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10 December, 2010

10 दिसंबर यानी मानवाधिकार दिवस।.......... नीरज पाण्डेय

मानव अधिकारों से अभिप्राय "मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता से है जिसके सभी मानव प्राणी हकदार है.अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं के उदाहरण के रूप में जिनकी गणना की जाती है, उनमें नागरिक और राजनीतिक अधिकारों,नागरिक और राजनैतिक अधिकार सम्मिलित हैं जैसे कि जीवन और आजाद रहने का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के सामने समानता एवं आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के साथ ही साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार, भोजन का अधिकार काम करने का अधिकार एवं शिक्षा का अधिकार !
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पहली बार १० दिसंबर, १९४८ में सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा स्वीकार की थी। १९५० से महासभा ने सभी देशों को इसकी शुरुआत के लिए आमंत्रित किया।
संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मानवाधिकारों की रक्षा और उसे बढ़ावा देने के लिए तय किया
संयुक्त राष्ट्र ने २००५-०७ तक का समय प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में मानवाधिकार शिक्षा के लिए मुकर्रर किया है।

देश में २८ सिंतबर, १९९३ से मानव अधिकार कानून अमल में आया।
१२ अक्तूबर, १९९३ में सरकार ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया।

"मानवाधिकारों" को लेकर अक्सर विवाद बना रहता है। ये समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि क्या वाकई में मानवाधिकारों की सार्थकता है।

 
नीरज पाण्डेय
हरखौली
लार रोड देवरिया
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