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29 June, 2011

राजमंदिर

राजमंदिर जो हर राजस्थानी के दिल में सपना बनकर धड़कता है और जिसकी चर्चा के बिना जयुपर यात्रा का वर्णन पूरा हो ही नहीं सकता! थार की एक पीढ़ी है जो राजमंदिर को देखने या राजमंदिर में फिल् देखने के सपने के साथ बड़ी हुई. एक पीढ़ी जिसकी कल्पनाओं में तरह तरह के राजमंदिर उकरते रहे हैं. हैरानी नहीं होगी कि किसी सर्वे में जयपुर के सबसे चर्चित और इच्छित गंतव् स्थलों में राजमंदिर सिनेमा सामने जाए. हो भी क्यों नहीं. 70 एमएम सिंगल स्क्रीन वाला राजमंदिर देश के उन चुनिंदा सिनेमाघरों में से हैं जो डीटी और मल्टीप्लेक् के मौजूदा दौर में भी शानो शौकत के साथ चल रहे हैं. बदलते जमाने की धूल राजमंदिर की दीवारों पर नहीं जम सकी है. भगवानदास रोड पर पांच बत्ती सर्किल के पास स्थित है राजमंदिर थियेटर या सिनेमाघर! राजमंदिर की शुरुआत हुई एक जून 1976 को चरस फिल् के साथ. इसके डिजाइन का श्रेय विख्यात वास्तुविद डब्ल्यू एम नमजोशी को जाता है. उन्होंने इस सिनेमाघर का भवनआर्ट माडर्नेतरीके में बनाने की योजना बनाई. इस भवन की आंतरिक साज सज्जा बाहरी रूप दोनों ही अनूठे हैं. भवन के सामने का हिस्सा पत्तियों या पुष् दल रूप में हैं. पोस्टर वाली लहर पर नौ सितारे या तारे बने हैं. ऊपर की दो दीवारी लहरों पर ‘The Showplace of the Nation – Experience the Excellence’ अंकित है. रात में जब इसका आमुख रोशनी में नहाया होता है तो उसकी शोभा देखते ही बनती है. भवन की आंतरिक साज सज्जा मनोहारी है. शायद देश के किसी भी सिनेमाघर में सबसे बड़ी लाबी.. और रोशनी व्यवस्था देख तो दर्शक दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं. प्लास्टर से बनी पत्तियों के पीछे से झांकती रोशनी जिसका रंग बदलता रहता है. बालकनी में जाने के लिए सीढियों के बजाए लंबा रैंप बना है. राजमंदिर भारत के सबसे चर्चित सिनेमाघर भवनों में से एक है और इसकी तुलना हालीवुड, केलिफोर्निया के ग्राउमैनस चाइनीज थियेटर से की जाती है. कहते हैं कि यह दुनिया का एक मात्र सिनेमाघर है जो पर्यटक केंद्र या टूरिस् प्लेस के रूप में पंजीबद्ध है 

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VMW Team

India's New Invention

 

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