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01 June, 2011

बहादुरो की धरती -------- सरकारी उपेच्छावों का शिकार

एन. डी. देहाती
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला का गाव पैना बहादुरो की धरती है . आजादी की जंग मे इस गाव का बहुत योगदान रहा है . आज यह गाव सरकारी उपेच्छावों का शिकार हो गया है यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रणबांकुरों की धरती है। जांबाजों ने इसे दो माह तक आजाद रखा। जब तक उनके शरीर में रक्त की अंतिम बूंद बची रही, फिरंगी इस धरती पर कदम नहीं रख पाए। शहीदों की याद में स्मारक बना। पर, अफसोस सरकारी उपेक्षा से यादें रो रही हैं। यह कहानी पैना गांव की है। यहां सतिहड़ा नाम से बना स्मारक जमींदारों, किसानों व स्ति्रयों की शहादत का प्रतीक है। 1997 में सितंबर माह में मुख्यमंत्री मायावती के हाथों शहीद स्मारक की आधारशिला रखवाई गयी थी। स्मारक बन तो गया, मगर उसके बाद किसी भी सरकार अथवा जनप्रतिनिधि को उसके रख-रखाव व विकास की सुधि नही आई। आज ही के दिन किया था आजादी का एलान : 10 मई 1857 को मेरठ में भड़की विद्रोह की चिंगारी पैना भी पहुंची। यहां के जमींदारों ने ठाकुर सिंह की अगुआई में 31 मई 1857 को ब्रिटिश हुकूमत को नकारते हुए आजादी का एलान कर दिया। बागियों ने गोरखपुर से पटना और गोरखपुर से आजमगढ़ जाने वाले नदी मार्ग पर बरहज के पास कब्जा कर लिया। आजमगढ़ जाने वाले अंग्रेजी कुमुक की रसद और खजाने का लूट लिया। उस समय आजमगढ़ ब्रिटिश फौज की प्रमुख छावनी था। लिहाजा आजमगढ़ में जाने वाली कुमुक को रोकने की रणनीति पैना के बागियों ने अपनाई। अंग्रेजों ने बोला जल और थल से हमला : घबराए अंग्रेजों ने 20 जून 1857 को मार्शल लॉ घोषित कर दिया। बावजूद इसके स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के हौसलों में कोई कमी नही आई। पैना में ठाकुर सिंह के नेतृत्व में 600 सैनिकों ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। बौखलाए अंग्रेजों ने 31 जुलाई 1857 को पैना पर जल व थल मार्ग से हमला कर दिया। अंग्रेजी पलटन ने संयुक्त रूप से उत्तरी छोर से गांव पर हमला बोला। विद्रोही सेना ने सीमित संसाधनों के बावजूद मुंहतोड़ जवाब दिया। बौखलाई फिरंगी फौज ने होरंगोटा स्टीमर से पैना पर करीब तीन किमी के दायरे में चार जगह से तोप के गोले बरसाए। 395 शहीदों की धरती : गांव के बुजुर्ग नागरिक एवं जुबली इंटर कालेज गोरखपुर के पूर्व प्रधानाचार्य 88 वर्षीय अनिरुद्ध की जुटाई जानकारी के अनुसार कुल 395 लोग यहां शहीद हुए। इसमें 85 लोग तो तोप के गोलों और गोलियों से मारे गए थे।
 
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