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29 May, 2011

बढती हुई महंगाई ...

बाये से : त्रिपुरेन्द्र और मधुलेश  
बढती हुई महंगाई ने आज आमआदमी की कमर तोड़ रख दी! केंद्र सरकार
को आवश्यक वस्तुओ के बड़ते मूल्यों की कोई परवा नहीं है! केंद्र से जब भी इस बात की पुष्टि करने के लिए कहा जाता है तो उनके पास घिसे-पिटे जवाब के अलावा कुछ बोलने के लिए नहीं होता....कभी वो कम उत्पादन को जिम्मेदार ठहराती है तो कभी सरककर के रवैये को इससे आम जनता किस प्रकार प्रभावित हो रही है इससे उन्हें कुछ लेना-देना नहीं है......! ये तो आज हमें समझ आता है की मौसमी फल-सब्जियों के उत्पादन,और उनकी उपलब्धता पर सरकार का ज्यादा जोर नहीं चल सकता | हमारी सरकार को इस चीज से  फर्क पड़ता है की जयपुर के गोल चक्कर पर रिक्शे खड़े हो.....नहीं तो उनके रिक्शे उठा लिए जाते है,और उन गरीबो के रिक्शों को तोड़ दिया जाता है ! लेकिन क्या सरकार ने महंगाई कम करने के लिए कुछ ठोस कदम अभी तक उठाये? इसका जवाब है की अभी तक हमारी सरकार ने इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये है ! यह हमारे देश के लिए शर्मनाक और लज्जाजनक है की ये सरकार तो खाद्यान्नों के संभावित उत्पाद का अनुमान लगाने में समर्थ है और ही समय पर आयात का फैसला कर पाने में! वो राज्य सरकारों इसके लए प्रेरित भी नहीं कर पा रही है,की वो जमाखोरी के खिलाफ कोई अभियान छेड़े ! समस्याए यह है की आम आदमी का साथ देने का दावा करने वाली केंद्र सरकार इस दिशा में इमानदारी से कोशिश करती भी नहीं दिख रही....अब तो ये समय गया है की आम आदमी के मुंह पर एक ही सवाल नजर रहा है की यदि केंद्र सरकार इन कारणों का निदान नहीं कर सकती तो इसके अस्तित्व में होने का क्या मतलब? अभी केंद्र सरकार के पास महंगाई को रोकने का कोई निष्कर्ष नहीं है,और आम जनता को …....

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Madhulesh and Tripurendra
VMW Team
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