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20 August, 2011

जन लोकपाल बनाम सरकारी लोकपाल (जोकपाल)

मोहक पाठक
दोस्तों पहली बार लिखने का मौका मिला है वो भी अगर इस टीम के साथ होता तो शायद नहीं ही मिलाता , पहले तो मैं बता दू की मैं पीलीभीत का रहने वाला हु नाम है -- मोहक पाठक
इस टीम के सभी लोगो का धन्यवाद देता हु की मुझे ये मौका दिया |
आज कल चारो तरफ बस लोकपाल का ही शोर है लेकिन सभी लोग जन लोकपाल और सरकारी लोकपाल (जोकपाल) से पूरी तरह परिचित नहीं है मै आप को इनसे परिचित करता हू| 
कुछ जागरूक नागरिकों द्वारा शुरू की गई एक पहल का नाम है 'जन लोकपाल बिल'. इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा. जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण और अरविन्द केजरीवाल द्वारा बनाया गया यह विधेयक लोगो के द्वारा वेबसाइट पर दी गयी प्रतिक्रिया और जनता के साथ विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है. यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी. कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर पायेगा. इस बिल को शांति भूषण, जे. एम. लिंगदोह, किरण बेदी, अन्ना हजारे आदि का भारी समर्थन प्राप्त हुआ है.
इस बिल की मांग है कि भ्रष्टाचारियो के खिलाफ किसी भी मामले की जांच एक साल के भीतर पूरी की जाये. परिक्षण एक साल के अन्दर पूरा होगा और दो साल के अन्दर ही भ्रष्ट नेता आधिकारियो को सजा सुनाई जायेगी . इसी के साथ ही भ्रष्टाचारियो का अपराध सिद्ध होते ही उनसे सरकर को हुए घाटे की वसूली भी की जाये. यह बिल एक आम नागरिक के लिए मददगार जरूर साबित होगा, क्यूंकि यदि किसी नागरिक का काम तय समय में नहीं होता तो लोकपाल बिल दोषी अफसर पर जुरमाना लगाएगा और वह जुरमाना शिकायत कर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा. इसी के साथ अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती है तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते है. आप किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते है जैसे कि सरकारी राशन में काला बाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, या फिर पंचायत निधि का दुरूपयोग.
लोकपाल के सदस्यों का चयन जजों, नागरिको और संवैधानिक संस्थायो द्वारा किया जायेगा. इसमें कोई भी नेता की कोई भागीदारी नहीं होगी. इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से, जनता की भागीदारी से होगी
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सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सी बी आई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (ऐन्टी करप्शन डिपार्ट्मन्ट) का लोकपाल में विलय कर दिया जायेगा. लोकपाल को किसी जज, नेता या अफसर के खिलाफ जांच करने मुकदमा चलाने के लिए पूर्ण अधिकार प्राप्त होंगें
.
इस बिल की प्रति प्रधानमंत्री एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दिसम्बर २०१० को भेजी गयी थी, जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. इस मुहीम के बारे में आप ज्यादा जानकारी के लिए www.indiaagainstcorruption.org पर जा सकते हैं. इस तरह की पहल से समाज में ना सिर्फ एक उम्दा सन्देश जाएगा बल्कि, एक आम नागरिक का समाज के नियमों पर विश्वास भी बढेगा. हर सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है, और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना हर नागरिक का हक है.
 और ये है सरकारी जोकपाल  ------ लोकपाल बिल में यह प्रावधान प्रस्तावित है कि संपत्ति घोषित नहीं कर पाने वाले बाबुओं को भ्रष्ट माना जाएगा. लोकसभा में पेश होने जा रहे लोकपाल विधेयक में यह प्रावधान प्रस्तावित किया गया है कि अगर कोई सरकारी कर्मी अपनी संपत्ति की घोषणा नहीं कर पाता है या गुमराह कर देने वाली जानकारी देता है तो यह मान लिया जाएगा कि उसने भ्रष्ट तरीकों से संपत्ति जुटाई है.लोकपाल भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे नौकरशाहों के तबादले या निलंबन की भी सिफारिश कर सकेगा.लोकपाल केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, समूहया उसके समकक्ष के किसी अधिकारी, संसद द्वारा पारित कानून के तहत किसी निकाय, बोर्ड, निगम, प्राधिकरण, कंपनी, सोसाइटी, ट्रस्ट और स्वायत्त संस्था तथा केंद्र सरकार के आंशिक या पूर्ण वित्तीय नियंत्रण वाले किसी निकाय के अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी या समूहके समकक्ष अफसर के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच कर सकेगा.विधेयक में प्रधानमंत्री को उनके पदमुक्त होने तक लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है. संसद के भीतर सांसदों का आचरण और उच्च न्यायपालिका भी दायरे में नहीं है. प्रस्तावित लोकपाल में एक अध्यक्ष और आठ अन्य सदस्य होंगे. इनमें से आधे न्यायपालिका से होंगे. लोकपाल के पास अपनी अभियोजन और जांच इकाई होगी.लोकपाल में गैर-न्यायिक पृष्ठभूमि वाले उन्हीं सदस्यों को शामिल किया जाएगा जो पूर्ण रूप से ईमानदार और असाधारण क्षमता वाले होंगे तथा जिन्हें प्रशासन में भ्रष्टाचार निरोधी निगरानी की जिम्मेदारी वाले पदों पर काम करने का कम से कम 25 वर्ष का अनुभव होगा. विधेयक में प्रावधान किया गया है कि लोकपाल अपने अध्यक्ष या किसी सदस्य के खिलाफ शिकायतों की जांच नहीं करेगा. इस तरह की शिकायतें राष्ट्रपति या भारत के प्रधान न्यायाधीश के पास भेजी जाएगी. लोकपाल को भविष्य में अभियोजन चल सकने की संभावना वाले मामलों में आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता-1973 की धारा-197 और भ्रष्टाचार निरोधक कानून-1988 की धारा-19 के तहत मंजूरी प्राप्त करने की जरूरत नहीं होगी. लोकपाल को भ्रष्ट नौकरशाहों की भ्रष्ट तरीकों से जुटाई गई संपत्ति को जब्त करने के भी अधिकार होंगे. इसी के साथ विधेयक में प्रावधान किया गया है कि गलत शिकायतों पर शिकायतकर्ता के खिलाफ अभियोजन चलाया जा सकेगा और ऐसे मामलों में सजा का प्रावधान कम से कम दो वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष होगा.ऐसे मामलों में दंड भी 25,000 से दो लाख रुपए तक लगाने का प्रावधान किया गया है. नौकरशाह क्षतिपूर्ति पाने के भी अधिकारी होंगे. प्रस्तावित भ्रष्टाचार निरोधी निकाय जांच करने में केंद्र और राज्य सरकार की मदद भी ले सकेगा. विधेयक में प्रावधान है कि भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के सात वर्ष के भीतर उस पर जांच होनी जरूरी है. प्रधानमंत्री के मामले में यह सीमा अवधि उनके पदमुक्त होने के बाद लागू होगी. विधेयक में केंद्र में लोकपाल के साथ ही राज्यों में लोकायुक्त के गठन का प्रावधान नहीं किया गया है.लोकपाल को चलाने के लिये राशि की व्यवस्था भारत की संचित निधि के जरिये की जाएगी. सरकार को उम्मीद है कि अगर लोकसभा में विधेयक पेश होने के बाद स्थायी समिति अगस्त अंत तक इस पर अपनी सिफारिशें भेज देती है तो इसे पारित कराने की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकते हैं.
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