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17 March, 2011

VMW Team की तिलक होली

होली तो आप हर साल मानते है पर हमारी टीम आप को तिलक होली मनाने का  अनुरोध कर रही है क्योकि कुछ साल बाद होली तो आएगी पर पानी............?   होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं,राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है होली के दिन घरों में खीर, पूरी और पूड़े आदि विभिन्न व्यंजन पकाए जाते हैं। इस अवसर पर अनेक मिठाइयाँ बनाई जाती हैं होली का पहला काम झंडा या डंडा गाड़ना होता है। इसे किसी सार्वजनिक स्थल या घर के आहाते में गाड़ा जाता है। इसके पास ही होलिका की अग्नि इकट्ठी की जाती है। पर्व का पहला दिन होलिका दहन का दिन कहलाता है। इस दिन चौराहों पर जहाँ कहीं अग्नि के लिए लकड़ी एकत्र की गई होती है, वहाँ होली जलाई जाती है। इसमें लकड़ियाँ और उपले प्रमुख रूप से होते हैं। दिन ढलने पर ज्योतिषियों द्वारा निकाले मुहूर्त पर होली का दहन किया जाता है। इस आग में नई फसल की गेहूँ की बालियों और चने के होले को भी भूना जाता है। होलिका का दहन समाज की समस्त बुराइयों के अंत का प्रतीक है। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय का सूचक है। गाँवों में लोग देर रात तक होली के गीत गाते हैं तथा नाचते हैं। होली के बारे में बताने में ये भूल ही गया की मुझे तिलक होली के बारे में कहना है - तिलक होली खेलने से हम बहुत पानी बचा सकते है जो हमे जीने के लिए जरुरी है अगर हम वाकई पानी बचाना चाहते हैं तो रंगों के इस त्यौहार को तिलक होली के रूप में मनाना चाहिए और हाथों एवं सिर पर रंग उड़ेलने की बजाय अपने प्रियजनों के माथे पर तिलक लगा उन्हें होली की बधाई देनी चाहिए, क्योंकि हाथों पर लगे रंग को धोने में जहां एक से तीन लीटर पानी व्यर्थ होता है, वहीं सिर में लगे रंग को निकालने में पांच से 10 लीटर पानी व्यर्थ बहाना पड़ता है। तिलक होली को लेकर बुधवार को "गिरजा  कुञ्ज" में संचार प्रभारी टी.के.ओझा "नीशू"  की अध्यक्षता में VMW Team की बैठक की गई। बैठक में टीम के बीच तिलक होली खेलने की बात पर सहमति जताई गई। इस बार तिलक होली खेलने का फैसला लिया गया। मौके पर उपस्थित गोरखपुर के गिरिजेश जी ने कहा कि टीम के इस निर्णय का स्वागत होना चाहिए, टीम ने पानी की घोर किल्लत का अहसास कराया है। जिसे लेकर सभी लोगों को पानी का संरक्षण करना चाहिए। बैठक की शुरुआत मुख्य अतिथि एन.डी. देहाती जी के भोजपुरी विचार से हुआ | इस मौके पर टीम के संचालक योगेश जी, गाजियाबाद के प्रो. रवि  पाण्डेय जी, गोरखपुर  विश्विद्यालय के प्रो. एम.एम. पाठक जी ने अपने - अपने विचार  व्यक्त किये | इस मौके पर पवन पाठक, ब्रजेश पाण्डेय, संजय ओझा, रोहित सिंह,  मधुलेश,  त्रिपुरेन्द्र,  अनुज,  गजेन्द्र,  अभिषेक,  लालू,  नीरज,  प्रेम,  अमरेश, रामसागर, घनश्याम, निलेश,  विशाल,  देवेश , राकेश , सिद्देश, अनिल , संदीप, गोपी, संतोष,  कुलदीप,  राजेश, निल्को जी, वीरभद्र जी , गणेश जी,  मदन जी,  के. के. ओझा जी , नेबू लाल ,  रविन्द्र   के समेत दर्जनों लोगो ने अपने विचार व्यक्त  किये तथा तिलक होली मनाने का संकल्प किया और सभी को होली की बधाई  दी।
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VMW Team (India's New Invention)
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