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25 December, 2011

12वीं के बजाय स्नातक

आर. एन. यादव
आने वाले सालों में युवाओं के लिए बैंकों में नौकरियों की ख़ूब भरमार होगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ही पांच साल में क़रीब एक लाख दस हज़ार कर्मचारियों के रिटायर होने से जगह खाली होंगी, लेकिन बैंक लिपिकों के लिए ज़रूरी शैक्षणिक योग्यता को अब 12वीं के बजाय स्नातक किया जा सकता है। बैंक ऑफ़ बड़ौदा के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिल के खंडेलवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने यह सिफारिश की है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अधिकारियों की सीधी भर्ती तेज़ करने के लिए भी कहा है। बैंकिंग क्षेत्र में मानव संसाधन विषय पर इस रिपोर्ट में बड़े बैंकों में तीसरे कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति की भी सिफ़ारिश की गई है, जो विशेष रूप से मानव संसाधन की ज़िम्मेदारी संभाले। समिति का कहना है कि अधिकारियों की 50 प्रतिशत भर्तियां सीधे की जानी चाहिए। यह रिपोर्ट सचिव (वित्तीय मामले) आर गोपालन को बुधवार को सौंपी गई। खंडेलवाल ने कहा कि अगले पांच साल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शीर्ष प्रबंधन स्तर पर 60 से 70 प्रतिशत तक अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अच्छा काम करने वाले को प्रोत्साहन और अच्छे कर्मचारी की पहचान के लिए केवल शीर्ष अधिकारी ही नहीं, बल्कि अधीनस्थ कर्मचारी और यहां तक कि ग्राहकों से भी राय ली जाए। सार्वजनिक उपक्रमों की तर्ज पर बैंकिंग क्षेत्र में भी महारत्न, नवरत्न और मिनी रत्न का दर्ज़ा दिए जाने की सिफ़ारिश की गई है। इससे बैंकिंग क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और कार्यकुशलता बढ़ाने को प्रोत्साहन मिलेगा। नवंबर 2009 में गठित इस समिति की रिपोर्ट में बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा के बीच सरकारी बैंकों के कारोबार में सुधार पर भी ज़ोर दिया गया है और कहा गया है कि इसके लिए कुशल पेशेवरों की ज़रूरत होगी। समिति ने नए भर्ती कर्मियों को तीन साल अनिवार्य रूप से ग्रामीण इलाक़ों में तैनात करने की सिफ़ारिश भी की है। रिपोर्ट कहती है कि हर बैंक का अपना वेतन ढांचा होना चाहिए। वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के लिए एक ही वेतन ढांचा है।

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R.N.Yadav
Principal
S.N.Public School
Beharadabar, Bhatani, Deoria
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