Blockquote

Followers

28 January, 2011

वसंत ऋतु

वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है। यों तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है, पर वसंत पंचमी (माघ शुक्ल 5) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं।


                                                                                                                                  vandana medical hall

Jhilmil Sitaron Ka

Jhilmil Sitaron Ka Aangan Hoga
Rimjhim Barasta Sawan Hoga
Aisa Sunder Sapna Apna Jeevan Hoga
Prem Ki Gali Mein Ek Chota Sa Ghar Banayenge
Kaliyan Na Mile Na Sahi Kaaton Se Sajayenge
Bagiya Se Sunder Woh Ban Hoga
Rimjhim Barasta Sawan Hoga

Teri Aankhon Se Saara Sansar Mein Dekhoongi
Dekhoongi Is Paar Ya Us Paar Mein Dekhoongi
Nainon Ko Tera Hi Darshan Hoga
Rimjhim Barasta Sawan Hoga

Phir To Mast Hawaon Ke Hum Jhonke Ban Jayenge
Naina Sunder Sapnon Ke Jharonkhe Ban Jayenge
Man Aashaon Ka Darpan Hoga
Rimjhim Barasta Sawan Hoga.

23 January, 2011

Advertising by Vijay, VMW Team

 
Vijay Mishra

Advertising is the process of a product or service; of trying to sell a product or service by drawing people attention to the product. Advertisement focus on all the good points of the product to make it appear as attractive as possible, so that people are tempted to buy it.
Advertising is a means of communication between the seller and the buyer. Sellers find advertising the best and quickest way to reach the widest section of consumer. Not only do advertisements inform us about the product, they impress, inspire and influence us to go and buy them. Often the success or  failure of a product depends on the effectiveness of the advertising strategy.
Advertising is largely done through the media.
Advertising has become an essential feature of the modern world. But why do we need advertising?
There are several reasons for advertising. The main reasons include

·     Increasing the sales of the product\service
o Giving information about the product\service to prospective buyers
§ Creating and maintaining a brand       identity or brand image
·     Communicating a change in the existing product line to consumers
o Creating awareness among consumers before launching or  introducing a new product or service
 -
VIJAY MISHRA
TINY BLOSSOM SR. SEC. SCHOOL
CIVIL LINES
JAIPUR

20 January, 2011

हरियाली


विजय पाण्डेय

हरियाली अब नजर नहीं आती
हर तरफ सिर्फ वीरानी ही वीरानी है
जंगल भी वीरान हो चले है
इंसानों के दिल भी अब वीरान हो गए है।


इनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलोजी नामक जर्नल में छपी खबर के अनुसार एसेक्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपनी शोध में पाया कि 5 मिनट की "हरित क्रिया" शरीर के लिए अति उपयोगी साबित हो सकती है. इसके लिए यह आवश्यक नहीं कि प्रतिदिन बगीचे मे जाकर व्यायाम ही करना पड़े. हम साइकलिंग कर सकते हैं, पैदल चल सकते हैं और अपने बगीचे की देखभाल भी कर सकते हैं. बात इतनी सी है कि प्रतिदिन 5 मिनट हरियाली के बीच बिताया जाए, चाहे आप कुछ भी करें. इस शोध से यह भी पता चला कि यूँ तो किसी प्रकार का हराभरा वातावरण जैसे कि बाग, बगीचे, खेत, खलिहान लाभदायी होते हैं परंतु पानी वाले हरे भरे प्रदेश जैसे कि तालाब का किनारा आदि सर्वाधिक लाभ पहुँचाते हैं. हरियाली का नाम लेने पर प्रदीप मानोरिया जी की लाइन याद आती है....

 गहरे और घने मेघों की सौगात धरा पर आई है
वन उपवन आँगन के गमले सब हरियाली छाई है
जहाँ अवनि पर कण माटी के बिछी पूर हरियाली है
और गगन पर रवि लोप है घटा खूब ही काली है
-
विजय पाण्डेय

18 January, 2011

उत्तर प्रदेश

एम.के.पाण्डेय "निल्को जी"
दोस्तों इस बार VMW Team  के एम.के.पाण्डेय "निल्को जी" आप को भारत का सबसे बड़ा राज्य (जनसंख्या के आधार पर) के बारे में बताने जा रहे है अच्छा लगने पर अपने सुझाव मेल या कमेन्ट जरुर करे.. धन्यवाद !

