग को भी कुछ हद तक अपने अनुरूप बनाने में सक्षम हो सकता है। ज्योतिषीय विश्लेषण के आधार पर बताये गये उपायों का अवलंबन ले प्रतिकूल परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने का पुरुषार्थ कर सकता है। इस प्रकार ज्योतिष मनुष्य को भविष्य की जानकारी देकर उसे अपने कत्र्तव्यों द्वारा प्रतिकूल स्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए प्रेरणा व प्रोत्साहन देता है। यह प्रेरणा मनुष्य के अंदर पुरुषार्थ करने की पर्याप्त चेतना भी जाग्रत करती है।
यह पूरा विश्व जिस सर्वोच्च सत्ता के संकल्प मात्र से अस्तित्व में आया है। उसी की इच्छानुसार नव ग्रहों के ऊपर इस विश्व के समस्त जड़-चेतन को नियंत्रित व अनुशासित करते रहने का गुरुतर भार भी सुपुर्द किया गया है। मानव समेत समस्त प्राणियों को मिलने वाले सुख-दुख ग्रहों के द्वारा ही प्रदान किये जाते हैं। यह बात अलग है कि किसी भी प्राणी को मिलने वाले सुख-दुखों के मूल में उस प्राणी के किये गये निजी कर्म ही होते हैं। किंतु कर्म का कारक होने की वजह से शनिदेव की क्रियमाण कर्मों के संपादन में एक अहम भूमिका है, जिससे इनकार नहीं किया जा सकता। मनुष्य के द्वारा किये गये कर्मों के विपुल भंडार में से किसी कर्म का फल कब और किस प्रकार भोगना है, इसका निर्धारण तो नव ग्रहों द्वारा ही हुआ करता है जिसमें शनिदेव की भूमिका अति विशिष्ट होती है।
क्योंकि प्राणियों के शुभाशुभ कर्मों का फल प्रदान करने में शनिदेव एक सर्वोच्च दण्डाधिकारी न्यायाधीश के रूप में कार्य करते हैं। अशुभ कर्मों के लिए नियत दण्ड प्रदान करते समय शनिदेव न तो कभी देर करते है और न पक्षपात। दण्ड देते वक्त दया तो उनको छू नहीं पाती, यही वजह है कि शनिदेव नाम से ही लोगों के हृदय में भय समा जाता है। संभवत: शनिदेव को क्रूर, कुटिल व पाप ग्रह भी इसीलिए कहा गया है। किंतु इसका मूल आशय यह नहीं कि शनिदेव के अंदर कृपालुता व दयालुता की कमी है।
पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार संचित पुण्य और पापों का फल वर्तमान जीवन में ग्रहों के अनुसार ही प्रकट होते हैं। इसलिए महादशा, अंतर्दशा आदि का ज्ञान भी आवश्यक है। इसलिए उसके परिणाम की जानकारी हो जाने पर इच्छित वस्तु की प्राप्ति और अनिष्ट फलों से बचाव के लिए उचित उपाय किया जा सकता है। यह याद रखने की बात है कि ग्रह संबंधी जो आयु है, वही उसकी दशा है। सभी ग्रह अपनी दशा में अपने गुण के अनुरूप जातक के पूर्वकृत शुभाशुभ कर्मों के अनुसार उसे शुभाशुभ परिणाम प्रदान करते हैं।
हमारे प्राचीन मनीषियों ने शनिदेव के अनुकूल व प्रतिकूल प्रभावों का बड़ी सूक्ष्मता से निरीक्षण कर उसकी विस्तृत विवेचना की है। शनिदेव एक ऐसे ग्रह हैं जिनका जातकों पर परस्पर विरोधी प्रभाव स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। अगर जातक के शुभ कर्मों की वजह से शनिदेव अनुकूल होते हैं तो उसको धन-वैभव से परिपूर्ण कर देते हैं, अन्यथा उसके निजकृत अशुभ कर्मों की वजह से प्रतिकूलत फल भी देते हैं।
शनिदेव की अनुकूल दशा में मनुष्य को स्मरण-शक्ति, धन-वैभव व ऐश्वर्यादि की प्राप्ति होती है। उन्हें गड़े खजाने भी मिल जाते हैं और कारोबार में संतोषजनक लाभ भी उपलब्ध होता है। शनिदेव की अनुकूलता लोगों को जनप्रतिनिधि या शहर, कस्बों व गांवों के प्रधान भी बना देती है। उन्हें कृषि कार्य से विशेष धनार्जन होता है। ऐसे लोगों को आदर, यश, पद आदि सब पर्याप्त रूप से उपलब्ध होते हैं।
जब शनिदेव जातक के निजकृत अशुभ कर्मों की वजह से प्रतिकूल होते हैं तो जातक को जिस प्रकार सुनार सोने को आग में तपाकर गहनों में परिवर्तित कर देता है ठीक उसी प्रकार निजकृत कर्मों को भुगतवाकर एक सदाचारी मानव भी बनाता है और उसके लिए उसे बहुत से कष्टïों का सामना भी करना पड़ता है। शनिदेव पक्षपात नहीं करते हैं। वे तो मात्र जातक को कुंदन बनाने का प्रयास करते हैं। वे कतई नहीं चाहते हैं कि जातक के भीतर में कोई दाग बचा रह जाये।
याद रखें, शनिदेव के कोप का भाजन वही लोग होते हैं जो गलत काम करते हैं। अच्छे कर्म करने वालों पर शनिदेव अति प्रसन्न व उनके अनुकूल हो जाते हैं और उनकी कृपा से लोगों की उन्नति होती है। शनिदेव उनको महत्वपूर्ण पदों के स्वामी अर्थात् मंत्री, प्रधानमंत्री तक बना देते हैं। लेकिन जब शनिदेव अप्रसन्न हो जाते हैं तो उन्हीं राजनेताओं को वह काल-कोठरी में बंद करा देते हैं और उन्हें तरह-तरह की यातनाएं भी झेलनी पड़ जाती हैं।
full read click here http://www.shanidham.in/

