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17 December, 2010

भारतीय संगीत --- दुर्गेश पाण्डेय

भारतीय संगीत प्राचीन काल से भारत मे सुना और विकसित होता संगीत है। इस संगीत का मूल स्रोत वेदों को माना जाता है। हिंदु परंपरा मे ऐसा मानना है कि ब्रह्मा ने नारद मुनि को संगीत वरदान में दिया था।
वैदिक काल में सामवेद के मंत्रों का उच्चारण उस समय के वैदिक सप्तक या सामगान के अनुसार सातों स्वरों के प्रयोग के साथ किया जाता था। गुरू-शिष्य परंपरा के अनुसार, शिष्य को गुरू से वेदों का ज्ञान मौखिक ही प्राप्त होता था व उन में किसी प्रकार के परिवर्तन की संभावना से मनाही थी। इस तरह प्राचीन समय में वेदों व संगीत का कोई लिखित रूप न होने के कारण उनका मूल स्वरूप लुप्त होता गया।
 संगीत में सात स्वर होते हैं ,सा रे ग म प ध नि.इन्ही स्वरों के आधार लेकर शास्त्रीय संगीत की पुरी ईमारत खड़ी हैं ,ये सात मूल स्वर होते हैं ,साथ ही इनकी श्रुतिया उपर निचे जाने से कोमल विकृत स्वर बनते हैं ,इस प्रकार कुल १२ स्वर होते हैं,अब आप पुछंगे की ये श्रुतिया क्या हैं ?श्रुति अर्थात बारीक़ बारीक़ बारीक़ स्वर ,जब हम एक स्वर से दुसरे स्वर को जाते हैं तो बीच में कई बहुत बारीक़ स्वर भी लगते हैं ,कुल मिलकर २२ श्रुतिया बताई गई हैं

दुर्गेश पाण्डेय

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