उत्तर प्रदेश का इतिहास बहुत प्राचीन और दिलचस्‍प है। उत्तर वैदिक काल में इसे ब्रह्मर्षि देश या मध्‍य देश के नाम से जाना जाता था। यह वैदिक काल के कई महान ऋषि-मुनियों, जैसे – भारद्वाज, गौतम, याज्ञवल्‍क्‍य, वशिष्‍ठ, विश्‍वामित्र और वाल्‍मीकि आदि की तपोभूमि रहा। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। करीब १६ करोड़ की जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेश विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला उप राष्ट्रीय इकाई है। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संराअमेरिका, इण्डोनिशिया, और ब्राज़ील की जनसंख्या प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है उत्तर प्रदेश की राज्धानी लखनऊ है । रामायण में वर्णित तथा हिन्दुओं के एक मुख्य भगवान "भगवान राम" का प्राचीन राज्य कौशल इसी क्षेत्र में था, अयोध्या इस राज्य की राजधानी थी। हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु के आठवे अवतार भगवान कृष्ण का जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर में हुआ था। संसार के प्राचीनतम शहरों में एक माना जाने वाला वाराणसी शहर भी यहीं पर स्थित है। वाराणसी के पास स्थित सारनाथ का चौखन्डी स्तूप भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन की याद दिलाता है।
उत्तर प्रदेश का भारतीय एवं हिन्दू धर्म के इतिहास मे अहम योगदान रहा है। उत्तर प्रदेश आधुनिक भारत के इतिहास और राजनीति का केन्द्र बिन्दु रहा है और यहाँ के निवासियों ने भारत के स्वतन्त्रता संग्राम और पाकिस्तान पृथकता आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभायी। इलाहाबाद शहर प्रख्यात राष्ट्रवादी नेताओं जैसे मोतीलाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास टन्डन और लालबहादुर शास्त्री का घर था। यह शहर भारत देश के आठ प्रधान मन्त्रियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लालबहादुर शास्त्री, चरण सिंह, विश्वनाथ प्रताप सिंह चन्द्रशेखर, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी का चुनाव क्षेत्र भी रहा है। इंदिरा गांधी के पुत्र स्वर्गीय संजय गांधी का चुनाव-क्षेत्र भी यहीं था और वर्तमान में सोनिया गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ रही हैं जबकि राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ रहे हैं। सन १९०२ में नार्थ वेस्ट प्रोविन्स का नाम बदल कर यूनाइटिड प्रोविन्स ऑफ आगरा एण्ड अवध कर दिया गया। साधारण बोलचाल की भाषा में इसे यूपी कहा गया। सन १९२० में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ कर दिया गया। प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद ही बना रहा और लखनऊ में उच्च न्यायालय की एक् न्यायपीठ स्थापित की गयी। स्वतन्त्रता के बाद १२ जनवरी सन १९५० में इस क्षेत्र का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश रख दिया गया। गोविंद वल्लभ पंत इस प्रदेश के प्रथम मुख्य मन्त्री बने। अक्टूबर १९६३ में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश एवम भारत की प्रथम महिला मुख्य मन्त्री बनी।
उत्तर प्रदेश के उत्तर में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश, पश्‍चिम में हरियाणा, दक्षिण में मध्‍य प्रदेश तथा पूर्व में बिहार राज्‍य है। सन २००० में पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र स्थित गढ़वाल और कुमाऊँ मण्डल को मिला कर एक नये राज्य उत्तरांचल का गठन किया गया जिसका नाम बाद में बदल कर उत्तराखण्ड कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं आगरा, अलीगढ, अयोध्या, बरेली, मेरठ, वाराणसी( बनारस), गोरखपुर, गाज़ियाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर, फ़ैज़ाबाद, कानपुर। इसके पड़ोसी राज्य हैं उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार। उत्तर प्रदेश की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है।
