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30 May, 2011

गाछे कटहर, ओठे तेल...... पांव लागीं ए मलिकार...

एन. डी. देहाती
मन अगराइल जहिया हमरा पाती के जवाब राउर आइल। गदेलवा के बड़का बेटवा सांझि के बाजार से लौटल राउर चिट्ठी हमरा के दिहलस। पूछनी कि कहां से आइल बा बाबू? कहलस काका जी भेजले बानी। धधा के दउरनी पांड़े बाबा के दुआरी। दोगहे से हांक लगावे लगनी- कनियवां, कहवां बाड़ू सन। बड़की आटा साने बइठल रहे। चिहा के पूछलस- का भइल बहिना। हम कहनी- उहां के चिट्ठी आइल बा। तोहरा लोगिन से जवन पाती लिखवावत रहनी हां, ओही के जवाब आइल बा। एतने में पढ़लकी पतोहिया घरे में से बोललस- दीदी, एने आईं। उहां के अबहीं काम में बाझल बानी, ले आईं, हमहीं बांच दे तानी। गइनी लिफाफा खोल के बांचे लागल। राउर लइनिया जब पढ़लस- कवनो कामयाब मरद के पीछे ओकरा मेहरारू के हाथ होला- का कहीं मलिकार, बिना कवनो कारन के आंख से झर-झर लोर झरे लागल। रउरा हमरा के केतना बड़का ओहदा दे दिहनी छोट बुद्धि के औरत होके रउरा के हम केतना कोसत रहीले। माफ करेब मलिकार, अबहीं ले कवनो भूल-चूक भइल होखे माफ करेब। आखिर हम औरते नू होईं, जेकरा बारे में लोग किसिम-किसिम के किस्सा गढ़ले बा। ओही में एगो - नाक ना रहित औरत...खैर हमरा एह बात के खूब खुशी भइल कि रउरा बड़का खातिर कंपुटरवा कीने के कहले बानी। बात ओकरा के बतवनी भर आंगन डांड़ डोला के खूब नचलस। मलिकार, अपना इहां जवन वोटवा होता, ओइमे कई गो पाटी खड़ा हो तारी सन? भुसावल सिंह के बड़ जाना दस दिन पहिले ले सोनिया गांधी के गुन गावत रहले हां। उनकर बाप सगरी गांव में ढोल बजावत फिरत रहले हां कि बेटवे के अबरी कांगरेस के टिकट मिली। अब सुने में आवता कि कवनो बहिन जी के पाटी में चल गइले। पहिले दुइए-तीन गो पाटी के नाम हम सुनत रहनी हां, बाकिर अपना इहां अब बहिन जी, पासवान जी, लालू जी के नाम से लोग पाटी चीन्हत-जानत बा। गांधी बाबा कांगरेस के सबसे बड़ आदमी रहले, रउरे हमरा के बतवले रहनी। बाकिर कांगरेस के केहू गांधी बाबा के नाम से जोड़ के ना देखे। अब सगरी पाटी अपना नेता के नाम से चिन्हात बाड़ी सन। बंगाल में कवनो एगो दीदी बाड़ी। उनहूं के कवनो एगो पाटी बा। एतने ले नानू मलिकार, नेतवा जीते के पहिलहीं कुरसियो बांट ले तारे सन। पिछलका बेर दिल्ली वाला चुनउवा में कवन एगो आडवानी जी बाड़े, अपना के परधानमंत्री मान लिहले रहले। अपना इहां लालू जी अपना के मुखमंत्री पहिलहीं मान लेले बाड़े। उनकरा संगे रहेवाला कवनो पासवान जी के भाई लालू जी के राज में उप मुखमंत्री होइहें। एही के कहल जाला- गाछे कटहर, ओठे तेल। चुनाव के बतकही अइसन बा मलिकार कि देखब ना, आपस में लोग मार-काट मचा ली। केहू जीते भा हारे, ओकरा से हमनी का का लेबे-देबे का बा। आपना वोट देबे के हक हमनी के बा। बाकिर इहवां कुकुरहपट मचल बा। एगो रात में सुतल हराम हो गइल बा। जवना गांव में दिन-दुपहर एकाध गो मोटरसाइकिल आवत-जात लउकत रहल हा, अब दिन-रात चरपहिया गाड़ी दउरत बाड़ी सन। पों-पां अइसन कि काने फाट जाई। एग बेर रउरा चरपहिया लेके आइल रहनी। ओकर हारन बाजे दस-बीस गज ले सुनाव। उहो कान के चदरा फारेवाला ना रहे। बाकिर का जाने कइसन हारन वाली गाड़ी लेके आवत बाड़े सन कि मन उबिया जाता। एतने ले रहित कवनो बात ना, सुतल रात में घरे-घरे जाके लोग के जगावल- भइया, काका, बाबा, दीदी, चाची। दुअरा निकलते- हम फलनिया हईं, हमरा एह चुनाव में टिकट मिलेवाला बा। तनी देखब, धेयान देब। पूछ दीं कि कवना पाटी से जवाब रकम-रकम के। ओइसे लालटेन छाप वाला से टिकट पक्का बा, बाकिर दोसरो पाटी के टिकट मिल सकेला। दुइए-चार दिन में फाइनल हो जाई। हम फेर आएब। मन में हंसियो आवेला- एकनी का ओह जमात के बाड़े सन, जवन भात खातिर जात नाशे में तनिको देर ना करे। बताईं अबहीं गाछ पर कटहर बा, एकनी का ओठ पर तेल लगवले घूमत बाड़े सन। जवन आदमी अपना पाटी, उसूल, ईमान के नइखे मलिकार, जीत गइला पर जनता खातिर का हो सकेला। इहे जवार के हाल बा मलिकार। पाती के जवाब देत रहेब। तनी आवहूं के बारे में विचारेब। रउरा खुदे समझदार बानी। रउरा के समझावे के औकात हमार नइखे। बरखा-बूनी-बाढ़ के टाइम बा। किसिम-किसम के बेमारी होली सन। खाए-पीए के धेयान राखेब।

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