09 February, 2012

करोड़पति है लेकिन ‘टाइम पास’ के लिए भीख मांगता है

सुनने में भले ही बड़ा अजीब लगे, लेकिन यह सच है। अहमदाबाद में एक शख्‍स धन-दौलत के मामले में करोड़पति है लेकिन ‘टाइम पास’ के लिए भीख मांगता है। एनआईडी के पास मुकुंद गांधी का करोड़ों रुपये का बंगला है लेकिन यह बुजुर्ग हर रोज जमालपुर मार्केट के पास तीन घंटे भीख मांगता है।
63 साल के मुकुंद के घर नौकर-चाकर खाना बनाते हैं। उनका एक बेटा लंदन में तो बेटी मुंबई में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। गांधी हर रोज ऑटो में बैठकर मार्केट जाते हैं, और भीख मांगते हैं।
मुकुंद गांधी के पिता गांधीवादी विचारधारा के शख्‍स थे। वो एलआईसी में बड़े पद पर थे। उनके पास पांच करोड़ की प्रॉपर्टी है। पत्नी के गुजर जाने के बाद मुकुंद ने भीख मांगना शुरू किया।
मुकुंद ने पत्नी के मर जाने के बाद अग्नि स्नान करके आत्महत्या का प्रयास भी किया था। मनोचिकित्सक भावेश लाकडावाला कहते हैं कि मुकुंद भाई पर स्क्रीजोफेनिया की असर दिख रहा है। खास कर पत्नी और संतान से दूर होने की वजह से उनका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।