साहित्य के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का स्थान सर्वोपरि है. साहित्य और भारतीय सेना दो ऐसे क्षेत्र हैं जिनमे उत्तर प्रदेश निवासी गर्व कर सकते हैं. आदि कवी वाल्मीकि , तुलसीदास , कबीरदास , सूरदास से लेकर भारतेंदु हरिश्चंद्र, आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, आचर्य राम चन्द्र शुक्ल, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद , निराला, पन्त, बच्चन, महादेवी वर्मा, मासूम राजा, अज्ञये जैसे इतने महान कवि और लेखक हुए हैं उत्तर प्रदेश में कि पूरा पन्ना ही भर जाये. उर्दू साहित्य में भी बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है उत्तर प्रदेश का. फिराक़, जोश मलीहाबादी, चकबस्त जैसे अनगिनत शायर उत्तर प्रदेश ही नहीं वरन देश की शान रहे हैं.
संगीत उत्तर प्रदेश के व्यक्ति के जीवन में बहुत महतवपूर्ण स्थान रखता हैं यह तीन प्रकार में बांटा जा सकता है १- पारंपरिक संगीत एवं लोक संगीत : यह संगीत और गीत पारंपरिक मौको शादी विवाह, होली, त्योहारों आदि समय पर गया जाता है २- शास्त्रीय संगीत : उत्तर प्रदेश उत्तक्रिष्ठ गायन और वादन की परंपरा रही है. ३- हिंदी फ़िल्मी संगीत एवं भोजपुरी पॉप संगीत : इस प्रकार का संगीत उत्तर प्रदेश में सबसे लोकप्रिय है.
कत्थक उत्तर प्रदेश का एक परिष्कृत शास्त्रीय नृत्य है जो कि हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ किया जाता है। कत्थक नाम 'कथा' शब्द से बना है, इस नृत्य में नर्तक किसी कहानी या संवाद को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करता है। कत्थक नृत्य के प्रमुख कलाकार पन्डित बिरजू महाराज हैं। फरी नृत्य, जांघिया नृत्य, पंवरिया नृत्य, कहरवा, जोगिरा, निर्गुन, कजरी, सोहर, चइता गायन उत्तर प्रदेश की लोकसंस्कृतियां हैं ।
इलाहाबाद में प्रत्‍येक बारहवें वर्ष कुंभ मेला आयोजित होता है जो कि संभवत: दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। इसके अलावा इलाहाबाद में प्रत्‍येक 6 साल में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन भी होता है। इलाहाबाद में ही प्रत्‍येक वर्ष जनवरी में माघ मेला भी आयोजित होता है, जहां बड़ी संख्‍या में लोग संगम में डुबकी लगाते हैं। अन्‍य मेलों में मथुरा, वृंदावन व अयोध्‍या के झूला मेले शामिल हैं, जिनमें प्रतिमाओं को सोने एवं चांदी के झूलों में रखा जाता है। ये झूला मेले एक पखवाड़े तक चलते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा में डुबकी लगाना अत्‍यंत पवित्र माना जाता है और इसके लिए गढ़मुक्‍तेश्‍वर, सोरन, राजघाट, काकोरा, बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और अयोध्‍या में बड़ी संख्‍या में लोग एकत्रित होते हैं। आगरा जिले के बटेश्‍वर कस्‍बे में पशुओं का प्रसिद्ध मेला लगता है। बाराबंकी जिले का देवा मेला मुस्‍लिम संत वारिस अली शाह के कारण काफी प्रसिद्ध हो गया है। इसके अतिरिक्‍त यहां हिंदू तथा मुस्‍लिमों के सभी प्रमुख त्‍यौहारों को राज्‍य भर में मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश में सभी प्रकार के सैलानियों के लिए आकर्षण की कई चीजें हैं। प्राचीन तीर्थ स्थानों में वाराणसी, विंध्‍याचल, अयोध्‍या, चित्रकूट, प्रयाग, नैमिषारण्‍य, मथुरा, वृंदावन, देव शरीफ, फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्‍ती की दरगाह, सारनाथ, श्रावस्‍ती, कुशीनगर, संकिसा, कंपिल, पिपरावा और कौशांबी प्रमुख हैं। आगरा, अयोध्‍या, सारनाथ, वाराणसी, लखनऊ, झांसी, गोरखपुर, जौनपुर, कन्नौज, महोबा, देवगढ़, बिठूर और विंध्‍याचल में हिंदू एवं मुस्‍लिम वास्‍तुशिल्‍प और संस्‍कृति के महत्‍वपूर्ण खजाने हैं।

