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23 June, 2011

अजब प्रेम की गजब कहानी

 जिंदा है शिखा, पूजा की हुई थी हत्या गोरखपुर : जिस शिखा दुबे की मौत पर चार दिनों से महानगर में सनसनी मची थी, वह न केवल जिंदा है, बल्कि घर से भाग कर प्रेमी के साथ रहने के लिए सनसनीखेज हत्या की योजना में शामिल बड़ी साजिशकर्ता भी निकली। उसके घर वाले भी इस साजिश के शिकार हुए। जिस लाश को शिखा का समझा गया, वह सोनभद्र
की पूजा थी और उसे तीन हजार रुपये पर यहां लाया गया और गला घोटकर उसकी हत्या कर दी गई। उसे शिखा के कपड़े पहनाकर और रॉड से चेहरा बिगाड़कर नाले में फेंक दिया गया ताकि घरवाले उसे शिखा की लाश समझते रहें। सोमवार को शिखा, उसके प्रेमी दीपू यादव व दीपू के दोस्त सुग्रीव की गिरफ्तारी के बाद डीआइजी मुकेश शुक्ल ने पूरे मामले का सनसनीखेज खुलासा किया।
अप्रैल में ही कर ली थी दीपू व शिखा ने शादी :  डीआइजी ने बताया कि शिखा और दीपू आपस में प्रेम करते थे। दोनों ने अपने घर वालों को बिना बताए गत 18 अपै्रल को बुढि़या माई मंदिर में शादी भी कर ली थी। बाद में घर से भाग कर एक साथ रहने के लिए उन्होंने योजना तैयार की।
दीपू ने इस पूरे मामले की योजना एक माह पहले ही तैयार कर ली थी।
झांसे की साजिश, हत्या की योजना :  योजना के तहत उन्होंने शिखा की कद-काठी से मिलती-जुलती लड़की की तलाश शुरू की। गुरुवार को उन्हें ऐसी लड़की मिल गई। दीपू ने अपने मित्र सुग्रीव की मदद से सोनभद्र जिले के चोपन जिले से पूजा नाम की लड़की को तीन हजार रुपये रोज की दर से गोरखपुर चलने के लिए तैयार किया। पूजा को ट्रक में बिठा कर दोनों गुरुवार को गोरखपुर पहंुचे। फोन से उन्होंने इसकी जानकारी शिखा को दी। सूचना मिलने पर खरीदारी के बहाने वह घर से निकली। इस बीच जहां शव मिला, उससे थोड़ी दूर ट्रक खड़ा कर दीपू और सुग्रीव ने पूजा का गला घोंटा। बाद में फोन से उन्होंने शिखा को भी बुलाया, जहां शिखा ने अपने कपड़े शव को पहनाए और खुद खरीद कर लाए कपड़े पहने। इसके बाद दीपू और शिखा टेम्पो में बैठ कर कचहरी बस स्टेशन पहंुचे। वहां से दोनों बस पकड़ कर वाराणसी और बाद में सोनभद्र चले गए। इधर, सुग्रीव ने रॉड से प्रहार कर पूजा का चेहरा बिगाड़ा और उसके शव को नाले में फेंका।
सोनभद्र से मिला सुराग : डीआईजी ने बताया कि इस मामले का मुख्य आरोपी दीपू सोनभद्र में गिट्टी का काम करता है, इसलिए उसकी तलाश में पुलिस टीम को वहां भेजा गया। वहां से मिली जानकारी के आधार पर ही गोरखपुर से शिखा, उसके प्रेमी दीपू और सुग्रीव को गिरफ्तार किया गया।
लाश मिलते ही मचा था हल्ला : इंजीनियरिंग कालेज के निकट कमलेशपुरम कालोनी निवासी राम प्रकाश दुबे की बेटी शिखा गुजरे गुरुवार की शाम खरीदारी करने निकली थी, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटी। परिजनों की सूचना पर पुलिस उसकी तलाश कर ही रही थी कि दूसरे दिन शुक्रवार को सरयू नहर कालोनी में बिस्किट फैक्ट्री के पास नाले में युवती की लाश पाई गई। बाद में राम प्रकाश दुबे और उनके परिवार के अन्य लोगों ने कपड़े के आधार पर मृतका की पहचान शिखा के रूप में की।
हां, मैंने रची अपनी हत्या की साजिश : शिखा
पुलिस लाइन में डीआईजी की प्रेस वार्ता में शिखा ने कबूल किया कि खुद
उसने ही अपनी हत्या की साजिश रची। उसने सोचा था कि उसके माता-पिता उसे मरा मान कर कुछ आंसू बहा कर संतोष कर लेंगे। बकौल शिखा, उसने अपने प्रेमी दीपू से कहा कि उसकी कद काठी की लाश की व्यवस्था करो। उसने कहा था कि पांच हजार वह खुद देगी। उस लाश को अपने कपड़े पहनाएगी और घर के समीप फेंक कर सोनभद्र में रहेगी। प्रेमी दीपू ने अपने दोस्त, एक ट्रक चालक से बात की तो उसने सोनभद्र जिले के चौपन थाना अंतर्गत सलखन की एक युवती पूजा को तीन हजार रुपये में हायर कर लिया। दीपू ट्रक चालक के साथ पूजा को यहां ले आया और कुसम्ही जंगल में पूजा की हत्या की। इसके बाद पूजा की लाश ट्रक से लेकर दोनों सिंघडि़या के पास आ गए। बकौल शिखा, हमने ट्रक में ही अपनी सलवार-समीज,अंत:वस्त्र पूजा को पहनाया, यहां तक कि अपना हेयर बैंड भी उसे
लगा दिया। अपनी चप्पल पहनाई, ताकि जो भी देखे, यहां तक कि माता-पिता भी देखें तो वो पूजा को अपनी बेटी शिखा ही समझें। शिखा का कहना था कि हम इस योजना में सफल भी हो गए थे, पर हड़बड़ी में मोबाइल ऑफ करना भूल गए और पुलिस ने हमे दबोच लिया। शिखा का कहना था कि अगर कुछ दिन वह दीपू से अलग रही होती तो शायद पुलिस भी कभी इस राज से परदा नहीं उठा पाती। पर, हमारा दुर्भाग्य, जब दीपू पकड़ा गया, तब वह भी उसके साथ ही थी।

कहानी दैनिक जागरण , अमरउजाला रास्ट्रीय सहारा के गोरखपुर सस्करण ने प्रमुखता से छापा  
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