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07 November, 2010

जयपुर में छठ के धूम

ऐसे त भर दुनिया के हिंदुलो के तरह बिहारो में तमाम तरह के पर्व-त्योहार मनावल जाला बाकि एगो पर्व अइसन बा जेकरा के अगर बिहारी पर्व कहल जाव त गलत न होई... जी हां रउआ ठीक समझनी हम सूर्यषष्ठी यानी कि छठ के ही बात करतानी.
छठ के महातम त सबका खातिर बहुत बा बाकी हमनी जइसन परदेसी लो खातिर एकर महातम तनी ज्यादा ही बा. इहे कारण बा कि हमनी भले गांव घर से दूर बानी स... बाकी छठी मइया अपना अंचरा से कबो हमनी के दूर न कइली.
सन 2000 हजार में हम पहिला साल छठ के मौका पर घर से दूर रही... सच बताई .... भीतर से करेजा रोवत रहे. तब एगो संगी हमरा के गलता किनारे लेकर गइल. जइसे गलता के नजदीक पहुंचे लगनीं... छठ वरतिया और उनकर संगी-साथी लो के भीड़ देखके मन धीरे-धीरे हलुक होखे लागल. गलता बीच पर पहुंच के त एकदम से हम हरान रह गइनी... भीड़ लाखों में. बुझाते न रहे कि हम गावं  से कहीं बाहर बानी. चारों तरफ माहौल एकदम छठमय भइल रहे...
खैर... वोकरा बाद से त जब भी छठ में  जयपुर  में रहेके पड़ेला तब गलता गइला बगैर त कुछ भुलाइल जइसन लागेला.
अबकी छठी मइया के कृपा से छठ में  देवरिया   अपना घरे जाएके मौका मिलतआ... घरे जाएके खुशी त बा... बाकी जयपुर के छठ के भी हम ओतने मिस करतानी...

तअ एक बार जोर से बोलीं छठी मइया की जय!!!


नरियवा जे फरेला घवद से ओ पर सुगा मेड़राय
सुगवा के मरबो धनुष से
सुगा गिरे मुरझाय
रोवें सुगा के सुगनिया
सुगा काहे मारल जाए
रखियों हम छठ के बरतिया आदित होइहें सहाय
दीनानाथ होइहें सहाय
सूरूज बाबा होइहें सहाय
मधुलेश कुमार पाण्डेय
"निल्को जी"
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