इसी के साथ अगले हफ्ते एक नई प्रदेश के बारे में जानेगे तब तक के लिए नमस्कार !-
जय हिंद !

मधुलेश पाण्डेय "निल्को जी"
 

 
अच्छा लगने पर अपने अमूल्य विचार मेल या कमेन्ट करे
धन्यवाद!
VMW Team (India's New Invention) 
+91-9024589902 & +91-8795245803

12 January, 2011

मकर सक्रांति


अनुज शुक्ला
मकर सक्रांति के दिन भगवान् भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं चूंकि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं अतः इस दिन को मकर सक्रांति के नाम से जाना जाता है | महाभारत काल में भीशमपितामा ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर सक्रांति का ही चयन किया था | मकर सक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरत के पीछे -पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी |
शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को देवतायों की रात्री अर्थात मकरात्मकता का प्रतीक तथा उतरायन को देवतायों का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है इसलिए इस दिन जप , तप , दान , स्नान , श्राद्ध ,तर्पण आदि धार्मिक क्रिया कलापों का विशेष महत्त्व है |धरना है की इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुनः प्राप्त होता है | इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल दान मोक्ष की प्राप्त करवाता है |

गोरखपुर के पंडित गोपी बाबा कहते है की इस मकर सक्रांति पर आपकी जन्मकुंडली में जो ग्रह कमजोर हो उस ग्रह से संबंधित दान देकर ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर कर अपने भविष्य को उज्जवल बना सकते हैं इससे आपको करियर में सफलता मिलने लगेगी ।
सूर्य: माणिक्य, गेहूं, सवत्सा, गाय, लाल वस्त्र, लाल फूल, गुड़, स्वर्ण, तांबा, लाल चंदन, केशर, भूमि, भवन आदि।
चंद्र: टोकरी (बांस की), चावल, कर्पूर, सफेद कपड़ा, मोती, चांदी, दूध, दही, मिश्री, शकर, घी आदि।
मंगल: गेहूं, मसूर, लाल, कपड़ा, गुड़ तांबा, लाल फूल, लाल चंदन, केशर, लाल बैल, भूमि, मूंगा आदि।
बुध: हरा वस्त्र, स्वर्ण, ही मूंग, पन्ना, कस्तूरी आदि।
गुरु: पीला धान्य, पीला कपड़ा, पुखराज, स्वर्ण, चांदी, शकर, शहद, नमक, केसर, वृद्धों की सेवा, हल्दी, घोड़ा।
शुक्र: सफेद घोड़ा, गाय-बछड़े सहित हीरा, इत्र, सेंट, चावल, घी, कर्पूर, सफेद वस्त्र, चंदन, शकर, मिश्री।
शनि: उड़द, तिल, तेल, काली गाय, काला वस्त्र, कंबल, जूता, स्वर्ण, नीलम, चांदी आदि।
राहु: गेहूं, उड़द, गोमेद, काला घोड़ा, तलवार, तेल, लोहा, रत्न, अभ्रक, नीला कपड़ा।
केतु: लहसुनिया, तिल, कंबल, कस्तूरी, चाकू, लोहा, छतरी, सीसा, रागा, बकरा, काला कपड़ा आदि।


 मीठे स्वाद में जावो घुल मिल
 उड़ावो पंतग ऐसे की खिल जाये दिल
मकर सक्रांति की खुशियों में भर दो मिठास
VMW Team  के मजेदार लेखो के  साथ.....
-
अनुज शुक्ला 

10 January, 2011

भारतीय गणतंत्र दिवस

योगेश पाण्डेय
 वर्ष 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्नेह भर उठता है। ऐसी अनेक महत्वपूर्ण स्मृतियां हैं जो इस दिन के साथ जुड़ी हुई है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को फहराकर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन् की घोषणा की थी। अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के आठ सौ चौरान्यवें (894) दिन बाद हमारा देश स्वतंत्र राज् बना। तब से आज तक हर वर्ष राष्ट्रभर में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। यही वह दिन था जब 1965 में हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया।। यही वह दिन है जब जनवरी 1930 में लाहौर ने पंडित जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगे को फहराया था और स्वतंत्र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की घोषणा की गई थी।
 211 विद्वानों द्वारा 2 महिने और 11 दिन में तैयार भारत के सँविधान को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्व था. 26 जनवरी एक विशेष दिन के रूप में चिह्नित किया गया था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1930 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था परंतु साथ साथ ही एक और महत्वपूर्ण फैसला इस अधिवेशन के दौरान लिया गया. इस दिन सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिनपूर्ण स्वराज दिवसके रूप में मनाया जाएगा. इस दिन सभी स्वतंत्रता सैनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे. इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था.

15
अगस्त 1947 में अंग्रेजों ने भारत की सत्ता की बागडोर जवाहरलाल नेहरू के हाथों में दे दी, लेकिन भारत का ब्रिटेन के साथ नाता या अंग्रेजों का अधिपत्य समाप्त नहीं हुआ. भारत अभी भी एक ब्रिटिश कॉलोनी की तरह था, जहाँ कि मुद्रा पर ज्योर्ज 6 की तस्वीरें थी. आज़ादी मिलने के बाद तत्कालीन सरकार ने देश के सँविधान को फिर से परिभाषित करने की जरूरत महसूस की और सविँधान सभा का गठन किया जिसकी अध्यक्षता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को मिली.

