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20 January, 2011

हरियाली


विजय पाण्डेय

हरियाली अब नजर नहीं आती
हर तरफ सिर्फ वीरानी ही वीरानी है
जंगल भी वीरान हो चले है
इंसानों के दिल भी अब वीरान हो गए है।


इनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलोजी नामक जर्नल में छपी खबर के अनुसार एसेक्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपनी शोध में पाया कि 5 मिनट की "हरित क्रिया" शरीर के लिए अति उपयोगी साबित हो सकती है. इसके लिए यह आवश्यक नहीं कि प्रतिदिन बगीचे मे जाकर व्यायाम ही करना पड़े. हम साइकलिंग कर सकते हैं, पैदल चल सकते हैं और अपने बगीचे की देखभाल भी कर सकते हैं. बात इतनी सी है कि प्रतिदिन 5 मिनट हरियाली के बीच बिताया जाए, चाहे आप कुछ भी करें. इस शोध से यह भी पता चला कि यूँ तो किसी प्रकार का हराभरा वातावरण जैसे कि बाग, बगीचे, खेत, खलिहान लाभदायी होते हैं परंतु पानी वाले हरे भरे प्रदेश जैसे कि तालाब का किनारा आदि सर्वाधिक लाभ पहुँचाते हैं. हरियाली का नाम लेने पर प्रदीप मानोरिया जी की लाइन याद आती है....

 गहरे और घने मेघों की सौगात धरा पर आई है
वन उपवन आँगन के गमले सब हरियाली छाई है
जहाँ अवनि पर कण माटी के बिछी पूर हरियाली है
और गगन पर रवि लोप है घटा खूब ही काली है
-
विजय पाण्डेय

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