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12 January, 2011

मकर सक्रांति


अनुज शुक्ला
मकर सक्रांति के दिन भगवान् भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं चूंकि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं अतः इस दिन को मकर सक्रांति के नाम से जाना जाता है | महाभारत काल में भीशमपितामा ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर सक्रांति का ही चयन किया था | मकर सक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरत के पीछे -पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी |
शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को देवतायों की रात्री अर्थात मकरात्मकता का प्रतीक तथा उतरायन को देवतायों का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है इसलिए इस दिन जप , तप , दान , स्नान , श्राद्ध ,तर्पण आदि धार्मिक क्रिया कलापों का विशेष महत्त्व है |धरना है की इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुनः प्राप्त होता है | इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल दान मोक्ष की प्राप्त करवाता है |

गोरखपुर के पंडित गोपी बाबा कहते है की इस मकर सक्रांति पर आपकी जन्मकुंडली में जो ग्रह कमजोर हो उस ग्रह से संबंधित दान देकर ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर कर अपने भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं इससे आपको करियर में सफलता मिलने लगेगी ।
सूर्य: माणिक्य, गेहूं, सवत्सा, गाय, लाल वस्त्र, लाल फूल, गुड़, स्वर्ण, तांबा, लाल चंदन, केशर, भूमि, भवन आदि।
चंद्र: टोकरी (बांस की), चावल, कर्पूर, सफेद कपड़ा, मोती, चांदी, दूध, दही, मिश्री, शकर, घी आदि।
मंगल: गेहूं, मसूर, लाल, कपड़ा, गुड़ तांबा, लाल फूल, लाल चंदन, केशर, लाल बैल, भूमि, मूंगा आदि।
बुध: हरा वस्त्र, स्वर्ण, ही मूंग, पन्ना, कस्तूरी आदि।
गुरु: पीला धान्य, पीला कपड़ा, पुखराज, स्वर्ण, चांदी, शकर, शहद, नमक, केसर, वृद्धों की सेवा, हल्दी, घोड़ा।
शुक्र: सफेद घोड़ा, गाय-बछड़े सहित हीरा, इत्र, सेंट, चावल, घी, कर्पूर, सफेद वस्त्र, चंदन, शकर, मिश्री।
शनि: उड़द, तिल, तेल, काली गाय, काला वस्त्र, कंबल, जूता, स्वर्ण, नीलम, चांदी आदि।
राहु: गेहूं, उड़द, गोमेद, काला घोड़ा, तलवार, तेल, लोहा, रत्न, अभ्रक, नीला कपड़ा।
केतु: लहसुनिया, तिल, कंबल, कस्तूरी, चाकू, लोहा, छतरी, सीसा, रागा, बकरा, काला कपड़ा आदि।


 मीठे स्वाद में जावो घुल मिल
 उड़ावो पंतग ऐसे की खिल जाये दिल
मकर सक्रांति की खुशियों में भर दो मिठास
VMW Team  के मजेदार लेखो के  साथ.....
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अनुज शुक्ला 
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