07 February, 2012

पति-पत्री ही एक दूसरे को चुनावी मैदान में चुनौती दे रहे हैं।

कहते हैं कि सियासत में रिश्ते बेमानी हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसकी मिसाल सिद्धार्थनगर जिले में देखने को मिल रही है। यहां पति-पत्री ही एक दूसरे को चुनावी मैदान में चुनौती दे रहे हैं।VMW Team के टी.के.ओझा "निशु" की एक रिपोर्ट...
सिद्धार्थनगर जिले की शोहरतगढ़ विधानसभा सीट से रविंद्र चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के टिकट पर पिछला चुनाव जीत चुके रविंद्र का मुकाबला इस बार अपनी ही पत्री साधना चौधरी से है, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार हैं। रविंद्र पूर्व में दो बार भाजपा के टिकट से भी विधायक रह चुके हैं।
तब साधना उनके साथ चुनाव प्रचार में अहम भूमिका अदा करती थीं, लेकिन करीब दस वर्षों से दोनों अलग-अलग रहते हैं। साधना ने कहा कि वह भाजपा उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस, सपा और बसपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। वैसे भी चुनावी जंग, दलों के बीच होती है, व्यक्तियों के बीच नहीं।
एक बार जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकीं साधना से जब पति से रिश्तों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में बात न करने का आग्रह करते हुए कहा कि वह विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ रही हैं, और इस बार शोहरतगंढ़ की जनता भाजपा को जिताने का मन बना चुकी है, क्योंकि वह समझ चुकी है कि भाजपा शासन में ही पिछड़ों का हक सुरक्षित रह सकता है।
शोहरतगढ़ कुर्मी बाहुल्य सीट है। इसलिए भाजपा ने सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के कुर्मी उम्मीदवार की पत्री को ही मैदान में उतार दिया है। पति-पत्री की जंग ने जहां सीट का चुनावी समीकरण बदल दिया है, वहीं दूसरे दल इसका फायदा लेने की फिराक में हैं।
अन्य दलों को लगता है कि कुर्मी मतदाताओं के दम पर जीत दर्ज कराने वाले रविंद्र चौधरी के वोट बैंक में उनकी पत्री व भाजपा उम्मीदवार सेंध लगा सकती है, और इसका फायदा उन्हें मिल सकता है। इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने मुस्लिम उम्मीदवार मुमताज अहमद और समाजवादी पार्टी(सपा) ने लाल मुन्नी सिंह को मैदान में उतारा है। शोहरतगढ़ विधानसभा सीट पर पहले चरण में बुधवार को मतदान होना है।

अब कोई व्यक्ति अपना ट्रेन टिकट यात्रा से 120 दिन पहले आरक्षित कर सकेगा

रेलवे ने टिकटों की मांग को पूरा करने के लिए 10 मार्च से इसके अग्रिम आरक्षण की अवधि को 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन करने का फैसला किया है।
रेल मंत्रालय के वाणिज्यिक विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अब कोई व्यक्ति अपना ट्रेन टिकट यात्रा से 120 दिन पहले आरक्षित कर सकेगा क्योंकि हमने यात्रियों को चार महीने पहले अपनी यात्रा की योजना बनाने का अवसर मुहैया करने का फैसला किया है।
रेल सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) इस सिलसिले में सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव करेगा। उन्होंने बताया कि चार महीने की अग्रिम आरक्षण अवधि से उन लोगों को भी मदद मिलेगी जो त्योहारों या गर्मियों की छुट्टियों के दौरान यात्रा करते हैं। अधिकारी ने बताया कि हालांकि ताज एक्सप्रेस और गोमती एक्सप्रेस जैसी कम दूरी की ट्रेनों के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा।
इन ट्रेनों के लिए अग्रिम आरक्षण की अवधि 15 दिन है और इसमें बदलाव नहीं होगा। विदेशी पर्यटकों के लिए 360 दिनों की सीमा में भी कोई बदलाव नहीं होगा। गौरतलब है कि तत्काल बुकिंग की अवधि 48 घंटे से घटाकर 24 घंटे पहले ही की जा चुकी है।

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