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04 March, 2011

काला धन

एम.के.पाण्डेय "निल्को जी"

अरे परेशान  मत होइए, आप सोच रहे होगे की क्या धन भी काला होता है? धन तो लक्ष्मी का स्वरुप है और वह कैसे काला हो सकता है? सही सोच रहे है आप,पर मैं बात कर रहा हू उस धन की जो हमारे  नेतावों ने बाहर के बैंको में जमा किया है हमे और आप को लुट कर| VMW Team  के 
एम.के.पाण्डेय "निल्को जी" की एक पेशकश .....
 
देश को भ्रष्टाचार की दीमकों के हवाले करने वाले सफेदपाशों के कालेधन को लेकर अरसे से बहस चल रही है। गाहे-बगाहे कोई कोई बडा नेता कालेधन के मसले पर बयान देकर अपने आप को दूध का धुला साबित करने में जुटा रहता है। अदृश्य भ्रष्टाचार के रूप में हर साल करीब 11.5 लाख करोड़ रूपये कालेधन के रूप में इकटठा होता है। विदेशी बैंको में ये कालाधन जमा किया जाता है। स्विस बैंक में अब तक करीब 70 लाख करोड़ रूपये कालेधन के रूप में जमा किए जा चुके है। जितना कालाधन एक साल में सफेदपोश जमा करते हैं वो हमारे देश के सालाना बजट से भी दो गुना होता है। साफ जाहिर है देश को बर्बादी के कगार पर ले जाने का षड़यंत्र चल रहा है तो दूसरी तरफ इस आपराधिक षड़यंत्र का ताना-बाना बुनने वालों को इससे निजात दिलाने की तैयारी भी चल रही है। दरअसल भ्रष्टाचार के नित नए स्केंडलों से जूझ रही केन्द्र सरकार एक ऐसा ही विधेयक लाने जा रही है। सरकार की मंशा चाहे जो भी हो, लेकिन यह साफ दीख रहा है कि ‘‘ब्लैक मनी’’ पर कुंडली मारे बैठे ‘‘व्हाईट कालर्स’’ मन ही मन खुश हैं। इस विधेयक का मजमूं कुद हद तक यही है कि सरकार इसमें ऐसे प्रावधान करेंगी कि सारा कालाधन निकल आए और उसकी चांदी हो जाए। जो अपना जितना कालाधन जाहिर करेगा, सरकार उसका करीब 30 फीसदी हिस्सा बतौर दंड रखकर उस काले दलाल को एक तरह से बरी कर देगी। यहां सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस लोकतांत्रिक देश में क्या जनता को यह जानने का अधिकार नहीं है कि वे काले चोर कौन है जिन्होने देश की जनता की गाढ़ी कमाई विदेशी बैंको में सहेजकर रखी है। प्रधानमंत्री ने सीना तानकर यह कह दिया कि कालाधन जमा करने वाले लेागो का नाम सार्वजनिक करने में कुछ संधिया आड़े रही है। प्रधानमंत्री को किसी को नहीं तो कम से कम देश की जनता को यह बताना चाहिए कि वे कौनसी संधिया है जिन्हे छिपाया जा रहा है।
बेईमान उद्योगपति,भ्रष्ट राजनेता, भ्रष्ट आधिकारी, क्रिकेटर, अभिनेता- अभिनेत्री, गैर क़ानूनी व्यापार और संरक्षित वन क्षेत्र में काम करने वाले व्याक्ति या फिर सरकार में बैठा कोई मंत्री आखिर वो देश को इतना क्यों कमजोर करना चाहते है. जिस देश की सरजमीं ने उन्हें पावं रखने की जगह दी और वही लोग उस देश की जड़ें उखाड़ने में लगे हुए. इस देश को अंग्रेज सोने की चिड़ियाँ कहते थे, और अब इस देश के चंद लोग सोने की इस चिड़ियाँ को आखिर विदेशो में क्यों बंद रखे हुए है. काले धन की, काली कमाई विदेश भेजने के मामले में भारत अव्वल नंबर पर है। 70 लाख करोड़ रुपए का काला धन तो अकेले स्विस बैंक में जमा है। और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बैको में भी इनकी जमा पूंजी हो सकती है ? स्विस बैंक में जमा धन. काली कमाई को विदेश में छिपाने के पीछे हर घूसखोर और भ्रष्ट इंसान का एक ही मकसद होता है। मकसद ये कि विदेशी बैंकों के नियम उन्हें कानून से छिपाए रहते हैं। लेकिन अगर बैंक अपने नियमों में बदलाव करें तो काफी कुछ बदल सकता है। भारत से गया पैसा अगर वापस आता है तो इस देश की ढेरों दिक्कतें दूर हो जाएंगी। हर परिवार की जिंदगी सुधर सकती है। ये देश अमेरिका और चीन को भी पछाड़ सकता है। स्विस बैंक के अलावा दूसरे देशों की तिजोरियों में भी भारतीयों का अरबों रुपए जमा हो लेकिन अब भारत की तरफ से विदेशी बैंकों में अकूत दौलत जमा करने वालों पर नकेल कसी जा रही है। विदेश में जमा भारतीयों की काली कमाई को वापस लाने की कोशिशें तेज हैं लेकिन क्या ये इतना आसान काम है? क्या वो देश भारत के लिए अपने नियम बदलने को तैयार होंगे? ये बड़े सवाल हैं।
सब को शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय निःशुल्क देने हेतु देश-विदेश से भारत का काला धन ज़ब्त कर लिया जाना परम आवश्यक है| काले धन की इतनी विपुल धनराशि का स्रोत देश में सर्वत्र व्याप्त भ्रष्टाचार है| यही निर्धन जनता को असहनीय हो रही महंगाई का भी मूल कारण है| इस मामले में अब तक का सारा शासकीय सोंच ही घटिया साबित हुआ है| उदीयमान भारत को इसे बदल डालना होगा|भ्रष्टाचार, काले धन और महंगाई के विरुद्ध सार्वजनिक खुलापन ही भारतीय लोकतंत्र में वास्तविक प्रतिपक्ष है| अब कौन-कौन कब तक सचमुच प्रतिपक्ष में है, यह प्रत्येक भारतीय को स्वयमेव तय करना होगा|
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एम.के.पाण्डेय "निल्को जी"
VMW Team (Indai's New Invention)
+91-9044412246,45,27,23
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