25
नवम्बर 1949 को देश के सँविधान को मंजूरी मिली. 24 जनवरी 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए. और इसके दो दिन बाद यानी 26 जनवरी 1950 को सँविधान लागू कर दिया गया. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. इस तरह से 26 जनवरी एक बार फिर सुर्खियों में गया. यह एक सयोंग ही था कि कभी भारत का पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन अब भारत का गणतंत्र दिवस बन गया था
गणतंत्र दिवस पर पूरे देश भर में छुट्टी मनाई जाती है। गणतंत्र दिवस पर भारत के प्रधान मंत्री दिल्ली के लाल किले पर तिरंगा लहराते हैं। उसके बाद गणतंत्र दिवस की परेड होती है, जिसमें अनेक झाँकियाँ भी दिखाई जाती हैं। भारत का एक एक प्रदेश एक झाँकी प्रस्तुत करता है। इस परेड में भारत की सांस्कृतिक विभिन्नता की झलक दिखती है। इसके बाद भारतीय सेना, अपनी फ़ायर पावर का प्रदर्शण करती है। इसके बाद सेएन अपने उन वीर जवानों को महावीर चक्र से पुरुस्क्रित करती है जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह किये बिना देश की रक्षा में अपनी जान की आहूति दे दी। इस दिन पर भारतीय सरकार उन बच्चों को आदर देती है जो अपनी जान पर खेल कर किसी और कइ जान को बचाया है। सभी स्कूलों में भी इस दिन पर भारतीय झंडा लहराया जाता है और राष्ट्र गान भी गाया जाता है। इस दिन पर सभी लोग अपने परिवार के साथ इस दिन का लुफ़्त उठाते हैं। यह दिन सभी भरतीयों के लिये बहुत महत्त्व्पूर्ण है।
किसी भी देश के संविधान का ना होना उस देश की रीढ़ की हड़्ड़ी ना होने के समान है,.यानी कि हमें असली आज़ादी 26 जनवरी को मिली जब हमारे देश के नेताओं ने वर्षों से भारतीयों के शोषण युक्त कलम से लिखी इबारत को तोड़कर अपना संविधान लागू किया। लेकिन अंधानुकरण के इस दौर में गणतंत्र सिर्फधनऔरगनका तंत्र बन कर रह गया है.. गणतंत्र का मतलब हैजनता का तंत्र जनता के लिएअर्थात् इस संविधान में सर्वोपरि है जनतंत्र पर क्या मौज़ूदा हालातों के बाद कहा जा सकता है कि इस जनतंत्र(गणतंत्र) में जनता का सर्वोपरि स्थान आज भी वैसा ही मौज़ूद है जिसकी परिकल्पना हमारे राष्ट्र भक्त शहीदों और नेताओं ने की थी। तमाम प्रयासों के बाद आज भी देश की जनता के पास अगर कुछ है तो सिर्फ एक मूक दर्शक की सीमा,बुरा मत देखों बुरा मत सुनों ,बुरा मत कहो की तर्ज पर आज हमारे पास है बुरा देखने की बुरा सुनने की लेकिन उस बुराई का प्रतिवाद नही कहने(करने) की सीमा। जिस विदेशी भाषा,विदेशी विचार,और विदेशी तंत्र के लिए आवाजें उठाई गई उन आदर्शों के मायने बैमानी साबित हो रहे है।आज इस देश के गणतंत्र को खुली चुनौती दी रही है...पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवादियों को भेज कर हमारे देश की नींवों को खोखला करता जा रहा है, नक्सलवाद लगातार हमारी छाती पर अपने उपद्रवकी कीलें ठोकता जा रहा है...उसके बाद भी हमसे सिवाय ढ़िढ़ौरा पीटने के और कुछ नहीं हो पा रहा है...हमारे पास सिवाय दूसरों के समाने हाथ फैलाकर चिल्लाने के आलावा कोई रास्ता ही नहीं होता...आखिर क्यों हम ये भूल रहे हैं कि शांति दूत गांधी की इस धरती पर आज़ाद और भगतसिंह ने भी जन्म लिया है....आइए इस गणतंत्र दिवस की पावन बेला पर एक बार फिर से इस देश को बापू के सपनों का भारत बनाने की कोशिश शुरू करें। आइए जातिवाद को छोडकर एक बार फिर से कमजोर पड़ चुकी देश की नींव को मजबूत करें।कम से कम यह एक सच्ची श्रृद्धांजलि तो होगी उन अमर शहीदों की....तुम हो हिन्दू तो मुझे मुसलमां जान लो
तुम हो गीता तो मुझे कुरान मान लो
कब तक रहेगें अलग अलग और सहेगें ज़ुदा ज़ुदा
मैं तुम्हें पूंजू ,तुम मुझे अज़ान दो
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

योगेश पाण्डेय
Loading...