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02 August, 2011

राजस्थान की तीज

तीज माता की सवारी
तीज का त्यौंहार हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण (सावन) के महीने में मनाया जाता है. तीज का त्यौंहार हिंदू देवी तीज माता को प्रसन्न करने के लिये सावन के महीने की तृतीय और चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. तीज के त्यौंहार पर देवी पार्वती के अवतार तीज माता की उपासना, सुख, समृद्धि, अच्छी वर्षा और फसल आदि के लिये की जाती है. तीज का त्यौंहार भारत के राजस्थान राज्य में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है.  तीज के त्यौहार पर देवी पार्वती के अवतार तीज माता की उपसना की जाती है. देवी पार्वती ही श्रावण के महीने की तृतीय तिथि की देवी के रूप में तीज माता के नाम से अवतरित हुईं थीं. सावन का महीना भगवान शिव को सबसे अधिक प्रिय है, और देवी पार्वती भगवान शिव की पत्नी हैं. इसी कारण सावन के महीने में भगवान शिव के साथ ही उनकी पत्नी को भी प्रसन्न करने के लिये पार्वतीजी के अवतार तीज माता की उपासना की जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती बहुत लंबे समय के बाद अपने पति भगवान शिव से मिलीं थीं, और इस खुशी में देवी पार्वती ने इस दिन को यह वरदान दिया कि इस दिन जो भी तृतीया तिथि की देवी तीज माता के रूप में उनकी पूजा-आराधना करेगा, वे उसकी मनोकामना पूरी करेंगी. तीज के त्यौंहार के दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिये तीज माता की पूजा करती हैं, जबकि पुरुष अच्छी वर्षा और फसल के लिये तीज माता की उपासना करते हैं.
 राजस्थान में तीज का त्यौंहार बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है. तीज के एक दिन पहले विवाहित स्त्रियों के माता-पिता अपनी पुत्रियों के घर  सिंजारा भेजते हैं. विवाहित पुत्रियों के लिये भेजे गए उपहारों को सिंजारा कहते हैं, जो कि उस स्त्री के सुहाग का प्रतीक होता है. बिंदी, मेहंदी, सिन्दूर, चूड़ी, घेवर, लहरिया की साड़ी, ये सब वस्तुएँ सिंजारे के रूप में भेजी जाती हैं. सिंजारे के इन उपहारों को अपने पीहर से लेकर, विवाहिता स्त्री उन सब उपहारों से खुद को सजाती है, मेहंदी लगाती है, तरह-तरह के गहने पहनती हैं, लहरिया साड़ी पहनती है और तीज के त्यौंहार का अपने पति और ससुराल वालों के साथ खूब आनंद मनाती है.  सावन के महीने में और विशेष रूप से तीज के त्यौंहार के दिन प्रत्येक स्त्री रंग बिरंगी लहरिया की साड़ियां पहने ही सब तरफ दिखाई पड़ती हैं. तीज के इस त्यौहार पर बनाई और खाई जाने वाली विशेष मिठाई घेवर है. जयपुर का घेवर विश्व प्रसिद्ध है. लहरिया की साड़ी और घेवर के बिना तीज का त्यौंहार अधूरा है. सावन की फुहारें तीज के उत्सव में दुगना रंग भर देती हैं क्योंकि मरू प्रदेश राजस्थान में बारिश अपने आप में ही किसी उत्सव से कम नहीं होती. ऐसे में बारिश का उल्लास और तीज का पर्व एक साथ देखते ही बनता है. ऐसा लगता है मानो तीज के उल्लास में सारी प्रकृति ही नाच उठती है. आम तौर पर सूखी, बंजर और रेतीली धरती की छवि वाले राजस्थान का मानो प्रकृति स्वयं अपने हाथों से श्रृंगार करती है. तभी तो राजस्थान के रेतीले धोरों पर भी सावन और तीज के समय हरियाली की चादर दिखाई पड़ती है. हर तरफ उत्सव का माहौल होता है. पेड़ों पे झूले डाले जाते हैं. स्त्री-पुरुष, युवक-युवती, बालक-बालिका सब रंग बिरंगे परिधानों से सुसज्जित दिखाई पड़ते हैं. राजस्थान की राजधानी जयपुर में तीज के त्यौंहार के दिन तीज माता की सवारी निकाली जाती है. इसे देखने के लिये पूरे विश्व से लोग जयपुर आते हैं. गुलाबी नगर जयपुर में तीज माता की यह सवारी, त्रिपोलिया दरवाजे से आरम्भ होती है, और जयपुर शहर के अनेक बाजारों से होती हुई चौगान स्टेडियम पहुंचती है. जयपुर के राजपरिवार के सदस्य इस सवारी के लिये तीज माता को सजाते हैं. तीज माता की सोने और चांदी की पालकी के पीछे बहुत सुंदरता से सजाये हुए अनेक हाथी, घोड़ों, और ऊँटों का लवाजमा चलता है. इस सवारी के दौरान अनेक कलाकार लोक नृत्य और लोक कलाओं के अनेक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं.
VMW Team की तरफ से आप सभी को तीज की हार्दिक शुभकामनाये और बधाई ! 

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